Short stories in hindi with moral: जब कभी भी कहानियों का जिक्र होता है तब बच्चो का भी जिक्र जरुर से किया जाता है,क्युकी ऐसा इसलिए कहानियाँ मुख्य रूप से बच्चों को ही सबसे ज्यादा पसदं होती है। ये कहानियां ही वो जरिया हैं जिससे यक़ीनन उन्हें नयी प्रेरणा मिलती है और साथ ही जीवन को सही तरीके से जीने की सही सिख मिलती है।

जिससे की बच्चो को उनके भविष्य में एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करती है। सच में ये छोटे बड़े Moral (नैतिक) Stories in Hindi काफी ज्यादा प्रेरणादायक होते हैं सभी बच्चों के लिए। इनमें हमेशा कुछ न कुछ सीख जरुर मिलती है अंत में। इसलिए हिंदी कहानियाँ सभी को हमेशा से पसंद आती है फिर चाहे वो छोटे हो या बड़े।

इन बच्चों की कहानियों में भी आपको काफी भिन्नता देखने को मिलेंगी। मेरे कहने का मतलब है की इन कहानियों के लेखक बहुत से अलग अलग प्रकार के कहानियां बच्चों के लिए लिखते हैं। जैसे की राजा रानी की कहानी, जानवरों की कहानी, भूतों की कहानी, पशुओं  की कहानी, पशियों की कहानी और ऐसे बहुत कुछ।

अक्सर आपने अपने बड़े बुजुर्गों को यह कहते हुए जरुर सुना होगा की उनके समय में उन्हें ये कहानियां उनके दादी, नानी या परिवार के बड़े बुजुर्ग ही सोते समय उन्हें सुनाया करते थे। लेकिन समय के साथ साथ सब कुछ बदलने लगा है।

अब बच्चों को आप गाँव में जाते हुए बहुत कम ही देखते होंगे क्योकि वो ज्यादा समय अपने Mobile या Computer में ही व्यतीत करते हैं, ऐसे में उन्हें कहानी सुनने के मज़ा नहीं मिल पाता है जो की पहले के लोगों ने अनुभव किया होगा। हमें दुःख है की आपको ये ख़ुशी से वंचित होना पड़ रहा है। लेकिन हाँ, हमारी ये कोशिश रहेगी की आपको भी हम वही सभी कहानियाँ सुनाने का मौक़ा मिले।

तो फिर बिना देरी के चलिए वो सभी कहानियों का मज़ा लेते हैं जो पढ़ के आप अपने बच्चो को सुना सकते है और उन्हें नैतिक शिक्षा दे सकते है |

शरारती चूहा: Short stories in hindi with moral

एक दिन रामू के घर में एक शरारती चूहा आ गया। वह बहुत छोटा सा था मगर सारे घर में भागा फिरता था। उसने रामू की किताब भी कुतर डाली थी। कुछ कपड़े भी कुतर दिए थे। रामू  की मम्मी जो खाना बनाती और बिना ढके रख देती , वह चूहा उसे भी चट कर जाता था चूहा खा – पीकर बड़ा हो गया था। एक दिन रामू की मम्मी ने एक बोतल में शरबत बनाकर रखा। शरारती चूहे की नज़र बोतल पर पड़ गयी।

चूहा कई तरकीब लगाकर थक गया था, उसने शरबत पीना था। चूहा बोतल पर चढ़ा किसी तरह से ढक्कन को खोलने में सफल हो जाता है। अब उसमें चूहा मुंह घुसाने की कोशिश करता है। बोतल का मुंह छोटा था मुंह नहीं घुसता। फिर चूहे को सुझाव आया उसने अपनी पूंछ बोतल में डाली। पूंछ  शरबत से गीली हो जाती है  उसे चाट-चाट कर  चूहे का पेट भर गया। अब वह रामू के तकिए के नीचे बने अपने बिस्तर पर जा कर आराम से करने लगा।

नैतिक शिक्षा – मेहनत करने से सभी कार्य सम्भव होते है|

मिटटी का फ्रिज: Small story of hindi

 एक गांव में एक कुम्हार रहता था जो मिटटी के मटके बनाया करता था उस कुम्हार का एक बेटा राकेश भी था जो अपने पिता के साथ मटके बनता था , राकेश  की माँ इस कुम्हार के काम से खुश नहीं थी वह राकेश  को अक्सर शहर में काम करने का दबाव डालती लेकिन राकेश  ये बोलता की उसकी ख़ुशी इसी काम में है। 

राकेश की माँ चिंतित थी क्यूंकि जल्द ही राकेश  की शादी होने वाली थी और कुछ दिन बाद राकेश  की शादी के लिए घर सजा दिया गया गाँव वालो की उपस्थि में शादी हो गई रमा  नाम की लड़की से विवहा संपन्न हुआ। 

एक दिन राकेश  की माँ ने रमा  से भी यही बात कही की उसका बेटा उसकी बात नहीं मानता वह शहर नहीं जाता काम के लिए उसने रमा  को कहने को बोला , अगले दिन आभा राकेश  के पास गयी और उसने शहर जाने की बात कही लेकिन राकेश  मिटटी के मटके बनाने में खुसी जाहिर करते हुए माना करदिया।

इस लगन को देख रमा  समझ चुकी थी की उनके पति को ये काम बहुत पसंद है तभी रमा  ने राकेश  के हाथो से बनाये एक लम्बे सुराई वाले मटके को देख उसने तारीफ की और कहा अगर आप इसे मेले में बेचेंगे तो बहुत ज्यादा पैसे मिलेंगे ये सुनकर राकेश  उत्साहित हुआ उसने और मटके बनाये और उस पर चित्रकारी करके उसको रंग दिया। 

फिर वह मेले ले जाकर मटके बेचने के लिए खड़ा हुआ उसके सारे मटके शाम तक बिकचुके थे उसने घर आकर अपने पिता को बहुत ज्यादा पैसे दिए उसी रात राकेश  ने रमा  से पूछा की अगर हम मिटटी की फ्रिज बनाये यानी मिटटी की अलमारी जिसमे सब्ज़ी राखी जा सके जो बिना बिजली के चलती हो ,रमा  ने बोलै क्या आप ऐसी अलमारी बना सकते फिर हम और जयदा पैसे कमा सकते है। 

अगले दिन राकेश  ने 4 मिटटी की अलमारी बनायीं और मेले में ले जाकर बेचना शुरू किया लोगो ने इस किस्म की अलमारी पहेली बार देखि उसकी सारी अलमारी बिक गयी एक रिपोर्टर ने उस अलमारी का फोटो खींच केर न्यूज़ में छापा अब राकेश  को अलमारी के लिए आर्डर आने लगे लोग उसके घर जाकर उससे अलमारी खरीदना चाहते थे। ये सब माँ को देख अपनी गलती का एहसास हुवा और अपनी बहु रमा को धन्यवाद दिया। 

हमने क्या सीखा 

इस कहानी से हमे ये सबक मिलता है की हमे अपने काम में फोकस करना चाहिए और हमे किसी के काम को और उत्साहित करना चाहिए ,नए नए आईडिया को भी काम में लाना चाहिए।

 मूर्ख गधे की कहानी: Hindi Short Stories with Moral

एक गाँव मे नमक बेचने वाला रोज शहर अपने गधे पर नमक बेचने जाता था। वह  नमक के भारी बोरे  गधे पर लाद देता और गधा उसको शहर ले जाने के लिए नदी पार करता था।

एक बार नमक बेचने वाला गधे पर नमक लाद कर नदी पार कर रहा था तबी गधे का पैर लडख़ड़ा जाता है और गधा नदी में गिर जाता है , अब नमक की सारी बोरी गीली हो चुकी थी जिसमे से काफी नमक पानी मे ही घुल चुका । गधे का वजन अब काफी हल्का हो चुका था ।

अगले दिन गधा नदी पार करते वक़्त फिर गिर जाता है और नमक घुल जाता है वजन हल्का हो जाता है । ऐसा ही गधे ने लगातार 7 दिन तक किया अब गधा रोज इस वजह से खुश था। लेकिन अब गधे के मालिक को उसकी चाल समझ आ चुकी थी तभी उसने गधे को सबक सिखाने की सोच।

इस बार उस गधे पर कॉटन रुई से भरे बोरे लादे गए जोकि बहुत हल्के थे।

गधे को रास्ते मे नदी मिल गयी उसने अपनी वही चाल फिर चली ,लेकिन इस बार जब वह पानी से उठा तो उसका वजन काफी भारी हो चुका था और गधे का सिर चकरा गया कि इस बार हल्का क्यों नही हुआ। गधे ने हल्के वजन को भी हल्का करने के चक्कर मे उसे पानी मे गिला करके सारी रुई भारी करली थी।अब गधे को सबक मिल चुका था उसदिन के बाद गधे ने कोई चाल नही चली।

हमने क्या सीखा

इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है कि हर बार भाग्य साथ नही देता बल्कि हमे भी अपनी बुद्धि लगानी होती है।

 बिल्ली बच गई: Moral Stories in Hindi in Short

ढोलू-मोलू दो भाई थे। दोनों खूब खेलते, पढ़ाई करते और कभी-कभी खूब लड़ाई भी करते थे। एक दिन दोनों अपने घर के पीछे खेल रहे थे। वहां एक कमरे में बिल्ली के दो छोटे-छोटे बच्चे थे। बिल्ली की मां कहीं गई हुई थी , दोनों बच्चे अकेले थे। उन्हें भूख लगी हुई थी इसलिए  खूब रो रहे थे। ढोलू-मोलू ने दोनों बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनी और अपने दादाजी को बुला कर लाए।

दादा जी ने देखा दोनों बिल्ली के बच्चे भूखे थे। दादा जी ने उन दोनों बिल्ली के बच्चों को खाना खिलाया और एक एक कटोरी दूध पिलाई। अब बिल्ली की भूख शांत हो गई। वह दोनों आपस में खेलने लगे। इसे देखकर ढोलू-मोलू बोले बिल्ली बच गई दादाजी ने ढोलू-मोलू को शाबाशी दी।

नैतिक शिक्षा 

 दूसरों की भलाई करने से ख़ुशी मिलती है।

 बलवान कछुए की मूर्खता: Moral stories of hindi

एक सरोवर में विशाल नाम का एक कछुआ रहा करता था। उसके पास एक मजबूत कवच था। यह कवच शत्रुओं से बचाता था। कितनी बार उसकी जान कवच के कारण बची थी।

एक बार भैंस तालाब पर पानी पीने आई थी। भैंस का पैर विशाल पर पड़ गया था। फिर भी विशाल को नहीं हुआ। उसकी जान कवच से बची थी। उसे काफी खुशी हुई क्योंकि बार-बार उसकी जान बच रही थी।

यह कवच विशाल को कुछ दिनों में भारी लगने लगा। उसने सोचा इस कवच से बाहर निकल कर जिंदगी को जीना चाहिए। अब मैं बलवान हो गया हूं , मुझे कवच की जरूरत नहीं है।

विशाल ने अगले ही दिन कवच को तालाब में छोड़कर आसपास घूमने लगा।

अचानक हिरण का झुंड तालाब में पानी पीने आया। ढेर सारी हिरनिया अपने बच्चों के साथ पानी पीने आई थी।

उन हिरणियों के पैरों से विशाल को चोट लगी, वह रोने लगा।

आज उसने अपना कवच नहीं पहना था। जिसके कारण काफी चोट जोर से लग रही थी।

विशाल रोता-रोता वापस तालाब में गया और कवच को पहन लिया।  कम से कम कवच से जान तो बचती है।

नैतिक शिक्षा

 प्रकृति से मिली हुई चीज को सम्मान पूर्वक स्वीकार करना चाहिए वरना जान खतरे में पड़ सकती है।

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 लकड़हारा और सोने की कुल्हाड़ी: Short Stories in Hindi for Kids

एक समय की बात है जंगल के पास एक लकड़हारा रहता था वह जंगल की लकड़ी काट कर अपना जीवन गुजार करता था।एक दिन वह पेड़ पर बैठ लकड़ी काट रहा था तभी उसके हाथ से उसकी कुल्हाड़ी छूट कर नदी में गिर गयी।

उस नदी का बाहों इतना तेज था और साथ ही वह गहरी नदी थी उसने आस पास हाथ डालकर कुल्हाड़ी खोजी लेकिन उसे नही मिली उसने बहुत कोसिस की लेकिन कुल्हाड़ी कही नजर नहीं आयी फिर वह वहाँ बेठ कर रोने लगा उसके रोने की आवाज सुनकर पानी से एक जलपरी निकल आयी और उस लकड़हारे से पूछ क्यों रो रहे हो।

लकड़हारा जलपरी को देख आश्चर्य रहे गया लेकिन उसने अपनी सारी बात उस परी को बतायी तब परी ने उसको एक चांदी की कुल्हाड़ी पानी से निकाल कर दी तो लकड़हारे ने कहा ये उसकी कुल्हाड़ी नहीं है। परी ने दुबारा पानी से एक कुल्हाड़ी दी जो अब सोने की थी लकड़हारे ने फिर कहा ये भी उसकी कुल्हाड़ी नहीं है।

अबकी बार परी ने लकड़हारे को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी खोज के दी तब लकड़हारे ने मुस्कुराते हुए कहा ये मेरी है । उसकी इस ईमानदारी को देख कर परी ने उसको चांदी और सोने की कुल्हाड़ी उपहार में भेंट की।

हमे क्या सीख मिली

इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि ईमानदारी दुनिया की सबसे अच्छी नीति है और ईमानदारी से बहुत अनमोल चीज कोई नही। 

सुई देने वाली पेड़ की कहानी: Short story In hindi

एक जंगल के पास दो भाई रहा करते थे. इन दोनों में से जो भाई बड़ा था वो बहुत ही ख़राब बर्ताव करता था छोटे भाई के साथ. जैसे की वो प्रतिदिन छोटे भाई का सब खाना ख लेता था और साथ में छोटे भाई के नए कपड़े भी खुद पहन लेता था.

एक दिन बड़े भाई ने तय किया की वो पास के जंगल में जाकर कुछ लकड़ियाँ लायेगा जिसे की वो बाद में बाज़ार में बेच देगा कुछ पैसों के लिए.

जैसे ही वह जंगल में गया वहीं वो बहुत से पेड़ काटे, फ़िर ऐसे ही एक के बाद एक पेड़ काटते हुए, वह एक जादुई पेड़ पर ठोकर खाई.

ऐसे में पेड़ ने कहा, अरे मेहरबान सर, कृपया मेरी शाखाएं मत काटो. अगर तुम मुझे छोड़ दो तब, मैं तुम्हें एक सुनहरा सेब दूंगा. वह उस समय सहमत हो गया, लेकिन उसके मन में लालच जागृत हुआ. उसने पेड़ को धमकी दी कि अगर उसने उसे ज्यादा सेब नहीं दिया तो वह पूरा धड़ काट देगा।

ऐसे में जादुई पेड़, बजाय बड़े भाई को सेब देने के, उसने उसके ऊपर सैकड़ों सुइयों की बौछार कर दी. इससे बड़े भाई दर्द के मारे जमीन पर लेटे रोने लगा.

अब दिन धीरे धीरे ढलने लगा, वहीँ छोटे भाई को चिंता होने लगी. इसलिए वह अपने बड़े भाई की तलाश में जंगल चला गया. उसने उस पेड़ के पास बड़े भाई को दर्द में पड़ा हुआ पाया, जिसके शरीर पर सैकड़ों सुई चुभी थी. उसके मन में दया आई, वह अपने भाई के पास पहुंचकर, धीरे धीरे हर सुई को प्यार से हटा दिया.

ये सभी चीज़ें बड़ा भाई देख रहा था और उसे अपने पर गुस्सा आ रहा था. अब बड़े भाई ने उसके साथ बुरा बर्ताव करने के लिए छोटे भाई से माफी मांगी और बेहतर होने का वादा किया. पेड़ ने बड़े भाई के दिल में आए बदलाव को देखा और उन्हें वह सब सुनहरा सेब दिया जितना की उन्हें आगे चलकर जरुरत होने वाली थी|

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की हमेशा सभी को दयालु और शालीन बनना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों को हमेशा पुरस्कृत किया जाता है|

 दो मेंढ़कों की कहानी: Short funny story in hindi

एक बार मेंढकों का एक दल पानी की तलाश में जंगल में घूम रहा था। अचानक, समूह में दो मेंढक गलती से एक गहरे गड्ढे में गिर गए।

दल के दूसरे मेंढक गड्ढे में अपने दोस्तों के लिए चिंतित थे। गड्ढा कितना गहरा था, यह देखकर उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि गहरे गड्ढे से बचने का कोई रास्ता नहीं है और कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है।

वे लगातार उन्हें हतोत्साहित करते रहे क्योंकि दो मेंढक गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश कर रहे थे। वो दोनों जितनी भी कोशिश करते लेकिन काफ़ी सफल नहीं हो पाते।

जल्द ही, दो मेंढकों में से एक ने दूसरे मेंढकों पर विश्वास करना शुरू कर दिया – कि वे कभी भी गड्ढे से नहीं बच पाएंगे और अंततः हार मान लेने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।

दूसरा मेंढक अपनी कोशिश जारी रखता है और आखिर में इतनी ऊंची छलांग लगाता है कि वह गड्ढे से बच निकलता है। अन्य मेंढक इस पर चौंक गए और आश्चर्य किया कि उसने यह कैसे किया।

अंतर यह था कि दूसरा मेंढक बहरा था और समूह का हतोत्साह नहीं सुन सकता था। उसने ये सोचा कि वे उसके इस कोशिश पर खुश कर रहे हैं और उसे कूदने के लिए उत्साहित कर रहे हैं !

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की दूसरों की राय आपको तभी प्रभावित करेगी जब आप उसपर विश्वास करेंगे, बेहतर इसी में है की आप खुद पर ज़्यादा विश्वास करें, सफलता आपके कदम चूमेगी।

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 कौवे की गिनती: Small Moral Stories in Hindi

एक दिन की बात है, अकबर महाराज जे अपने सभा में एक अजीब सा सवाल पूछा, जिससे पूरी सभा के लोग हैरान रह गए। जैसे ही वे सभी उत्तर 

जानने की कोशिश कर रहे थे, तभी बीरबल अंदर आए और पूछा कि मामला क्या है।

उन्होंने उससे सवाल दोहराया। सवाल था, “शहर में कितने कौवे हैं?

बीरबल तुरंत मुस्कुराए और अकबर के पास गए। उन्होंने उत्तर की घोषणा की; उनका जवाब था की, नगर में इक्कीस हजार पांच सौ तेईस कौवे हैं। यह पूछे जाने पर कि वह उत्तर कैसे जानते हैं, तब बीरबल ने उत्तर दिया, “अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने के लिए कहें।

यदि अधिक मिले,, तो कौवे के रिश्तेदार उनके पास आस-पास के शहरों से आ रहे होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के कौवे शहर से बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास जरूर गए होंगे।” 

यह जवाब सुनकर, राजा को काफ़ी संतोष मिला। इस उत्तर से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को एक माणिक और मोती की जंजीर भेंट की। वहीं उन्होंने बीरबल की बुद्धि की काफ़ी प्रसंशा करी।

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की आपके उत्तर में सही स्पष्टीकरण होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही उत्तर का होना।

कुत्ता और हड्डी की कहानी: Short Animal Stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक बार एक कुत्ता था जो खाने की तलाश में रात-दिन सड़कों पर घूमता रहता था।

एक दिन, उसे एक बड़ी रसीली हड्डी मिली और उसने तुरंत उसे अपने मुंह के बीच में पकड़ लिया और घर की ओर ले गया। घर के रास्ते में, उसने एक नदी पार करनी पड़ी। वहाँ उसने गौर किया की एक और कुत्ता ठीक उसी के तरफ़ ही देख रहा था, वहीं जिसके मुंह में भी एक हड्डी थी।

इससे इस कुत्ते के मन में लालच उत्पन्न हुई और वह उस हड्डी को अपने लिए चाहने लगा। लेकिन जैसे ही उसने अपना मुंह खोला, जिस हड्डी को वह काट रहा था, वह नदी में गिर गई और डूब गई। ऐसा इसलिए हुआ क्यूँकि वो दूसरा कुत्ता और कोई नहीं बल्कि उसकी ही परछायी थी, जो की उसे पानी में दिख रहा था। अब जब की उसके मुँह की हड्डी गिर चुकी थी पानी में इसलिए उस रात वह भूखा ही रहा और अपने घर चला गया।

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की अगर हम हमेशा दूसरों से ईर्ष्या करते हैं, तो हम लालची कुत्ते की तरह सबक़ सीखना पड़ेगा, वहीं जो हमारे पास पहले से है हम उसे भी खो देंगे।

मुर्गे की अकल ठिकाने:  Simple Short Motivation Stories in Hindi

एक समय की बात है, एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको समझ में आएगी, और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला।  सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है।

नैतिक शिक्षा 

 घमंड नहीं करना चाहिए आपकी अहमियत लोगो को बिना बताये पता चलता है।

रेलगाड़ी: Short Moral Story for Adults in Hindi

पिंकी बहुत प्यारी लड़की है। पिंकी कक्षा दूसरी में पढ़ती है। एक दिन उसने अपनी किताब में रेलगाड़ी देखी।  उसे अपनी रेल – यात्रा याद आ गई, जो कुछ दिन पहले पापा-मम्मी के साथ की थी। पिंकी ने चौक उठाई और फिर क्या था, दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बना दिया। उसमें पहला डब्बा जुड़ गया , दूसरा डब्बा जुड़ गया , जुड़ते – जुड़ते कई सारे डिब्बे जुड़ गए। जब चौक खत्म हो गया पिंकी उठी उसने देखा कक्षा के आधी दीवार पर रेलगाड़ी बन चुकी थी। फिर क्या हुआ  – रेलगाड़ी दिल्ली गई  ,  मुंबई गई , अमेरिका गई , नानी के घर गई , और दादाजी के घर भी गई।

नैतिक शिक्षा 

 बच्चों के मनोबल को बढ़ाइए कल के भविष्य का निर्माण आज से होने दे।

 बलवान कछुए की मूर्खता: Very Short Motivation Story in Hindi

एक बार भैंस तालाब पर पानी पीने आई थी। भैंस का पैर विशाल पर पड़ गया था। फिर भी विशाल एक सरोवर में विशाल नाम का एक कछुआ रहा करता था। उसके पास एक मजबूत कवच था। यह कवच शत्रुओं से बचाता था। कितनी बार उसकी जान कवच के कारण बची थी।

को नहीं हुआ। उसकी जान कवच से बची थी। उसे काफी खुशी हुई क्योंकि बार-बार उसकी जान बच रही थी।

यह कवच विशाल को कुछ दिनों में भारी लगने लगा। उसने सोचा इस कवच से बाहर निकल कर जिंदगी को जीना चाहिए। अब मैं बलवान हो गया हूं , मुझे कवच की जरूरत नहीं है।

विशाल ने अगले ही दिन कवच को तालाब में छोड़कर आसपास घूमने लगा।

अचानक हिरण का झुंड तालाब में पानी पीने आया। ढेर सारी हिरनिया अपने बच्चों के साथ पानी पीने आई थी।

उन हिरणियों के पैरों से विशाल को चोट लगी, वह रोने लगा।

आज उसने अपना कवच नहीं पहना था। जिसके कारण काफी चोट जोर से लग रही थी।

विशाल रोता-रोता वापस तालाब में गया और कवच को पहन लिया।  कम से कम कवच से जान तो बचती है।

नैतिक शिक्षा 

प्रकृति से मिली हुई चीज को सम्मान पूर्वक स्वीकार करना चाहिए वरना जान खतरे में पड़ सकती है।

 चींटी और कबूतर की कहानी: Good Short Moral Stories in Hindi

गर्मियों के दिन थे और एक चींटी पानी की तलाश में इधर उधर घूम रही थी ,कुछ देर घूमने के बाद उसने डोर एक नदी देखी ,नदी देख वह बहुत खुश हो गयी फिर वह पानी पीने के लिए एक छोटी सी चट्टान पर चढ़ गई ,लेकिम वह फिसल कर नदी में गिर गयी।

वह जब डूब रही थी तो उसे एक कबूतर ने देख लिया । कबूतर पास के एक पेड़ पर ही बैठा था उसने चींटी की फौरन मदद की ,चींटी को डूबता देख कबूतर ने झट से एक पत्ता पानी मे गिरा दिया। इस तरह से चींटी की जान बच गयी और वह कबूतर की एहसान मंद हो गयी।

इस घटना के बाद चींटी और कबूतर दोनों अच्छे दोस्त बन गए।और उनके दिन खुशी से बीतने लगे लेकिन एकदिन जंगल मे एक शिकारी आया। उसने पेड़ पर बैठे उसी खूबसूरत कबूतर को देखा और फिर अपनी बंदूक से कबूतर पर निशाना साधने लगा।

लेकिन वही पास में वह चींटी भी मजूद थी वह ये सब देख रही थी चींटी फौरन शिकारी के पास गई और जोर से उसके पैर पे काट जिससे वह दर्द से चिल्लाने लगा और बंदूक भी गिरा दी। आवाज सुनकर कबूतर ने शिकारी को देख लिया ।

कबूतर को एहसास हुआ कि उसके साथ क्या हो सकता था और फिर कबूतर फौरन वह से उड़ गया । जब शिकारी चला गया तो कबूतर ने चींटी के पास आकर उसका धन्यवाद दिया। इस तरह दोनों एक दूसरे के काम आए।

सिख 

इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि नेक काम कभी बेकार नही जाता ,अच्छे काम करते रहिए वह पलट कर आपके लिए अच्छे साबित होंगे।

 लालची लोमड़ी की कहानी: Cute Inspirational Short Moral Stories in Hindi

गर्मियों के दिन थे जंगल मे एक लोमड़ी बहुत भूखी थी और भूख के कारण वह खाने की तलाश में इधर उधर घूम रही थी ,कुछ देर खोजने के बाद उसे एक खरगोश मिला लेकिन लोमड़ी ने उसे खाने के बजाय उसे छोड़ दिया क्योंकि वह बहुत छोटा था और लोमड़ी का इससे कुछ अलाभला नही होने वाला।

फिर कुछ देर खोजने के बाद लोमड़ी को रास्ते मे एक हिरण मिली, हिरण देख उसके मुंह मे पानी आ गया और उसने हिरण को पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी अपनी पूरी ताकत और रफ्तार के साथ पीछा किया लेकिन वह हिरण को पकड़ नही सका चूँकि वह पहेले से खाने की तलाश में थक चुकी थी।

जब उसे कुछ खाने को नही मिला तब उसने उसी खरगोश को खाने के लिए सोच जो उसने छोटा समझ कर छोड़ा था। फिर लोमड़ी उसी रास्ते वापस उस खरगोश की तलाश में गयी लेकिन इस बार वहाँ पर ख़रगोश नही था वह जा चुका था। और फिर लोमड़ी को थक हारकर घर वापस लौटना पड़ा कई दिनों तक उसे खान नई मिला।

हमे क्या सीख मिली

इस लालची लोमड़ी से हमे ये सबक मिलता है कि ज्यादा लालच करना कभी भी फलदायक नहीं होता।

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प्यासा कौवा: Motivational Short Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है ! कड़कड़ाती गर्मियों में एक प्यासा कौवा पानी की खोज में तड़प रहा था। वह प्यास के कारण वह अधमरा हो गया था। उसे ऐसा लग रहा था की वह जीवन के अंतिम सांसे गिन रहा हो | उसकी नजर अचानक एक पानी के घड़े पर गिरी! पानी का घड़ा देखकर उसे ऐसा लगा मानो की उसे जीवन दान मिला है। वह जैसे घड़े के पास पहुंचा और उसे देखा की पानी घड़े के बहुत अंदर था। कोवे की चोंच से पानी पीना तो असंभव था। कौवे ने बहुत प्रयास किया पर वह असफल हुआ। कौवा पहले से भी और ज्यादा निराश हो गया था।

क्योंकि उसके आखों के सामने पानी था पर पानी पीने में असक्षम था। कुछ समय बाद घड़े को देखते-देखते कौवे की नजर घड़े के पास पड़े कंकड़ों पर गिरी और और एक तरकीब सूझी। उसने विचार किया कि अगर मेहनत करके  एक-एक करके सारे कंकड़ घड़े में डाले तो पानी ऊपर आ सकता है। पुरे भरसक प्रयास और धेय्य से कंकर पानी में फेंकना शुरू किया । कौवे ने जी जान से मेहनत की और छोटे छोटे पत्थर डालने से पानी का स्तर ऊपर आ गया जिससे वह पानी पीने में सफल हो गया।

नैतिक शिक्षा   

        प्यासा कौवा की कहानी से क्या शिक्षा मिलती है, “मेहनत सफलता कुंजी है।”

बंदर और मगरमच्छ: Inspirational Short Moral Stories in Hindi 

एक नदी के किनारे एक जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था. उस पेड़ पर बहुत ही मीठे-मीठे जामुन लगते थे. एक दिन एक मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया. बन्दर ने उससे पूछा तो उसने अपने आने की वजह बताई. बन्दर ने बताया की यहाँ बहुत ही मीठे जामुन लगते हैं और उसने वो जामुन मगरमछ को दिए. उसकी मित्रता नदी में रहने वाले मगरमच्छ के साथ हो गयी. वह बन्दर उस मगरमच्छ को रोज़ खाने के लिए जामुन देता रहता था|

एकदिन उस मगरमच्छ ने कुछ जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाये. स्वादिष्ट जामुन खाने के बाद उसने यह सोचकर कि रोज़ाना ऐसे मीठे फल खाने वाले का दिल भी खूब मीठा होगा, उसने अपने पति से कहा कि उसे उस बन्दर का दिल चाहिए और वो इसी ज़िद पर अड़ गई. उसने बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि जब तक बन्दर का कलेजा उसे मिलेगा वो पायेगी| पत्नी कि ज़िद से मजबूर हुए मगरमच्छ ने एक चाल चली और बन्दर से कहा कि उसकी भाभी उसे मिलना चाहती है. बन्दर ने कहा कि वो भला नदी में कैसे जायेगा? मगरमच्छ ने उपाय सुझाया कि वह उसकी पीठ पर बैठ जाये, ताकि सुरक्षित उसके घर पहुँच जाए.

बन्दर भी अपने मित्र की बात का भरोसा कर, पेड़ से नदी में कूदा और उसकी पीठ पर सवार हो गया. जब वे नदी के बीचों-बीच पहुंचे, मगरमच्छ ने सोचा कि अब बन्दर को सही बात बताने में कोई हानि नहीं और उसने भेद खोल दिया कि उसकी पत्नी उसका दिल खाना चाहती है. बन्दर का दिल टूट गया, उसको धक्का तो लगा, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया.

बन्दर तपाक से बोला “ओह मेरे मित्र तुमने, यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई क्योंकि मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ में सम्भाल कर रखा है. अब जल्दी से मुझे वापस नदी के किनारे ले चलो ताकि मैं अपना दिल लाकर अपनी भाभी को उपहार में देकर उसे खुश कर सकूं.”

मूर्ख मगरमच्छ बन्दर को जैसे ही नदी-किनारे ले कर आया बन्दर ने ज़ोर से जामुन के पेड़ पर छलांग लगाई और क्रोध में भरकर बोला, “मूर्ख ,दिल के बिना भी क्या कोई ज़िन्दा रह सकता है ? जा, आज से तेरी-मेरी दोस्ती समाप्त.”

सीख       

       इससे पहली यह सीख मिलती है कि मुसीबत के क्षणों में धैर्य नहीं खोना चाहिए और अनजान से दोस्ती सोच समझकर करनी चाहिए.

– दूसरे, मित्रता का सदैव सम्मान करें.

बोलती गुफा: Short horror story in hindi

जंगल में एक बूढ़ा शेर मारा-मारा फिर रहा था. बुढ़ापे के कारण उसका शरीर कमज़ोर हो चूका था और यही वजह थी कि कई दिनों से उसे खाना भी नसीब नहीं हुआ था. बुढ़ापे के कारण वह शिकार नहीं कर पाता था. कोई भी जानवर उसके हाथ नहीं आ रहा था. छोटे-छोटे जानवर भी उसे चकमा देकर भाग जाते थे. एक बार वह भटकते-भटकते बहुत थक गया तो एक जगह पर रुककर सोचने लगा कि ऐसे कैसे काम चलेगा, क्या करूं ? किधर जाऊं? कैसे अपना पेट भरूं ? इस तरह तो मैं मर जाऊंगा.

अचानक उसकी नज़र एक गुफा पर पड़ी. उसने सोचा कि इस गुफा में कोई जंगली जानवर ज़रूर रहता होगा. मैं इस गुफा के अन्दर बैठ जाता हूं, जैसे ही वह जानवर आएगा, मैं उसे खाकर अपना पेट भर लूंगा. शेर उस गुफा के अंदर जाकर बैठ गया और अपने शिकार की प्रतीक्षा करने लगा.

दरअसल, वह गुफा एक गीदड़ की थी. गीदड़ जैसे ही अपनी गुफा की तरफ बढ़ने लगा, उसने ने गुफा के करीब शेर के पंजों के निशान देखे. उसे समझते देर नहीं लगी और वो फौरन खतरा भांप गया. उसके सामने उसकी मौत थी, लेकिन सामने संकट देखकर भी उसने अपना संयम नहीं खोया बल्कि उसकी बुद्धि तेजी से काम करने लगी कि इस शत्रु से कैसे बचा जाए ?

उसके दिमाग में नई बात आ ही गई, वह गुफा के द्वार पर खड़ा होकर बोला–‘‘ओ गुफा !’’ जब अंदर से गुफा ने कोई उत्तर न दिया, तो गीदड़ एक बार फिर बोला, ‘‘सुन गुफा ! तेरी मेरी यह संधि है कि मैं बाहर से आऊंगा, तो तेरा नाम लेकर बुलाऊंगा, जिस दिन तुम मेरी बात का उत्तर नहीं दोगी मैं तुझे छोड़कर किसी दूसरी गुफा में रहने चला जाऊंगा.’’ जवाब न मिलता देख गीदड़-बार-बार अपनी बात दोहराने लगा.अन्दर बैठे शेर ने गीदड़ की यह बात सुनी,

तो वह यह समझ बैठा कि गुफा गीदड़ के आने पर बोलती होगी. शेर अपनी आवाज को मधुर बनाकर बोला, ‘‘अरे आओ गीदड़ भाई… स्वागत है!’’ ‘‘अरे शेर मामा,  तुम हो? बुढ़ापे में तुम्हारी बुद्धि इतना भी नहीं सोच पा रही कि गुफाएं कभी नहीं बोलतीं… कहकर वह तेजी से पलटकर भागा. शेर ने उसे पकड़ने के लिए गुफा से बाहर तो ज़रूर आया, किंतु तब तक वह गीदड़ नौ दो ग्याह हो चुका था. 

सिख 

 मुसीबत के समय में भी संयम नहीं खोना चाहिए और अपनी बुद्धि का दामन नहीं छोड़ना चाहिए| 

साधू और चूहे की कहानी: Short motivational story in hindi

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक साधु मंदिर में रहा करता था। उनकी दिनचर्या रोजाना प्रभु की भक्ति कराना और आने-जाने वाले लोगों को धर्म का उपदेश देना थी। गांव वाले भी जब भी मंदिर आते, तो साधु को कुछ न कुछ दान में दे जाते थे। इसलिए, साधु को भोजन और वस्त्र की कोई कमी नहीं होती थी।

रोज भोजन करने के बाद साधु बचा हुआ खाना छींके में रखकर छत से टांग देता था। समय ऐसे ही आराम से निकल रहा था, लेकिन अब साधु के साथ एक अजीब-सी घटना होने लगी थी। वह जो खाना छींके में रखता था, गायब हो जाता था। साधु ने परेशान होकर इस बारे में पता लगाने का निर्णय किया। उसने रात को दरवाजे के पीछे से छिपकर देखा कि एक छोटा-सा चूहा उसका भोजन निकालकर ले जाता है। दूसरे दिन उन्होंने छींके को और ऊपर कर दिया, ताकि चूहा उस तक न पहुंच सके, लेकिन यह उपाय भी काम नहीं आया।

उन्होंने देखा की चूहा और ऊंची छलांग लगाकर छींके पर चढ़ जाता और भोजन निकाल लेता था। अब साधु चूहे से परेशान रहने लगा था। एक दिन उस मंदिर में एक भिक्षुक आया। उसने साधु को परेशान देखा और उसकी परेशानी का कारण पूछा, तो साधु ने भिक्षुक को पूरा किस्सा सुना दिया। भिक्षुक ने साधु से कहा कि सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि चूहे में इतना ऊंचा उछलने की शक्ति कहां से आती है।

उसी रात भिक्षुक और साधु दोनों ने मिलकर पता लगाना चाहा कि आखिर चूहा भोजन कहां ले जाता है। दोनों ने चुपके से चूहे का पीछा किया और देखा कि मंदिर के पीछे चूहे ने अपना बिल बनाया हुआ है। चूहे के जाने के बाद उन्होंने बिल को खोदा, तो देखा कि चूहे के बिल में खाने-पीने के सामान का बहुत बड़ा भण्डार है।

तब भिक्षुक ने कहा कि इसी वजह से ही चूहे में इतना ऊपर उछलने की शक्ति आती है। उन्होंने उस सामग्री काे निकाल लिया और गरीबों में बांटा दिया। जब चूहा वापस आया, तो उसने वहां पर सब कुछ खाली पाया, तो उसका पूरा आत्मविश्वास समाप्त हो गया। उसने साेचा कि वह फिर से खाने-पीने का सामान इकट्ठा कर लेगा। यह सोचकर उसने रात को छींके के पास जाकर छलांग लगाई, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण वह नहीं पहुंच पाया और साधु ने उसे वहां से भगा दिया।

कहानी से सीख

संसाधनों के अभाव में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इसलिए, जो भी संसाधन आपके पास हों, उसका ध्यान रखना चाहिए।

ब्राह्मण बकरी और तीन ठग: very short hindi story with moral

किसी गांव में शम्भुदयाल नाम का एक प्रसिद्ध ब्राह्मण रहता था। वह बहुत विद्वान था और लोग आए दिन उस अपने घर में भोजन के लिए निमंत्रण देते रहते थे। एक दिन ब्राह्मण एक सेठ जी के यहां से भोजन करके आ रहा था। लौटते समय सेठ ने ब्राह्मण को एक बकरी उपहार में दी, जिससे ब्राह्मण रोजाना उसका दूध पी सकें।

ब्राह्मण बकरी को कंधे पर रखकर घर की ओर जा रहा था। रास्ते में तीन ठगों ने ब्राह्मण और उसकी बकरी को देख लिया और ब्राह्मण को लूटने का षड्यंत्र रचा। वे ठग थोड़ी-थोड़ी दूरी पर जाकर खड़े हो गए।

जैसे ही ब्राह्मण पहले ठग के पास से गुजरा, तो ठग जोर-जोर से हंसने लगा। ब्राह्मण ने इसका कारण पूछा तो ठग ने कहा, ‘महाराज मैं पहली बार देख रहा हूं कि एक ब्राह्मण देवता अपने कंधे के ऊपर गधे को लेकर जा रहे हैं।’ ब्राह्मण को उसकी बात सुनकर गुस्सा आ गया और ठग को भला-बुरा कहते हुए आगे बढ़ गया।

थोड़ी ही दूरी पर ब्राह्मण को दूसरा ठग मिला। ठग ने गंभीर स्वर में पूछा, ‘हे ब्राह्मण महाराज, क्या इस गधे के पैर में चोट लगी है, जो आप इसे अपने कंधे पर रखकर ले जा रहे हैं।’ ब्राह्मण उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गया और ठग से कहा, ‘तुम्हे दिखाई नहीं देता है कि यह बकरी है, गधा नहीं। ठग ने कहा, ‘महाराज शायद आपको किसी ने बेवकूफ बना दिया है, बकरी की जगह गधा देकर।’ ब्राह्मण ने उसकी बात सुनी और सोचता हुआ आगे बढ़ गया।

कुछ दूरी पर ही उसे तीसरा ठग दिखाई दिया। तीसरे ठग ने ब्राह्मण को देखते ही कहा, ‘महाराज आप क्यों इतनी तकलीफ उठा रहे हैं, आप कहें, तो मैं इसे आपके घर तक छोड़ कर आ जाता हूं, मुझे आपका आशीर्वाद और पुण्य दोनों मिल जाएंगे।’ ठग की बात सुनकर ब्राह्मण खुश हो गया और बकरी को उसके कंधे पर रख दिया।

थोड़ी दूर जाने पर तीसरे ठग ने पूछा, ‘महाराज आप इस गधे को कहां से लेकर आ रहें हैं।’ ब्राह्मण ने उसकी बात सुनी और कहा, ‘भले मानस यह गधा नहीं बकरी है।’ ठग ने जोर देकर कहा, ‘हे ब्राह्मण देवता, लगता है किसी ने आपके साथ छल किया है और यह गधा दे दिया।’

ब्राह्मण ने सोचा कि रास्ते में जो भी मिल रहा है बस एक ही बात कह रहा है। तब उसने ठग से कहा, ‘एक काम करो, यह गधा मैं तुम्हें दान करता हूं, तुम ही इसे रख लो।’ ठग ने ब्राह्मण की बात सुनी और बकरी को लेकर अपने साथियों के पास आ गया। फिर तीनों ठगों ने बाजार में उस बकरी को बेचकर अच्छी कमाई की और ब्राह्मण ने उनकी बात मानकर अपना नुकसान कर लिया।

कहानी से सीख

 किसी भी झूठ को अगर कई बार बोला जाए, तो वो सच लगने लगता है, इसलिए हमेशा अपने दिमाग का उपयोग करें और सोच-विचार कर ही किसी पर विश्वास करें।

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हाथी और बंदर: Short love story in hindi

एक घने जंगल में एक बंदर और एक हाथी रहते थे। हाथी बड़ा शक्तिशाली था। वो बड़े-बड़े पेड़ों को एक ही झटके में उखाड़ देता था। बंदर काफी दुबला-पतला, लेकिन वो बड़ा ही फुर्तीला और तेज था। दिनभर बंदर जंगल के पेड़ों पर उछलकूद करता रहता था। बंदर और हाथी दोनों को ही अपने गुणों पर बड़ा ही घमंड था।

दोनों ही एक-दूसरे से खुद को ज्यादा अच्छा मानते थे। इस वजह से दोनों में हमेशा बहस होती रहती थी। उसी जंगल में एक उल्लू भी रहता था, जो अक्सर बंदर और हाथी की हरकतें देखाता था। वह इन दोनों के लड़ाई-झगड़े से परेशान हो गया था। एक दिन उस उल्लू ने उन दोनों से कहा, ‘जिस तरह तुम दोनों लड़ते हो, इससे कोई फैसला नहीं होने वाला है। तुम दोनों एक प्रतियोगिता के जरिए आसानी से यह फैसला कर सकते हो कि तुम दोनों में से सबसे शक्तिशाली कौन है।’

बंदर और हाथी दोनों को उल्लू की बात अच्छी लगी। दोनों ने फिर एक साथ पूछा, ‘इस प्रतियोगिता में क्या करना होगा?’

उल्लू ने कहा, ‘इस जंगल को पार करने पर एक दूसरा जंगल आता है। जहां पर एक काफी पुराना पेड़ है, जिस पर एक सोने का फल लगा हुआ है। तुम दोनों में से उस सोने के फल को जो पहले लाएगा, उसे ही इस प्रतियोगिता का विजेता बनेगा और असल मायनों में सबसे शक्तिशाली कहलाएगा।

बंदर और हाथी दोनों को उल्लू की बात अच्छी लगी। दोनों ने फिर एक साथ पूछा, ‘इस प्रतियोगिता में क्या करना होगा?’

उल्लू ने कहा, ‘इस जंगल को पार करने पर एक दूसरा जंगल आता है। जहां पर एक काफी पुराना पेड़ है, जिस पर एक सोने का फल लगा हुआ है। तुम दोनों में से उस सोने के फल को जो पहले लाएगा, उसे ही इस प्रतियोगिता का विजेता बनेगा और असल मायनों में सबसे शक्तिशाली कहलाएगा। उल्लू की बात सुनते ही बंदर और हाथी बिना कुछ सोचे-समझे दूसरे जंगल की तरफ निकले। बंदर ने अपनी फुर्ती दिखानी शुरू की। वह एक ही छलांग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंच जाता। वहीं, हाथी तेजी से दौड़ने लगा और रास्ते में आने वाली हर चीज को अपने मजबूत सूंड से उखाड़ फेंकता।

थोड़ी ही देर में हाथी और बंदर उस जंगल से बाहर निकल गए। इस जंगल से दूसरे जंगल के बीच के रास्ते में एक नदी बहती थी। उसे पार करने के बाद ही दूसरे जंगल में पहुंचा जा सकता था।

बंदर ने फिर से अपनी फुर्ती दिखाई और झट से वह नदी में कूद गया, लेकिन पानी की लहर काफी तेज थी, तो बंदर नदी में बहने लगा। बंदर को नदी में बहते हुए देखरकर हाथी ने तुंरत अपनी सूंड से उसे पकड़कर पानी के बाहर निकाल दिया।

हाथी के इस व्यवहार को देखकर बंदर काफी हैरान हुआ। उसने विनम्र होकर हाथी को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद कहा और अपनी हार मानते हुए हाथी को ही आगे का सफर तय करने के लिए कहा।

बंदर की इस बात को सुनकर हाथी ने कहा, ‘मैं नदीं पार कर सकता है। तुम भी मेरी पीठ पर बैठकर इसे पार कर लो।’

बंदर हाथी की बात मान गया और वह हाथी के पीठ पर बैठ गया। इस तरह दोनों ने नदी पार कर ली और दूसरे जंगर में पहुंच गए। फिर दोनों ने मिलकर सोने के लगे हुए फल वाले पेड़ को भी खोज निकाला। सबसे पहले हाथी ने अपनी अपनी सूंड से उस पेड़ को गिराना चाहा, लेकिन वह पेड़ काफी मजबूत था। हाथी के प्रहार से वो पेड़ नहीं उखड़ा।

फिर हाथी ने निराश होकर कहा,  ‘मैं अब यह फल नहीं तोड़ सकता हूं।’

बंदर बोला, ‘चलो, मैं भी एक बार कोशिश करके देखता हूं।’

बंदर फुर्ती से उस पेड़ पर चलने लगा और उस डाली पर पहुंच गया जहां पर सोने का फूल लगा हुआ था। उसने वह फल तोड़ लिया और पेड़ के नीचे उतर गया।

इसके बाद दोनों वापस नदी पार करके अपने जंगल लौट आए और उल्लू को वह सोने का फल दे दिया।

फल पाने के बाद उल्लू जैसे ही इस प्रतियोगिता के लिए विजेता का नाम बोला, वैसे ही बंदर और हाथी ने मिलकर उसकी बात को रोक दिया।

दोनों ने एक साथ कहा, ‘उल्लू दादा, अब हमें विजेता का नाम जानने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रतियोगिता को हम दोनों ने मिलकर पूरा किया है। हमें यह समझ में आ गया है कि हर किसी का गुण अपने आप में अलग और खास होता है। हमने यह भी फैसला किया है कि आगे से अब हम कभी भी इस बात पर बहस भी नहीं करेंगे और मित्र की तरह इस जंगल में रहेंगे।’

उल्लू को बंदर और हाथी की बात सुनकर काफी खुशी हुई। उसने दोनों से कहा, ‘मैं तुम्हें यही समझाना चाहता था कि सभी एक-दूसरे से अलग होते हैं। अलग-अलग गुण और शक्तियां ही हमें एक दूसरे की मदद करने के काबिल बनाती हैं। साथ ही हर किसी की अपनी कमजोरियां भी होती हैं, इसलिए एक-दूसरे के साथ मिलकर रहना ही सबसे अच्छा होता है।’

उसी दिन से हाथी और बंदर दोनों मित्र हो गए और वह जंगल में खुशी-खुशी रहने लगे।

कहानी से सीख

हमें एक-दूसरे के गुणों और शक्तियों का सम्मान करना और आपस में मिल-जुलकर रहना चाहिए।

 भूखी चिड़िया: Funny story in hindi short

सालों पहले एक घंटाघर में टींकू चिड़िया अपने माता-पिता और 5 भाइयों के साथ रहती थी। टींकू चिड़िया छोटी सी थी। उसके पंख मुलायम थे। उसकी मां ने उसे घंटाघर की ताल पर चहकना सिखाया था।

घंटाघर के पास ही एक घर था, जिसमें पक्षियों से प्यार करने वाली एक महिला रहती थी। वह टींकू चिड़िया और उसके परिवार के लिए रोज रोटी का टुकड़ा डालती थी।

औरत के खाने पर निर्भर था। अब उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और न ही वो अपने लिए खान जुटाने के लिए कुछ करते हैं।

एक दिन भूख से बेहाल होने पर टींकू चिड़िया के पिता ने कीड़ों का शिकार करने का फैसला किया। काफी मेहनत करने के बाद उन्हें 3 कीड़े मिले, जो परिवार के लिए काफी नहीं थे। वे 8 लोग थे, इसलिए उन्होंने टींकू और उसके 2 छोटे भाइयों को खिलाने के लिए कीड़े साइड में रख दिए।

इधर, खाने की तलाश में भटक रही टींकू, उसके भाई और उसकी मां ने एक घर की खिड़की में चोंच मारी, ताकि कुछ मिल जाए, लेकिन कुछ नहीं मिला। उल्टा घर के मालिदिनों के खाने का इंतजाम हो चुका था। वह जब खुशी-खुशी घर पहुंचा, तो वहां कोई नहीं मिला। वह परेशान हो गया।

तभी टींकू चिड़िया, उसका भाई और मां वापस लौटे, तो पिता उन्हें पहचान नहीं पाए और गुस्से में उन्होंने सबको भगा दिया। टींकू ने पिता को समझाने की काफी कोशिश की। क ने उनपर राख फेंक दी, जिससे तीनों भूरे रंग के हो गए।

उधर, काफी तलाश करने के बाद टींकू के पिता को एक ऐसी जगह मिली, जहां काफी संख्या में कीड़े थे। उनके कई उसने बार-बार बताया कि किसी ने उनके ऊपर रंग फेंका है, लेकिन टींकू के हाथ असफलता ही लगी।

उसकी मां और भाई भी निराश हो गए, लेकिन टींकू ने हार नहीं मानी। वह उन्हें लेकर तालाब के पास गई और नहलाकर सबकी राख हटा दी। तीनों अब अपने पुराने रूप में आ गए। अब टींकू के पिता ने भी उन्हें पहचान लिया और माफी मांगी।

अब सब मिलकर खुशी-खुशी एक साथ रहने लगे। उनके पास खाने की भी कमी नहीं थी।

कहानी से सीख  

कभी भी किसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। इंसान को खुद मेहनत करके अपनी जरूरत की चीजों को जुटाना चाहिए।

गंजा आदमी और मखी: 10 line short story in hindi

एक समय की बात है… गर्मी की दोपहर थी। एक गंजा आदमी सुबह से काम करते-करते थककर आराम करने बैठा था। एक मक्खी कहीं से उड़ती हुई आई और उसके आस-पास मंडराने लगी।

गंजा आदमी उसे उड़ाता पर बार-बार वह उसके माथे पर बैठ जाती और उसे काट लेती। परेशान होकर उसने एक जोर का पंजा उसे मारा।

मक्खी तो उड़ गई पर अपना ही हाथ उसे सिर पर जोर का लगा। कुछ पलों बाद मक्खी फिर से आकर काटने लगी। सिर पर बैठने पर गंजे ने उसे फिर से जोर से मारा।

मक्खी इस बार भी बच गई। कुछ देर शांत रही। शीघ्र ही मक्खी ने फिर से भिनभिनाना शुरु कर दिया। गंजा व्यक्ति समझ गया। उसने कहा, “दुष्ट शत्रुओं पर ध्यान देने से व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है उस पर ध्यान न देने में ही भलाई

है…” थोड़ी देर बाद मक्खी उड़कर किसी और को बताने चली गई।

सिख 

 दुष्ट शत्राओं पर ध्यान देने से व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है।

बिल्ली के गले में घंटी:short funny story in hindi

एक मकान में ढेर सारे चूहे रहते थे। कहीं से एक दिन एक बिल्ली आ गई। बिल्ली से बचने का उपाय ढूँढने के लिए चूहों ने एक सभा बुलाई।

एक चूहे ने कहा, “एक घंटी लानी चाहिए और उसे बिल्ली के गले में बाँध दें, वह जहाँ भी जाएगी हमें पता चल जाएगा।”

तभी एक बूढ़े चूहे ने कहा, “सलाह तो ठीक है पर बिल्ली के गले में घंटी बाँधेगा कौन?” सारे चूहे एक दूसरे की ओर देखने लगे पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा।

सिख    

असंभव कार्य कहना आसान है पर करना कठिन।

लोमड़ी और अंगूर: Short Moral Stories in Hindi For Class 1

एक बार जंगल में लोमड़ी भोजन की खोज में घूम रही थी। गर्मी से परेशान लोमड़ी एक बगीचे में पहुँच गयी। पास ही उसे अंगूर का एक बाग दिखा। ढेर सारे अंगूर गुच्छों में लटके हुए थे। उसे बहुत प्यास लगी थी। तभी उसे अंगूर का एक पका गुच्छा लटका हुआ दिखाई दिया।

पके अंगूर देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया। उसने सोचा, “आहा! कितने अच्छे अंगूर हैं, इनसे मेरी प्यास बुझ जाएगी।”

वह थोड़ा पीछे गई, निशाना साधा और दौड़कर उछली पर अंगूर तक न पहुँच पाई। उछल-उछल कर गुच्छा पकड़ने की कोशिश करी पर सफल न हो सकी।

अंगूर का गुच्छा उसकी पहुँच से बस जरा सा बच जाता था। उछल-उछल कर बेचारी लोमड़ी थक गई। अंत में वह वापस जाने लगी। जाते-जाते उसने यह सोचकर संतोष किया, “ये अंगूर खट्टे हैं! इन्हें पाने के लिए अपना समय बर्बाद करना व्यर्थ है।”

सिख 

इच्छित वस्तु न मिलने पर मूर्ख उसकी बुराई करने लगते हैं।

शेर और सूअर: Short motivational story in hindi for success

किसी जंगल में एक शेर रहता था। गर्मी के कारण जंगल में पानी सूखता जा रहा था। एक पोखर में थोड़ा पानी देखकर शेर वहाँ पहुँचा। तभी एक सूअर भी वहाँ पानी ढूँढता हुआ आ गया।

दोनों में कौन पानी पीयेगा इस बात को लेकर झगड़ा शुरु हो गया। लड़ाई बराबरी पर थी। प्यास से दोनों बेहाल थे।

अचानक उन्होंने आसमान में बहुत सारे गिद्ध उड़ते देखे। गिद्धों ने सोचा, “अच्छा है, लड़ लें दोनों… कोई तो मरेगा ही फिर मजा आएगा… जमकर आज हमारी दावत होगी।”

गिद्धों को ऊपर मंडराते देखकर शेर और सूअर ने अपनी लड़ाई रोक दी। उन्हें माजरा समझ में आ गया था।

शेर ने सूअर से कहा, “यदि हम लोग इसी तरह लड़ेंगे तो अवश्य ही लड़ते-लड़ते मर जाएँगे और गिद्धों को दावत खाने का अवसर मिल जाएगा। उनका भोजन बनने की जगह मित्रता करने में ही हमारी भलाई है…” और फिर दोनों ने साथ में पानी पी लिया।

सिख 

झगड़ा करने से अच्छा है दोस्त बनाना।

काली हिरन: Short hindi stories by premchand

एक हिरणी की एक आँख में किसी शिकारी का तीर लग गया। उसे अब एक ही आँख से दिखाई देता था।

पर वह दुखी नही हुई किसी भी खतरे से बचने के लिए वह ऊँची पहाड़ी पर चरा करती थी।

एक बार नाव पर सवार होकर समुद्र की ओर से शिकारी आए।

हिरणी आवाज से चौकन्नी हो गई। उसने सिर घुमाकर चारों ओर देखा। नाव से निशाना साधते शिकारी को देखकर वह सब समझ गई और पलक झपकते चौकड़ी भरकर नौ दो ग्यारह हो गई।

सिख 

सूझबूझ से अपने को बचाया जा सकता है।

चतुर किसान: Short story of premchand in hindi

एक बार एक किसान एक बकरी, घास का एक गट्ठर और एक शेर को लिए नदी के किनारे खड़ा था। उसे नाव से नदी पार करनी थी लेकिन नाव बहुत छोटी थी कि वह सारे सामान समेत एक बार में पार नहीं जा सकता था।

वह अगर शेर को पहले ले जाकर नदी पार छोड़ आता है तो इधर बकरी घास खा जाएगी और अगर घास को पहले नदी पार ले जाता है तो शेर बकरी को खा जाएगा ।

अंत में उसे एक समाधान सूझ गया। उसने प बकरी को साथ में लिया और नाव में बैठकर नदी के पार छोड़ आया। इसके बाद दूसरे चक्कर में उसने शेर को नदी पार छोड़ दिया लेकिन लौटते समय बकरी को फिर से साथ ले आया।

इस बार वह बकरी को इसी तरफ छोड़कर घास के गट्ठर को दूसरी ओर शेर के पास छोड़ आया। इसके बाद वह फिर से नाव लेकर आया और बकरी को भी ले गया। इस प्रकार, उसने नदी पार कर ली और उसे कोई हानि भी नहीं हुई।

एकता में बल: Short story books in hindi

एक बार की बात है। कबूतरों का एक झुंड था। अपने राजा के साथ वह भोजन की तलाश में इधर-उधर उड़ता रहता था। एक दिन, वे सारे कबूतर एक जाल में फँस गए। उन्होंने जाल से छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

कबूतरों के राजा के मन में एक विचार आया । उसने सारे कबूतरों से कहा कि अगर वे सभी एक साथ उड़ने के लिए बल लगाएँ तो वे जाल को साथ में लेकर उड़ सकते हैं। सारे कबूतरों ने उसकी बात मानी और पूरा बल लगाकर जाल को साथ ले उड़े।

शिकारी ने जब कबूतरों को जाल के साथ ही उड़ते देखा तो वह हैरान रह गया। कबूतर उड़ते-उड़ते एक चूहे के पास पहुँचे। चूहा उनका विश्वसनीय मित्र था। चूहे ने तुरंत ही अपने दाँतों से जाल काट दिया और सारे कबूतर मुक्त हो गए ।

मेंडक और साप: Short story of hindi

एक साँप ने एक झील में रहने वाले सारे मेंढकों को खा जाने की योजना बनाई । साँप ने मेंढकों से कहा, “एक ब्राह्मण के शाप के कारण मैं तुम लोगों की सेवा करने यहाँ आया हूँ।’

मेंढकराज बहुत उत्साहित हुआ और उसने मेंढकों को यह बात बताई। सारे मेंढक उछलकर साँप की पीठ पर चढ़कर सवारी करने निकल पड़े।

अगले दिन, साँप बोला, “मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं तेजी से रेंग तक नहीं पा रहा हूँ। ” मेंढकराज बोला, “तुम अपनी पूँछ पर सबसे पीछे बैठे सबसे छोटे मेंढक को खा सकते हो । ‘

साँप ने वैसा ही किया। कुछ दिनों में साँप एक-एक करके सारे मेंढकों को खा गया । केवल मेंढकराज ही बचा । अगले दिन, मेंढकराज फिर बोला, “तुम अपनी पूँछ पर सबसे पीछे बैठे एक मेंढक को खा सकते हो,” साँप तुरंत उसको ही खा गया।

नाजुक चूजा: Top 10 moral stories in hindi

एक बार की बात है, एक नाजुक चूजा जंगल में सैर के लिए निकला। वह देवदार के पेड़ के नीचे से जा रहा था तभी अचानक एक फल उसके सिर पर आ गिरा।

नाजुक चूजे ने समझा कि हो न हो आसमान गिर रहा है। भयभीत होकर वह दौड़ने लगा। उसने जंगल के राजा शेर को यह बताने का निर्णय किया और तेजी से दौड़ने लगा। उसे बेतहाशा भागते देखकर मुर्गी ने पूछा, “अरे! ओ नाजुक चूजे, कहाँ दौड़े जा रहे हो?”

हाँफता-हाँफता नाजुक चूजा बोला, “आह! आसमान गिर रहा है, भागो… मैं शेर भाई को सूचित करने जा रहा हूँ।” मुर्गी भी नाजुक चूजे के साथ हो ली।

मार्ग में उनकी मुलाकात बत्तख से हुई। सारी बातें जानकर वह भी इनके साथ दौड़ने लगी। चलते-चलते उन्हें लोमड़ी मिली। उसने पूछा, “अरे भाई, तुम सब कहाँ जा रहे हो?” उन तीनों ने कहा, “हम लोग शेर को बताने जा रहे हैं कि आसमान गिर रहा है।”

लोमड़ी उन तीनों को शेर के पास ले गई। शेर सभी के साथ उस पेड़ के नीचे आया तभी फिर से देवदार का एक फल नाजुक चूजे पर गिरा और वह घबराकर चिल्लाया, “आह! वह देखो, आसमान गिर रहा है।” यह सुनकर सभी एक साथ हँसने लगे।

सिख 

बिना समझे अपफवाहें न फैलाएं।

चीटी और टिड्डा: Very short story

गर्मियों के दिन थे। एक मैदान में एक टिड्डा अपनी ही मस्ती में झूम-झूम कर गाना गा रहा था। तभी उधर से एक चींटी गुजरी। वह एक मक्के का दाना उठाकर अपने घर ले जा रही थी।

टिड्डे ने उसे बुलाया और कहा, “चींटी रानी, चींटी रानी, कहाँ जा रही होघ? इतना अच्छा मौसम है… आओ बातें करें… मस्ती करें…”

चींटी ने कहा, “टिड्डे भाई, मैं सर्दियों के लिए भोजन इकट्ठा कर रही हूँ। बहुत काम पड़ा है… मुझे क्षमा कर दोए मैं बैठ नहीं सकती।”

टिड्डे ने फिर कहा, “अरे! सर्दियों की चिंता क्यों करती हो? अभी तो सर्दी आने में बहुत देर है…” पर चींटी मुस्कराकर चलती रही। उसे अपना काम पूरा करना था।

शीघ्र ही सर्दियाँ आ गईं। टिड्डे के पास खाने के लिए कुछ नहीं था जबकि चींटी अपने इकट्ठे किए अनाज को आराम से बैठकर खा रही थी। टिड्डे को अब आभास हुआ कि कठिन दिनों के लिए उसे भी पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए थी।

सिख 

आज किए गए कार्य का फल आने वाले समय में मिलता है।

नीलकंठ और मोर: 10 Lines Short Stories with Moral in Hindi

एक समय की बात है… एक नीलकंठ ने मोरों को नाचते हुए देखा। वह उनके सुंदर पंखों से मोहित हो गया। वह घूमता-घूमता मोरों के रहने की जगह पहुँचा।

वहाँ उसने मोरों के ढेर सारे पंख गिरे हुए देखे। नीलकंठ ने सोचा कि यदि मैं इन पंखों को लगा ले तो मैं भी मोरों की तरह सुंदर बन जाऊँगा।

यह सोचकर उसने सभी पंखों को उठाया और अपनी पूँछ के चारों ओर रखकर बाँध लिया। फिर ठुमकता हुआ वह मोरों के बीच पहुँचा और उन्हें घूम-घूमकर दिखाने लगा।

मोरों ने उसे पहचान लिया और चोंच से मारना शुरु कर दिया। चोंच मारने के साथ वे बँधे हुए पंखों को भी खींचते जाते थे। सारे पंख निकालकर ही वे शांत हुए।

नीलकंठ के भाई-बंधु दूर से यह तमाशा देख रहे थे। नीलकंठ दुखी मन से अपने भाई बंधु के बीच पहुँचा। सभी उससे नाराज थे उन्होंने कहा, “सुंदर पक्षी बनने के लिए मात्र सुंदर पंख आवश्यक नहीं है। ईश्वर ने सबको अलग-अलग सुंदरता दी है।”

नैतिक शिक्षा 

 स्वाभाविक रहें, और दूसरों की नकल न करें।

बलशाली मछली: Short Story in Hindi with Moral

बहुत समय पहले की बात है। एक दयालु और नेक मछली थी। तभी भयानक सूखा पड़ा। संकट समझकर नेक मछली ने अपनी और अपने साथियों की जान बचाने का निश्चिय किया। एक दिन, हर तरह के खतरों का सामना करते हुए नेक मछली कीचड़ में जगह बनाती हुई सतह पर आई । उसने वर्षा के देवता इंद्र से प्रार्थना की, “हे देव! हमारे पाप क्षमा कर दो। कृपया बारिश को भेजकर हमें इस संकट से निकालो।”

उसकी यह गुहार सुनकर स्वर्ग से लेकर नर्क तक, हर किसी के मन में दया पैदा हो गई। इंद्र ने वर्षा को पृथ्वी पर भेज दिया और महान नेक मछली तथा उसके साथी बच गए।

गधा और गाड़ी वाला:Hindi Short Story with Moral

एक गाड़ी वाला अपने गधे को गाड़ी में जोते जा रहा था। अचानक गधा रस्सी तोड़कर गाड़ी से भाग निकला। वह अंधाधुंध भागता गया और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर निकल गया। वह बिना सोचे-समझे भागे जा रहा था। भागते-भागते वह एक ऊँचे टीले पर पहुँच गया, जहाँ से वह आगे कदम बढ़ाने ही वाला था कि उसके मालिक ने उसकी पूँछ पकड़ ली और उसे पीछे खींच लिया।

गधे ने छुड़ाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन मालिक भी पूरी ताकत से उसे पीछे खींच रहा था। मालिक गधे को गिरने से बचाना चाहता था लेकिन गधे को यह बात समझ में नहीं आ रही थी। आखिरकार, मालिक ने उसे छोड़ दिया। “ले, अगर तू जाना ही चाहता है, तो फिर तेरी इच्छा। हठ करने वाले को बाध्य नहीं करना चाहिए।” मालिक से छूटते ही गधा आगे बढ़ा और टीले से नीचे गिरकर मर गया।

बच्चों को कहानी सुनना कैसा लगता है ?

क्या आपको पता है बच्चों को कहानी सुनना क्यों इतना ज्यादा पसंद है इसकी वजह है कि उनको तरह तरह के करैक्टर देखने को मिलते है और तरह तरह की आवाजें भी सुनने को मिलती है जिस वजह से उनको कहानी में बहुग मज़ा आता है ।

  • लेकिन अगर वही कहानी बिना कैरेक्टर और एक ही आवाज में सुनाई जाए तो वह बोर हो जाएंगे। इसलिए आपको अपने बच्चों को कहानियां सुनाने के लिए खुद को क्रेटिविटी में ढालना होगा। जैसे कि आपको तरह तरह के साउंड जो एनिमल के होते है या फिर उनके सामने चित्र रखने होंगे।
  • एक बार जब आप बच्चों को कहानी सुना देते हो तो अंत मे उनसे कुछ सवाल भी करे उनसे पूछिए की कहानी से क्या सीखा ,उन्हें कहानी में छुपी शिक्षा और सीख के बारे में भी बतईए।
  • कभी कभी कुछ कहानियां हमारे जीवन से मेल खाती है जिनसे हम बजी कुछ सीख सकते है।
  • जब एक बार आप कहानी सुनाते है तो दुबारा बच्चों को खुद पढ़ने की आदत भी डालते रहे।जिससे उसका इंटरेस्ट बड़े।

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  • admin
  • November 24, 2022
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