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100+ Motivational Thoughts in Hindi

1. मनुष्य का सपना ही उसकी सोच पर निर्भर करता है.

2. सफलता पाने के लिए किसी की प्रतीक्षा ना करें.

3. सफलता पाने के लिए आपको अपनी सोच को समय के हिसाब से चलाना होगा.

4. जिस काम को आज करना है वह आज ही करें टालमटोल ना करें.

5.सही सोचा आप को सफल बनाती है और नार आत्मक सोच आपको असफल.

6. अगर आपके सामने कुछ रुकावट आती है तो अपना रास्ता ना बदलें वह मुश्किल समय के हिसाब से हट जाएगी. आप अपने रास्ते पर चलते रहें.

7. अगर आपको सफलता पानी है तो आपको अपना आलस्य छोड़ना होगा क्योंकि यह दोनों एक दूसरे के दुश्मन हैं.

8. अच्छा विचार ही आप को सफल बना सकता है.

9. सफलता को पाने के लिए आपको अपनी सोच को बदलना पड़ेगा इसलिए परिवर्तन से कभी भी डरिए मत।

10.अच्छे विचार ही आपको दूसरों से अलग बना सकते हैं।

11. बहुत ज्यादा विचारों को ना सोचे.

12. जैसे ही आप सोचेंगे वैसे ही आप बन जाएंगे.

13. जैसे पानी को कभी ठहरने नहीं देना चाहिए वैसे ही अपनी सोच को कभी ही रुकना नहीं चाहिए.

14.दूसरों की सुविचार को पढ़कर खुश ना हो क्योंकि वह तो अपने आप को बेहतर बनाने के लिए लगा हुआ है आप ही मेहनत करें

15.आप क्या भाग्य कोई भी नहीं बदलेगा आपको खुद मेहनत कर कर भाग्य बनाना होगा.

16.हर रोज अपने आप को बेहतर बनाने के लिए सोचें हर रोज सोने से पहले अपने काल के बारे में जरूर सोचे.

17.जब आप सोचेंगे नहीं तब आप अपना विकास रोक देंगे.

18.सोच के कारण आपका एक दोस्त आगे बढ़ जाता है और आप पीछे रहते हैं.

19.ऐसा मानते हैं कि सुबह उठने के बाद अगर अच्छा सोचेंगे तो आपका दिन अच्छा जाएगा अगर आप बुरा सोचेंगे तो आपका दिन बुरा जाएगा.

20.जैसा आपने सोचा अगर आप ऐसा नहीं करते तो कोई और वैसा कर जाता है और सफल बन जाता है.

21.इस बात की चिंता मत करें कि आप पर कोई विश्वास नहीं करता सिर्फ आपको खुद पर विश्वास होना चाहिए.

22.यह जरूरी नहीं है कि आप अच्छा विचार सोच ले जब तक आप विचार के लिए काम नहीं करेंगे तब तक आप असफल रहेंगे.

23. जिस चीज को आप को पाना है तो हमें अपने विचारों को भी लक्ष्य के प्रति अनुकूल बनाना चाहिए.

24.अगर आप सफल होना चाहते हैं तो पहले बुरा सोचना बंद करें.

25.जरूरी यह नहीं कि आपने आज कितना उच्च विचार पर काम किया जरूरी है कि आप और कितना काम कर सकते हैं.

26.अगर आप अतिथियों को बदलते रहेंगे तो आप सफल नहीं हो पाएंगे.

27.सबसे पहले अगर आप समस्या को समस्या समझते हैं तो उसे सोचना बंद करें.

28.आपने देखा होगा जिस काम को लोग पहले करते हैं वह बुद्धिमान होते हैं और जो काम बाद में करते हैं वह मूर्ख.

29. जो कुछ अपने भविष्य में करना है उस को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में काम करें.

30. प्रेरित होने के लिए कभी-कभी आपको बुरे समय का सामना भी करना पड़ सकता है.

31. छोटी छोटी चीजों को कर कर खुश ना हो बड़की सफलता के लिए कुछ पढ़ा करें.

32. आप जिस चीज पर पूरा ध्यान लगाएंगे वह चीज आपको मिलती है इसलिए जिस लक्ष्य को आपको पहना है आप उस पर अच्छे से ध्यान देकर मेहनत कीजिए.

34. जिस समय हम पर कठिन समय आता है वह हमें कुछ अच्छा सिखाता है.

35. कभी कुछ ना होने की शिकायत ना करें बल्कि उस चीज को अपने पास लाएं.

36. आपका पुराना अतीत मायने नहीं रखता कि आपका भविष्य कैसा होगा भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अपने वर्तमान में मेहनत करें.

37.सबसे पहले अगर आप सफल होना चाहती हैं तो अपनी कंफर्ट जोन से बाहर निकलिए.

38.जो समय आपको आज मिला है उसे बर्बाद मत करें.

39.आपको बताऊं की शुरुआत में सब कुछ मुश्किल लगता है.

40. तुमसे हो पाएगा ऐसे कुछ ही लोग होंगे जो कहेंगे.

41. बुरी परिस्थितियों आप को मजबूत बनाती है आप को कमजोर नहीं बनाती.

42.आपके मस्तिष्क में जो आएगा वही कारण है कि आप जानवर से इंसान जल्दी बन सकते हैं.

43. खूब मेहनत करो कि सफलता भी आपको कहे कि अब रुक जाओ.

44.दूसरे लोगों को कभी भी अपने सपने और लक्ष्य मत बताओ क्योंकि वह आप का मजाक बनाते हैं.

45.सही व्यक्ति वह है जो दूसरों को सफल होने में मदद करें.

46. जहां चाह वहां राह.

47. निंदा से घबराएं नहीं क्योंकि हो सकता है कि यह निंदा आपको मोटिवेट कर दे और आप सफल हो पाए.

48.अगर आप अपने सपने पूरे करने जा रही है और आपको कोई रोकता नहीं तो समझ लेना कि आप गलत रास्ते पर हो.

49. जब आप सफल हो जाते हो तो लोगों की राज आपके बारे में बदल जाती है इसलिए किसी भी व्यक्ति की किसी की बात का बुरा मत माने.

50.आपके पास थोड़ा सा है इसलिए आप चिंता मत करें क्योंकि यह सोचें कि आपके पास क्या क्या कुछ है.

51. लोगों को जो पसंद है वैसे ना जी अगर जीना है तो ऐसे जियो जो आपको पसंद है.

52. जो भी अच्छा विचार आपके मन में आए उससे जल्दी से अपना लें क्योंकि जय तरक्की का रास्ता है.

53. जब आप दिमाग से ना सोच पाए तो हमेशा अपने दिल की सुनो क्योंकि जो आपको सही मार्ग दिखाएगा.

54. अपनों के साथ कैसा व्यवहार करें और दुश्मनों के साथ कैसा व्यवहार करें इसे सीखने के लिए आप श्री कृष्ण जी के गुणों को अपनाएं.

55.जीतना और हार ना तो तय है अगर आप जीत के बारे में ही सोचेंगे तो आप जीत जाएंगे अगर आप सोचेंगे कि मैं तो हार जाऊंगा तो आप जरूर आ रही है.

56. आपके पास है वह चीज जो दुनिया के हर प्रसिद्ध व्यक्ति के पास होती है इसलिए घबराएं नहीं.

57. इस जीवन में आपको हर कोई आपकी तरह जैसे नहीं समझ पाएगा.

58. जिस दिन आपने यह सोच लिया कि आपका लक्ष्य क्या है यह मान लो कि उस दिन सफल होने के लिए आपने पहला कदम उठा लिया.

59.अपने मन को पक्का करें क्योंकि यही कारण है आपके सफल होने का.

60. मन के साथ-साथ अपने दिल को इतना मजबूत बनाए कि वह छोटी-छोटी बात पर टूट ना जाए.

61. यह पता नहीं कि जो आज आपके साथ अबे कल हो ना हो और जो कल आपके साथ होगा वह आकर भी आपके साथ चले इसलिए हमेशा खुद पर ही विश्वास रखें.

62.आपने यह तो सुना होगा कि सफल व्यक्ति हमेशा सफल व्यक्तियों के साथ ही रहते हैं और उनके जैसा ही काम करते हैं लेकिन मैं आपको बता दूं की सफल व्यक्ति असफल व्यक्तियों की गलतियों से भी सीखते हैं.

63. यदि आपके पास सब कुछ है तो वह आपके जीवन जीने का अर्थी का है इसलिए आपके पास कितनी चीजों की कमी जरूर होनी चाहिए.

64. हर दिन ऐसे जियो कि कुछ नया हो.

65. आप जो कार्य आज कर रहे हैं उसको शत-प्रतिशत पूरा करें क्योंकि कल पता हो या ना हो.

66. समझ ले कोई भी बात तो खुशी की जान दुखी कि वह ज्यादा दिन तक छुपी नहीं रहती.

67. इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके जीवन में जो कुछ घटित होगा सुख या दुख उसका कारण सिर्फ खुद आप है.

68. जरूर ध्यान दें कि आप अगर आज किसी के साथ बुरा करते हैं तो आगे चलकर भविष्य में आप के साथ भी जरूर बुरा होगा.

69. आपको दूसरों के हिसाब से अपना जीवन नहीं देना चाहिए क्योंकि अब हर किसी को खुश नहीं कर सकते इसलिए आपको अपने जीवन का नियम खुद बनाना चाहिए.

70. जान लीजिए कि आपकी पसीनो की बूंदों से ही आपका भाग्य लिखा जाता है इसलिए खूब मेहनत करके को पसीना लाओ.

71.समय बदलने के बाद यह कहां रहता है और समय का पहिया कभी भी रुकता नहीं.

72. गीता में श्रीकृष्ण ने यह बात अपने मुख्य से कही है कि मनुष्य को कार्य करते रहना चाहिए फिर चाहे परिस्थितियां उसके अनुकूल हो जाना हो.

73. सकारात्मक विचार वाला व्यक्ति दूसरों का ही अच्छा सोचता है.

74. ईर्ष्या की भावना के साथ प्रेम नहीं होता.

75. दोस्त हमेशा वह बनाएं कि अगर आप बरसो बाद भी उसे मिले तो बहन जोश और जुनून के साथ मिले.

76. जरूर जान लें कि सच्चा मित्र वही है जो आपका साथ आपकी बुराई में ना दे लेकिन आपको समझाए कि यह बुरा है.

77. एक सच्चा दोस्त आपको गलत राय का भी नहीं देता है फिर चाहे वह आपको अच्छा लगेगा ना.

78. अपना लक्ष्य और सपना पूरा करने के लिए आपको अपने आप को दृढ़ बनाना चाहिए.

79. जो कोई भी आपको सच्चा प्यार करेगा वह कभी भी आपको छोड़कर नहीं जाएगा.

80. कहते हैं रात चाहे जितनी भी काली हो उसके बाद सवेरा जरुर आता है ऐसे ही आपका जीवन चाहे कितनी भी दुखों से भरा हो लेकिन उसके बाद सुख जरूर आता है.

81. जब आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे तो उसका भी आपके भाग्य दार बनेंगे लेकिन जो आपके दुख में भी आपका साथ दे दे रहे हैं वही आपका सच्चा दोस्त है.

82. जो आपके जीवन को सही दिशा दे वही ही आपका सच्चा गुरु है.

83. सपने देखने भी जरूरी हैं क्योंकि सपने देखने से ही व्यक्ति को उन सपनों को पूरा करने का साहस मिलता है.

84. बहुत सारे रास्ते पर चलने से अच्छा है एक ही रास्ते पर चलें उसके कारण या तो आपको कुछ अच्छा पा लेंगे जाकर कुछ अच्छा सीख लेंगे.

85. अगर आप आते हैं तो उससे कुछ सीखे कि हम क्यों हारे हैं यह नहीं कि हम निराश होकर बैठ जाएं.

86. केवल और केवल आपके माता-पिता आपका भला ही चाहेंगे क्योंकि आपकी हार उनकी हार है और आपकी जीत उनकी जीत.

87. यह जरूर ध्यान रखें कि आप जैसे आज अपने माता-पिता का ध्यान रखते हैं वैसे ही विषय में आपकी संतान भी आपका वैसा ही ध्यान रखेगी.

88. आपको लगता होगा कि पिता हमेशा कठोर होता है लेकिन यह बात आपको तब समझ आएगी जब आप खुद एक पिता बनेंगे.

89. मां का प्रेम तो सभी को दिख जाता है लेकिन जो अपने पिता के प्रेम को देख लेता है उसका जीवन सरल हो जाता है.

90. अगर आप हार गए हैं तो मेरा आज ना हो निराश तो वह होते हैं जिन्होंने कुछ किया ही नहीं.

91. जितना ही आप आगे बढ़ते जाएंगे उतना ही आपको आलोचनाएं का सामना करना पड़ेगा.

92. जो व्यक्ति कमजोर होता है वह थकने के बाद रुक जाता है लेकिन जो व्यक्ति मजबूत है वह सफल होने के बाद भी नहीं रुकता.

93. यदि आपने सुना है पर विजय प्राप्त कर ली तो आप किसी भी चीज पर विजय प्राप्त कर लेंगे.

94. कहते हैं मनुष्य है तो उसे गलतियां भी होगी यदि वह गलतियां ना करेगा तो वह ईश्वर बन जाएगा.

95. अगर आपको किसी चीज को पाना है तो उस चीज को पाने के लिए आप पूरे जुनून से काम करें.

96. अपनी बातों का जरूर दूसरों के सामने रखना लेकिन दूसरों को अनसुना भी ना करें क्या पता वह बात आपके लिए सही है.

97. सफल व्यक्ति बोलते कम है और सुनते ज्यादा.

98. आप आज जिस चीज के पीछे भागते आने वाले कुछ वर्षों में वह चीज आपके लिए मायने नहीं रखती है.

99. आप कितना भी सफल होकर आगे बढ़ जाए लेकिन कोई ना कोई आपसे आगे ही रहेगा इसलिए अपने आप को हमेशा उससे बेहतर बनाएं.

100. जिस तरह भीड़ चलती है उस तरफ जाना कभी कबार सही नहीं होता क्योंकि कई बार आपको अपनी मंजिल खुद पार करनी होती है.

101. किसी को कहीं कुछ गलत वचन आपका रिश्ता तोड़ सकते हैं.

102. बुराई की अच्छाई के रास्ते पर चलना उतना ही कठिन होता है जितना अच्छाई से बुराई के रास्ते पर चलना आसान.

103. मानते हैं कि गलती हर किसी से होती है लेकिन जो इनको अपना दल बड़ा रख कर माफ कर देता है वह ही बड़ा माना जाता है.

104. सामने वाला व्यक्ति आपसे सहायता की अपेक्षा रखता है तो उस समय आप उसकी सहायता करते हैं या नहीं यह बहुत जरूरी है.

Best Motivational Thought in hindi

Gallbladder In Hindi | पित्ताशय की पथरी के कारण,लक्षण,उपचार

Gallbladder in hindi (पित्ताशय) यह रोग का नाम होता है | जैसे शरीर में बाकी सब रोग होते हैं यह भी शरीर के अंदर एक रोग होता है जिसे  पित्ताशय कहते हैं| आपने कई बार सुना होगा Gallbladder Stone के बारे में| Gallbladder एक ऑर्गेनिक स्ट्रक्चर होता है | जो Attach होता है हमारे Liver से यह हमारे Liver के पीछे होता है|

 Liver  के जो Sells होते हैं वह Angyms Prepare करते  हैं| Angyms जो होते हैं वह  हमारे Digesions और बहुत सारे काम में Help करते है| ऐसा ही कुछ मटेरियल  है जो  हमें Fat Digisions में मदद करता है Fat मतलब Oily Food जो हम खाते हैं

 उसको Digest  करने में Help करता है  ऐसा कुछ Component (Fat) वह Component Release होता है Liver से मगर वह Store होता है Liver के पीछे Gallbladder में | Gallbladder एक Storage जगह है | जब हम कोई Oily चीज खाते हैं तो हो Component  धीरे-धीरे  निकलकर Stomach  के अंदर Release होता है | 

Gallbladder जब Function  करना बंद कर  देता है तो उसके अंदर Folds  होने लगते हैं| जिसको हम  कहते हैं Cailculy इसका मतलब  इसके अंदर थोड़ा-थोड़ा करके  वह जो Sols है वह Deposit होने लगता है | तो वह Stone बन जाता है| जिसे हम कहते हैं Gallblader Stone यह तब बनता है जब Gallblader काम करना बंद कर दे तब  यह जा कर Stone  बनता है|

Gallbladder क्या है: Gallbladder In hindi

लीवर से पित निकल कर जहां जमा होता है उसे Gallbladder कहते हैं| Gallbladder से पित जो निकलता है वह हमारे भोजन को पाचन में मदद करता है | कभी-कभी किन्ही कारणों से पित्त ठीक से नहीं निकलता उसका कार्य धीमा पड़ जाता है|

  जिस कारण से उसी पित में से छोटे-छोटे कण के रूप में जो Colgostol होता है Bile पिगमेंट होता है और जो कैल्शियम सोल्ट होते है वह छोटे-छोटे पाथरो के रूप में पित के अंदर जमा हो जाते हैं कभी-कभी यह Gallbladder के अंदर छोटे छोटे पत्थर के रूप में काफी सारे जमा हो जाते हैं कभी-कभी एक बहुत बड़ी  पथरी जैसा रूप ले लेती है| और कभी कभी 1 चूरे के जैसे पित्त की थैली के अंदर इकट्ठा हो जाता है | 

ऐसे तो जब पित्ताशय में पथरी बन जाती है तो प्रकृति उसे बाहर निकालने की पूरी कोशिश करती है और कई बार उसे बाहर निकाल भी देती है और हमें पता भी नहीं चलता | और कई बर जब उसे बाहर निकालती है तो हमे थोड़ी दिक्कत महसूस होती है और कहीं बार हमें खुद प्रयास करने पड़ते हैं और उसे बाहर निकालना पड़ता है | 

Gallbladder में पथरी बनने के कारण क्या है ?

Gallbladder में पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण है Constipation जो लोग ज्यादा भोजन करते हैं या ज्यादा मिर्ची मसाले वाला अगरइष्ट भोजन करते हैं| पानी कम पीते हैं|  परीक्षम कम करते हैं जिनका वजन ज्यादा होता है और जिनका पेट खराब रहता है|

 अधिकतर यह रोग उन्हें ही होता है वैसे यह रोग 1 दिन का काम नहीं है जब हमारा शरीर विकारों से लद जाता  है तब हमें Gallbladder में  पथरी होती है या शरीर में और भी कोई रोग जब ही आता है जब हमारा शरीर Tocsin से भर जाता है |

Banyan Tree In Hindi | बरगद के पेड़ के फायदे और नुकसान

Gallbladder में पथरी के लक्षण क्या है ?

जब Gallbladder से पथरी अपने आप बाहर निकल आती है तो कभी-कभी लीवर के पास दर्द महसूस होता है|  अगर पथरी बड़ी होती है  और अपनी जगह से हिल जाती है तो भी Gallbladder मैं बहुत ज्यादा  दर्द महसूस होता है | 

और कभी-कभी वह दर्द इतना असहनीय होता है कि उसके कारण बुखार भी आ जाता है | जी मिचलाता है उल्टी आती है और व्यक्ति दर्द के कारण पसीने पसीने हो जाता है| ठंडे पसीने आने लग जाते हैं और व्यक्ति बहुत ही थकान और कमजोरी महसूस करता है | 

पथरी  चाहे पित्ताशय में हो, या किडनी में हो या मूत्राशय में हो कहीं पर भी हो पथरी कोई रोग नहीं है पथरी आने का मुख्य कारण  हमारे शरीर के अंदर Tocsins  का  बहुतायत में जमा होना होता है जब शरीर के अंदर बहुत ज्यादा विश पैदा हो जाते है  तो वह पथरी का रूप ले लेते हैं| इसलिए पथरी का ऑपरेशन कराने के बाद भी पथरी बनना बंद नहीं होता पथरी तब होती है जब हम अपने पुरे शरीर को Detox करते है| 

  • पेट के दाएं तरफ दर्द उठकर कमर तक या दाएं कंधे की तरफ जाता है|
  • पित्त की थैली की वजह से पीलिया हो जाता है|
  • तेजाब का ज्यादा बनना एसिडिटी  हो जाना  कभी-कभी पित्त की थैली की वजह से हो जाता है|
  • पित्त की थैली में मवाद बनना जिसे तेज बुखार ठंड लग सकती है|

पथरी के घरेलू नुक्से

मुनक्का 

इसके लिए रात को 10  मुनक्का भिगो दें  और सुबह इसके बीज निकालकर खाली पेट चबा चबाकर खाएं  और जब मुनक्का खाए तो मुनक्का के साथ में 300 ग्राम सेब भी  खाने जरूरी है|  इसी तरह जब शाम को मुनक्का खाना है

 तो सुबह मुनक्का भिगो दें  तो शाम को फुल  कर तैयार हो जाएंगे  और शाम को 4 बजे  या 5 बजे  के आसपास मुनक्का के बीज निकालकर  वह 10 मुनक्का खा ले और साथ में 300 ग्राम  नाशपाती या  बब्बूगोसा  आपको जरूर आना है | जिन व्यक्तियों को डायबिटीज है मुनक्का की जगह अंजीर खा सकते हैं |

 3 अंजीर सुबह खाए  भिगोकर के और 3 अंजीर शाम को  खाए भिगोकर के सुबह आपको अंजीर के साथ सेब  खाना है और  ऐसे ही शाम के समय अंजीर  के साथ नाशपाती या बब्बुगोसा खाना है |

 अंजीर डायबिटीज को कंट्रोल करती है| मुनक्का के जो बीज निकलते हैं उनको आपको फैकना नहीं है| उन बीजों को आप धूप में सुखा ले  और उसका पाउडर बनाकर रख ले | रात को सोने से पहले 1 ग्राम का चौथाई हिस्सा  आपको लेना है  और उसके ऊपर हल्का गर्म दूध घुट घुट करके पीना है  यह काम आपको रोजाना करने हैं| यह आपको नाश्ते में लेना है| 

 और जब आप सुबह उठते है तो  एक गिलास गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़ कर घूट घूट करके पिए और उसके 1 घंटे बाद  सफेद पेठे का जूस निकाल कर के  200 ग्राम जूस आपको निकालना है  और फिर उसे  घुट घुट कर के पीना है|  और फिर उसके घंटे बाद ही आपको नाश्ता करना है मुनक्का वाला|

पेठे में पोटेशियम, आयरन और विटामिन ए बी सी भरपूर मात्रा में होते हैं|  पेठे का सेवन करने से यूरिन बिल्कुल खुलकर के पास होता है | शरीर से टॉक्सिन बाहर जाते हैं|  और बिना ऑपरेशन के पतरी धीरे-धीरे निकल जाती है| लिवर की गर्मी को बाहर निकालता है और बॉडी को डिटॉक्स करता है|

12 Jyotirling Ke Naam – बारह ज्योतिर्लिंग के नाम और स्थान

पथरी की प्राकृतिक चिकित्सा

यह जो चिकित्सा है पथरी निकालने में इसका अहम  रोल है|  हमें अपने  पित्ताशय के ऊपर गरम ठंडी  सिकाई करनी है|  क्योंकि पित्ताशय लिवर के नीचे होता है|  और हमें उसी जगह की सिकाई करनी है|  गर्म पानी की बोतल को उसी जगह रखना है  उसके  बाद 3 मिनट गर्म करना है और 1 मिनट ठंडा | इसी तरह हमें 3 मिनट गरम सिकाई करनी है|  और 1 मिनट  उस पर ठंडा  तोलिया रखना है|  इस  तरह से हमे  4  राउंड करने हैं |  इस चिकित्सा को करने के लिए  एक Hot Water Bag चाहिए |जिसके अंदर गर्म पानी भरना है| गर्म पानी इतना तेज़ भरना है|  के आराम से सिकाई हो सके| 

 जब आप Bag मैं गर्म पानी भरते हैं तो उसका ऊपर से मुंह खोल कर हवा निकाल दे|  ऐसा करने से इसकी हवा निकल जाती है सीधा हो जाता है| उसके बाद बोटल को पेट के ऊपर रखना है | और 3 मिनट बाद  बोतल को हटा देना है | फिर ठंडे पानी में तोलिया  डूबा कर उसे 1 मिनट के लिए पेट के ऊपर रखना है|

 इसी तरह से 4 बार ऐसा करना है| जब सिकाई करें पेट भरा हुआ नहीं होना चाहिए पेट बिल्कुल होना चाहिए|  गरम ठंडी सिकाई कर लो हमारी पित नली Relax हो जाती है  उसमें से पथरी निकलने में  आसानी होती है |गरम ठंडी सिकाई करने से और ताज़ा पानी का एनिमा लेने से जो पित्ताशय में पित का स्त्राव है|

 उसकी वृद्धि आसानी से करती है जो उसका कार्य धीमा पड़ गया था  वह कार्य क्षमता उसकी बढ़ जाती है|  और  पथरी सत्त्राव के साथ बाहर निकल जाती है| छोटी छोटी पथरी पित के साथ बाहर निकल आते हैं|  लेकिन जो बड़ी पथरी होती है | जब हम अपनी डाइट में चेंज कर लेते हैं Alcline Food खाने लग जाते है तो वह बड़ी पथरी धीरे धीरे टूटकर छोटे टुकडो में बदल जाती है |या घुल घुल के खत्म हो जाती है |

इसलिए डाइट में चेंज करना बहुत ज्यादा जरूरी है| जैसे दिन की शुरुआत हम नींबू पानी से करते हैं इसी तरह जब भी हम दिन  में पानी पिए  हल्का गुनगुना होना चाहिए और उसमें हर बार आधा नींबू निचोड़ करके क्योंकि निंबू पथरी को काटता है| 

 इसके अलावा  मौसम के फल , ड्राई फ्रूट , हरी सब्जियां, सलाद , अंकुरित रोजाना खाना चाहिए|  और  अगर गाजर का मौसम हो तो  गाजर और चुकंदर का जूस  पीना चाहिए|  क्योंकि Tocsions  को बाहर निकालता है| जब शरीर में प्रॉब्लम है| या बॉडी को डिटॉक्स करना हो  तो रोजाना 80% Alkaline और 20% Acidic डाइट लेनी चाहिए | सदा भोजन करना चाहिए |

पित्ताशय का क्या काम होता है?

पित्ताशय का काम होता है लीवर द्वारा बनाए गए बाइल जूस से इकट्ठा करना| खाना खाने के बाद बाइल जूस निकलता है और यह खाना हजम करने में मदद करता है|

बाइल जूस क्या काम होता है?

  • हरे रंग का जूस होता है गाड़ी पानी जैसा
  • हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है|
  • हमारे शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान पाचक अग्नि जैसी चीजे नियंत्रित करना|

पित्त में पथरी के कारण

  • अधिक वजन या मोटापा होना|
  • ज्यादा तेल , घी वाला खाना खाना|
  • ऐसा खाना ना खाना जिसमें रेशा (फाइबर) हो|
  • कम समय में तेजी से वजन कम होना|
  • पित्त पथरी का पारिवारिक इतिहास हो ना|
  • महिलाओं में अधिक पाया जाता है|

पित्त में पथरी के 7 लक्षण

  1.  जी मिचलाना
  2.  उल्टी
  3.  खट्टी डकार
  4.  गहरा पेशाब
  5.  मिट्टी के रंग का मल 
  6.  पेट दर्द
  7.  दस्त

पित्त में पथरी की जांच

  • Ultrasound (Abdomen)
  • LFT Test (Bilirubin)
  • Urine Examination (R/M)
  • CT Scan 
  • Gall Bladder Biopsy 

पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए?

फल 

  • खट्टे फल: नींबू ,संतरा, स्ट्रॉबेरी
  • केला
  • नाशपाती
  • अनार
  • नारियल
  • अमरूद

Fiber Foods (रेशेदार खाद्य पदार्थ)

  • मसूर दाल
  • राजमा
  • हरी मटर, सफेद मटर
  • काला चना, सफेद चना
  • लोबिया
  • सोयाबीन
  • जौ 

सब्जियां

  • गहरे हरे रंग का पत्तेदार साग 
  • चुकंदर
  • शलगम
  • अदरक

पित्त की पथरी में क्या खाना नहीं चाहिए?

  • मक्खन, पनीर,घी ,
  • लाल मास
  • चटपटा खाना
  • केक
  • मीठा

Fatty Food ( वसायुक्त खाना)

  • पेस्ट्री
  • आइसक्रीम
  • पूरण वसा वाला दूध,दही 
  • कोल्ड ड्रिंक
  • चाय और कोफ़ी |

 पित्त की पथरी का इलाज

Surgery एक बेस्ट ऑप्शन है पथरी के इलाज के लिए इससे बार-बार पथरी नहीं होगी|  यदि आप अच्छे से हॉस्पिटल से ऑपरेशन कराएं| पथरी आराम से निकल जाएगी|  यदि आप ऑपरेशन नहीं कराना चाहते  तो आप होम्योपैथी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं इसमें थोड़ा समय अधिक लगता है पर यह भी कार्यकर्ता होता है| 

Mahila Sashaktikaran – महिला सशक्तिकरण से आप क्या समझते है?

पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए

फल 

खट्टे फल: नींबू ,संतरा, स्ट्रॉबेरी,केला,नाशपाती,अनार,नारियल,अमरूद |

Fiber Foods (रेशेदार खाद्य पदार्थ)

मसूर दाल,राजमा,हरी मटर, सफेद मटर,काला चना, सफेद चना,लोबिया,सोयाबीन,जौ |

सब्जियां

        गहरे हरे रंग का पत्तेदार साग ,चुकंदर,शलगम,अदरक |

पित्त की पथरी में क्या खाना नहीं चाहिए

मक्खन, पनीर,घी ,लाल मास,चटपटा खाना,केक,मीठा|

Fatty Food ( वसायुक्त खाना)

पेस्ट्री,आइसक्रीम,पूरण वसा वाला दूध,दही,कोल्ड ड्रिंक,चाय और कोफ़ी |

FAQ-

गॉलब्लेडर में स्टोन होने से क्या होता है?

पित्ताशय में पथरी होने से कमर में दर्द, कंधों में दर्द जैसी कई परेशानियां होते हैं| 

गॉल ब्लैडर को हिंदी में क्या कहते हैं?

गॉल ब्लैडर को हिंदी में पित्त की थैली कहते हैं|

गाल ब्लैडर में पथरी होने के क्या लक्षण है?

 जी मिचलाना,
उल्टी,
खट्टी डकार,
गहरा पेशाब,
मिट्टी के रंग का मल, 
पेट दर्द,
दस्त|

गाल ब्लैडर में स्टोन कैसे बनता है?

Gallbladder मैं पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण है Constipation जो लोग ज्यादा भोजन करते हैं या ज्यादा मिर्ची मसाले वाला अगरइष्ट भोजन करते हैं| पानी कम पीते हैं|  परीक्षम करते हैं जिनका वजन ज्यादा होता है और जिनका पेट खराब रहता है अधिकतर यह रोग उन्हें ही को होता है वैसे यह रोग 1 दिन का काम नहीं है जब हमारा शरीर विकारों से लद जाता है तब हमें Gallbladder में  पथरी होती है | या शरीर में और भी कोई रोग जब ही आता है जब हमारा शरीर Tocsin से भर जाता है |

Banyan Tree In Hindi | बरगद के पेड़ के फायदे और नुकसान

banyan tree in hindi: किसी घने पेड़ की छांव तले बैठना इंसान भी इंसान  को सबसे ज्यादा पसंद होता है | वही अगर हमे  किसी बड़े जंगल में कैम्पियन करने का मौका मिल जाए  तो उसका मजा ही कुछ अलग होता है|  आप सब ने जंगलों में बहुत सारे पेड़ तो जरूर देखे होंगे| लेकिन अगर हम आपको इसलिए के माध्यम से बताएं कि भारत में एक ऐसा पेड़ भी है जो खुद में ही बहुत बड़ा जंगल है तो शायद आपको यकीन नहीं होगा| आप सब ने जंगलों में बहुत  बड़े-बड़े पेड़ तो जरूर देखे होंगे लेकिन क्या आपने ऐसा पेड़ भी देखा है जो अपने आप में पूरा जंगल समेटे हो|

पहली नजर में देखने पर विशाल जंगल जैसा दिखाई देने वाला बरगद का पेड़ है|  इस पेड़ की खास बात यह है कि इस  पेड़ का नाम विश्व के सबसे  चौड़े पेड़ के रूप में World Gnice Book Of Records मैं भी दर्ज हो चुका है| 

14400 वर्ग मीटर में फैला हुआ यह बरगद का पेड़  चौड़ाई के साथ अपनी उम्र के लिए भी जाना जाता है बरगद के पेड़ की उम्र 250 साल से भी ज्यादा है इतना फैल चुका है कि यहां घूमने वाले आने वाले आती है वो पता ही नहीं चलता कि वह एक पेड़ के आसपास ही घूम रहे हैं |

 अब आप सोच रहे होंगे कि इतना बड़ा पेड़ जंगल कैसे बना सकता है| तो आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि कोलकाता के किस पेड़ की 3000 से ज्यादा जटाय  है जो जमीन के अंदर फेल कर जड़ों का आकार ले चुकी है| यह एक पेड़ की जड़े ही है जो  जो इतनी बड़ी जमीन पर बहुत सारे पेड़ों का चाल बनाकर एक बड़े जंगल जैसी दिखाई देने लगी है|  जिसकी वजह से इस पेड़ को द ग्रेट बनयान ट्री के नाम से पहचाना जाता है |

Banyan Tree क्या है: Banyan Tree In Hindi

बरगद बहू वर्षीय विशाल वृक्ष है| यह एक स्थलीय दिबिजप्ती एवं स्पुश्पक वृक्ष है इसका तना सीधा एवं कठोर होता है| इसकी शाखाओं से जुड़े निकलकर हवा में लटकते हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाते हैं स्तंभ जाती है| इन जड़ों को बरोह या प्राप जड़ कहते हैं| इसका फल छोटा गोलाकार एक लाल रंग का होता है| इसके अंदर बीज पाया जाता है इसका बीज बहुत छोटा होता है| किंतु उसका पेड़ बहुत विशाल होता है इसकी पत्ती चौड़ी एवं लगभग अंडाकार होती है| इसकी पत्ती शाखाओं और कलिकाओ को तोड़ने से दूध जैसा रस निकलता है जिसे लेटेक्स  कहा जाता है| 

इस पेड़ को बनयान ट्री क्यों कहा जाता है: Banyan Tree Called In Hindi

बनयान जमीन से निकलने  वाली शाखाएं होती हैं  जिसके कारण इसका नाम बनयान के रखा गया है दुनिया का सबसे पुराना बरगद का पेड़ आज तक ना जाने कितने आंधी और तूफान ओ को देख चुका है लेकिन अपने जोड़ों का यह पक्का पेड़ कभी झुका और गिरा नहीं|  पेड़ों पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक भी हैरान है कि इस पेड़ के साथ उगने वाले बाकी सब पेड़ टूट कर बिखर चुके हैं लेकिन आज भी यह पेड़ टस से मस नहीं हुआ|

पहली बार 1884  और फिर 1886 में   आए एक खौफनाक  तूफान से इस पेड़ की कुछ जटाय थोड़ी कमजोर हो चुकी थी|  जिनको 1925 में  50 फीट तक काटना पड़ा था उसके बाद आज तक इस पेड़ की कोई भी जटा कटा नहीं गया है|

देश और विदेश से कोलकाता घूमने आने वाले टूरिस्ट  इस पेड़ के साथ फोटो जरूर खिंचवाते हैं| इतना ही नहीं इस पेड़ को विदेशी यूनिवर्सिटी रिसर्च करने के लिए इस्तेमाल कर  रही  है| भारत की स्टैंड पर यह पेड़ हमारे देश के लिए किसी तरह से कम नहीं ।

12 Jyotirling Ke Naam – बारह ज्योतिर्लिंग के नाम और स्थान

अलग-अलग भाषाओं में बरगद के पेड़ के नाम: Name of Banyan Tree Different Languages

Banyan Tree  के नाम भाषाएं
बरगद, बट, बट, बरगट  Hindi
Banyan, ईस्ट इंडियन फिग ट्री English
र्री  ( Mari ),वट वृक्ष ( Vati ) Telugu
दरख्तेरेशा ( Darkhteresha ) Persian
वड ( Wad ), वर ( War ) Marathi
बर ( Bar ) Nepali
वड ( Vad ) Konkani
अला ( Ala ),पेरल (Peral ) Malayalam
वड ( Vad ), वडलो (Vadalo ) Gujarati
बर्गोड़ा  (Bargoda) Urdu
सक्न्द्हज ,वटवृक्ष, न्यग्रोध ,ध्रुव , श्रीरी Sanskrit
तईन बन्फिलिस ,Jhatulejaibva Arabic
अला ,अलम  Tamil
बरो  Oriya
बडगाछ  Bengali
मरा ,अल ,अला  Kannada
बरगद ,बर  Punjabi
Banyan Tree In Hindi

 Banyan Tree की विशेषताए: Features Of Banyan Tree

  1. भारत का राष्ट्रीय पेड़ बरगद है|  
  2. इस पेड़ को बहुत ही ज्यादा पवित्र पेड़ भी माना जाता है |  
  3. माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर देवी देवता निवास करते हैं|  
  4. बरगद का पेड़  आकार में बहुत बड़ा विशालकाय होता है|  
  5. इस पेड़ पर पहनने से लटकती हुई लंबी जटाए  इसे बड़ा और आकर्षित बनाते हैं| 
  6. इस पेड़ को बड या वट के नाम से भी जाना जाता है|  
  7. यह बहुत ही घना वृक्ष होता है |  
  8. बरगद के पेड़ के तने भी बहुत ज्यादा मजबूत होते हैं|  
  9. इस पेड़ की पत्तियां अंडाकार होती है|  
  10. पुराने समय में ऋषि मुनि बच्चों को ज्ञान देने के लिए बरगद के पेड़ के निचे बैठा करते थे|
  11. भगवान बुध को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी|
  12.  बरगद का वृक्ष हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है|
  13.  इस वृक्ष की लकड़ी बहुत भी बहुत ज्यादा मजबूत होती है|
  14.  इसकी आयु हजारों वर्ष तक होती है|
  15. बरगद का पेड़ छायादार होने के साथ-साथ अनेक गुणों वाला भी होता है|

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Banyan Tree के फायदे: Benefits of banyan tree in hindi

  • बालो के लिए, 
  • तव्चा के लिए,
  • दांतों और मसूड़ो के लिए,
  • जोड़ों के  दर्द के लिए, 
  • इम्यूनिटी | 

बालो के लिए – बालों का झड़ना एक गंभीर समस्या है| यदि बाल आधिक झड रहे हो तो ऐसे में बरगद का पेड़ बहुत फायदे वाला होता है|  यदि बालों में फंगल आदि की समस्या हो गई हो तो उसमें भी बरगद  का पेड़ फायदे जनक होता है|  सिकरी आदि  के इलाज के लिए भी  इसका प्रयोग किया जाता है|  कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि बरगद का पेड़ बालों के लिए बहुत फायदेमंद है|

त्वचा के लिए –  त्वचा पर कोई भी इन्फेक्शन या फोड़ा फुंसी हो जाने पर इसका प्रयोग किया जाता है| फोड़े फुंसी त्वचा से संबंधित एक विकार है| इस पेड़ में कुछ भी बिना कैसे होते हैं जिनका प्रयोग करके हम त्वचा से संबंधित बीमारी का इलाज कर सकते हैं| यह त्वचा को हर हर रोग से बचाने में मददगार है साबित होता है| 

दांतों और मसूड़ों के लिए –  दांतों में दर्द होने पर इसका प्रयोग किया जाता है|  मसूड़ों का लाल हो जाने या चीन जाने पर भी इसका प्रयोग किया जाता है |  यदि दांतों में कीड़ा आदि लग गया है तो उसको ठीक करने के लिए भी इसका प्रयोग काफी फायदेमंद होता है| इसकी जड़ को  चबाकर  मंजन  की तरह इस्तेमाल किया जाता है | इससे तरह दांतों से संबंधित परेशानियों को दूर किया जाता है | 

जोड़ों के दर्द के लिए – शरीर के जोड़ों में दर्द होने पर इसका प्रयोग किया जाता है|  इसका प्रयोग करके जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है| विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पत्तियों में कुछ खास तत्व होते हैं जैसे हेकसेन ,क्लोरोफॉर्म ,ब्युटेनोल और पानी मौजूद होते हैं जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में साबित हुआ है| इसकी पत्तियों का सेवन करके जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है| 

इम्यूनिटी – यह हमारे इम्यूनिटी सिस्टम को बेहतर बनाता है इसका प्रयोग पाचन क्रिया को सही करने के लिए भी किया जाता है | इसकी पत्तियों में कुछ खास तत्व होते हैं |  जो रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं| इसकी पत्तियों का प्रयोग करके शरीर को प्रतिरोधक बनाया जा सकता है| 

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Banyan Tree का प्रयोग कहां किया जाता है: Where is use Banyan Tree

इसका प्रयोग काफी प्रकार से किया जा सकता है | यह हमारे लिए औषधि का काम भी करते हैं |  जिसे हम अपने लिए जड़ी बूटी के रूप में प्रयोग कर सकते हैं |  इससे हमें ऑक्सीजन मिलते हैं |  इसका प्रयोग हम लकड़ी के रूप में भी कर सकते हैं|  क्योंकि इसकी लकड़ी काफी मजबूत होती है जिससे हम फर्नीचर आदि बना सकते हैं |  लकड़ी के साथ-साथ इसकी पत्तियां अंडाकार होने के कारण काफी फायदेमंद होते हैं |  जिनका प्रयोग हम विभिन्न रूप से कर सकते हैं |  यह  वृक्ष  घना होने के कारण इसकी छाया दूर दूर तक रहती है हमारे लिए काफी फायदेमंद होती है| 

Banyan Tree के नुकसान: Disadvantages of Banyan Tree

वैसे तो आज तक इसमें कोई भी नुकसान सामने नहीं आए हैं |  ना ही इस पेड़ से किसी को कोई नुकसान पहुंचा है | फिर भी आप जब भी इसकी  पत्तियों का प्रयोग अपने औषधि के रूप में करते हैं तो  डॉक्टर से सलाह देने के बाद भी इस उपयोग करें | अगर उसका प्रयोग करके आपको किसी प्रकार की एलर्जी इनफेक्शन होता है तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें | बिना डॉक्टर की सलाह के इसका प्रयोग ना करें |

Banyan Tree को पवित्र क्यों माना जाता है?

वट वृक्ष को पिपल  के समान ही महत्व दिया गया है |पुराणों में उल्लेखित है कि इसमें देवताओं का निवास होता है|  वेदों, पुराणों ,रामचरितमानस, अनेक ग्रंथों में इस वृक्ष की महिमा का गान किया गया है | यह पेड़ त्रिमूर्ति का प्रतीक है इसको देवताओं का वृक्ष अथवा देवेश कहा गया है| इस देश के मूल में ब्रह्माजी अथवा मध्य में जनार्दन विष्णु  तथा अग्रभाग में देवाधिदेव महादेव शिव रहते हैं| देवी सावित्री भी इसी वटवृक्ष में रहते हैं|

इसके दर्शन,स्पर्श तथा सेवा करने से प्राप्त होते हैं| दुख आदि नष्ट होते हैं| ऐसा माना जाता है कि इसकी जड़ में पानी देने से पुणे की प्राप्ति होती है| अग्नि पुराण के अनुसार उत्सर्जन को दर्शाता है | इसलिए संतान के लिए इच्छित  लोग इसकी पूजा करते हैं| इस कारण बरगद के पेड़ को काट नहीं जाता| अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना जाता है | इसलिए इस वृक्ष को अत्त्श वृक्ष भी कहा जाता है | 

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Banyan Tree कर्ज मुक्ति का उपाय: Banyan Tree In Hindi

कर्जा मुक्ति  के लिए सारे वृक्षों में सबसे श्रेष्ठ वट वृक्षों माना गया है|  इसलिए प्रशासनिक कार्य के लिए, मानसिक टेंशन है तो  वटकेश्वर महादेव  का स्मरण किया जाता है| यदि बहुत ज्यादा कर्जा हो गया है तो बड़ के पेड़ के नीचे आप वटकेश्वर महादेव के लिए एक लोटा पानी उसमें थोड़ा सा पिसा हुआ चावल  और उसमें थोड़ी सी हल्दी डाल कर वटकेश्वर महादेव के नाम से अपनी कामना करते जो आप पर कर्जा हुआ है उसका स्मरण करते हुए  छोड़ दीजिए | थोड़े दिन ऐसा करने से आपका  कर्ज मुक्त जाएंगे| 

FAQ

वृक्षों का राजा कौन है?

साल वृक्षों को पेड़ो का राजा जाता है |

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष कौन है?

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष  बरगद है |

बरगद के पेड़ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं

 बरगद कोअंग्रेजी में Banyan, ईस्ट इंडियन फिग ट्री  कहते है |

बरगद के पेड़ से क्या लाभ होता है?

बरगद के पेड़ से बहुत तरह के लोग होते हैं|  इस वृक्ष की जड़,तना,पत्ते,टहनियां,जटाएं सभी अपने आप में एक लाभकारी  सिद्ध हुई हैं|  इसमें मौजूद तत्व हेकसेन ,क्लोरोफॉर्म ,ब्युटेनोल और पानी होते है | जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं|  यह  दांतों की समस्या, त्वचा की समस्या, डिप्रेशन, बालों की समस्या,  इम्यूनिटी सिस्टम आदि सभी  में काफी लाभकारी होता है|

बरगद के पेड़ पर किसका वास होता है?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बरगद के पेड़ पर देवी-देवताओं का निवास होता है| हिंदू धर्म में वटवृक्ष को देव वृक्ष भी माना जाता है इस पर श्री ब्रह्मा विष्णु और शिव जी का निवास होता है|

  • admin
  • November 28, 2022

12 Jyotirling Ke Naam – बारह ज्योतिर्लिंग के नाम और स्थान

12 jyotirling ke naam: भगवान शिव की महानता इतनी है कि दुनिया के हर कोने में भगवान शिव के भक्त  रहते हैं सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा को ज्यादा मान्यता दी जाती है ऐसा माना जाता है कि सावन माह भगवान शिव को  सबसे प्रिय है| जो  भी भगत जन  इस माह में भगवान शिव की पूजा करता है उसे मनचाहा वर मिलता है|

 भगवान शिव के दुनिया के हर कोने में अलग-अलग स्थान  बने हुए हैं|  ऐसा भी माना जाता है कि जो 12 jyotirlinga के दर्शन कर लेता है उसे पुण्य की प्राप्ति होती है| और अपने सारे पापों से मुक्त हो जाता है|  शिवलिंग और ज्योतिर्लिंगों में दोनों में अंतर होता है कुछ लोग दोनों को एक समान समझते हैं तुम तो ऐसा नहीं है शिवलिंग अलग होते हैं और ज्योतिर्लिंग अलग  इस लेख में हम 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में विस्तार से जानेंगे |

क्र. ज्योतिर्लिंग नाम ज्योतिर्लिंग  स्थान
1 सोमनाथ मंदिर ज्तोतिर्लिंग  सोमनाथ, गुजरात
2 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग   श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
3 महाकालेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग   उज्जैन, मध्य प्रदेश
4 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग   मांधाता, मध्य प्रदेश
5 केदारनाथ ज्योतिर्लिंग   केदारनाथ, उत्तराखंड
6 भीमेश्वर ज्योतिर्लिंग   भीमाशंकर, महाराष्ट्र
7 कशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग   वाराणसी, उत्तर प्रदेश
8 त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग   त्रिंबक, महाराष्ट्र
9 बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग  देवघर, झारखण्ड
10 नागेश्वरधाम ज्योतिर्लिंग  दारुकावनम, गुजरात
11 रामेश्वर ज्योतिर्लिंग   रामेश्वरम, तमिल नाडु
12 घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग   एलोरा, महाराष्ट्र

सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग ( Somnath Jyotirlinga)

Somnath Jyotirlinga

नाम – श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – सोमनाथ मंदिर रोड ,वेरावल , गुजरात 

मंदिर खुलने का समय सुबह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक |

आरती का समय – सुबह 7 बजे ,दोपहर 12 बजे ,साय 7 बजे |

ज्योतिर्लिंग में जो नाम सब से पहले सोमनाथ का आता है प्रजापति दक्ष ने अपनी  27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा के साथ किया था चंद्रमा गोस्वामी के रूप में पाकर सभी कन्याएं अपने आप को विशेष आने  लगी तथा चंद्रमा भी उन्हें पत्नी के रूप में पाकर निरंतर सुशोभित होने लगे  | 

सभी उनकी पत्नी थी किन्तु चंद्रमा सबसे अधिक प्रेम रोहणी को करते थे जिससे बाकी पत्नियां दुखी थी |ऐसा देख वह  प्रजापति दक्ष के पास गई और उन्हें सारी बातें बताएं अपनी पुत्रियों की बातें सुनकर प्रजापति दक्ष दुखी हो गए के पास जाकर शांति पूर्वक बोले हे चंदर तुम निर्मल कुल में उत्पन्न हुए हो तुम्हारे आश्रय में रहने वाली चीज सभी तुम्हारी पत्नियाँ  है उन सब के प्रति तुम्हारी मन में भेदभाव क्यों है तुम किसी को अधिक और किसी को कम प्रेम  क्यों करते हो अब तक जो किया सो किया अब आगे फिर कभी ऐसा भेदभाव पूर्ण बर्ताव तुम्हें नहीं करना चाहिए | 

क्योंकि उसे नर्क देने वाला बताया गया है प्रजापति दक्ष चंद्रमा को यह बातें बता कर अपने घर को लौट आए उन्हें पूर्ण विश्वास था कि चंद्रमा अब भेदभाव पूर्ण बर्ताव नहीं करेगा परन्तु चन्द्र ने प्रजापति दक्ष की बात नहीं मानी वे रोहिणी  में इतनी क्यस्त  हो गए कि उन्होंने दूसरी किसी पत्नी का कभी याद नहीं किया इस बात को सुनकर दक्ष दुखी हूं फिर चंद्रमा के पास गए और उनसे बोले यह बात मैं पहले भी कई बार तुमसे प्रार्थना कर चुका हूं फिर भी तुमने मेरी बात नहीं मानी इसलिए आज मैं तुम्हें शाप  देता हूं कि तुम्हें श्रय रोग हो जाये | 

इतना कहते ही चंद्रमा क्षण भर में क्षय रोग से ग्रसित हो गए | चंद्रमा के श्रीण होते ही तीनों लोगों में हाहाकार मच गया | यह सभी देखकर इंद्र सहित सभी देवता गण और ऋषि महर्षि परम पिता ब्रह्मा जी के पास गए और उन्हें चंद्रमा के बारे में सारी बातें बतलाएं तब ब्रह्मा जी ने कहा जो हुआ सो हुआ उसे पलटा नहीं जा सकता | 

किंतु उसके निवारण के लिए मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूं चन्द्र से  जाकर आप सभी कह दे कि वह प्रभास नामक क्षेत्र में जाएं और वहां विधि पूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव की आराधना करें अपने सामने शिवलिंग की स्थापना करके चंद्रमा तपस्या करें | 

इससे प्रसन्न होकर उन्हें से क्षय रहित कर देंगे | तब देवताओं और  ऋषि यों के कहने से चंद्रमा ने 6 महीने तक तपस्या की भगवान शिव प्रसन्न होकर उनके सामने प्रकट हुए और चंद्रमा से बोले तुम्हारा कल्याण हो तुम्हारे मन में जो भी अभीष्ट हो वह वर मांगो भगवान शिव के मुख से ऐसी बातें सुनकर चंद्रमा ने उन्हें प्रणाम करते हुए कहा हे  देवेश्वर मेरे क्षयरोग  का निवारण कीजिए मुझसे जो भी अपराध हुआ है 

उसे क्षमा कीजिए भगवान शिव ने चंद्रमा से कहा कि तुम्हारी कला प्रतिदिन घटे और दूसरे पक्ष में निरंतर बढ़ती रहे  फिर चंद्रमा ने भगवान् शिव की स्तुति की स्तुति  से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सर्ध्य  साकार रूप में प्रकट हुए आधार लिंक के रूप में प्रकट हो सोमेश्वर कहलाए और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से तीनों लोकों में विख्यात हुए ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी मनुष्य सोमनाथ जाकर इस ज्योतिर्लिंग का भक्तिभाव से पूजन करता है चंद्रमा की तरह है अपने आदि रोगों से मुक्त हो जाता है।

महिला सशक्तिकरण से आप क्या समझते है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (Mallikarjuna Jyotirlinga)

Mallikarjuna Jyotirlinga

नाम – श्री मलिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान –  श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 4:30 से रात्रि 10 बजे तक |

दर्शन समय – सुबह 6:30 , दोपहर 1 बजे , साय 6:30 से 9 के बीच |

शिव पुराण कथा के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के मन में यह विचार आया कि उन्हें अपने दोनों का विवाह कर देना चाहिए कितु वह यह तय नहीं कर पा रहे थे किस का विवाह पहले  कराएं तो माता पार्वती ने कार्तिके और गणेश से कहा की  तुम में  से जो सबसे जल्दी संपूर्ण धरती का चक्कर लगाकर आएगा 

उसका विवाह पहले होगा यह सुनकर कार्तिके मोर  पर सवार होकर तुरंत संपूर्ण धरती का चक्कर लगाने निकल पड़ा और वही भगवान् गणेश ने सोचा उनकी सवारी तो मूषक है उन्हें तो अधिक समय लग जायगा चक्कर लगाने में तो गणेश जी ने अपने माता पिता के चारो और चक्कर लगाये तब  माता पार्वती ने पूछा कि बस यह तूने क्या किया तो गणेश जी ने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा माते  मेरे लिए तो मेरे माता-पिता ही संसार है

 इसलिए मैंने आप दोनों का चक्कर लगा लिया माता पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने उनका विवाह रिधि  सिद्धि से करवा दिया | जा कार्तिके वापस आए तो गणेश जी के विवाह के बारे में पता चला जिससे कार्तिकेय को बहुत बुरा लगा और उन्होंने निर्णय किया कि वह कभी विवाह नहीं करेंगे और फिर वह  क्रॉस पर्वत पर चले गए माता पार्वती और भगवान शिव के अनुरोध करने पर भी नहीं लौटे और वहां से बाहर चले गए तब शिव और माता पार्वती प्रतिष्ठित हो गए 

भगवान शिव का मलिकार्जुन नामक यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध हो गया इस लिंक के नाम में मल्लिका का अर्थ है  पार्वती और अर्जुन का अर्थ है भगवान शिव | अमावस्या और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती और भगवान् शिव दोनों अपने पुत्र से मिलने स्वयम आते हैं वर्तमान में यह स्थान आंध्र प्रदेश में स्थित है| 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga)

Mahakaleshwar Jyotirlinga

नाम – महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – उज्जैन, मध्य प्रदेश |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 4 बजे से रात्रि 11 बजे  तक |

दर्शन का समय – सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक साय 6  बजे से रात्रि 11 बजे तक |

शिवपुराण की कोठी रूद्र संहिता में वर्णित कथा के अनुसार उज्जैन यानी उज्जैन नगर में राजा चंद्रसेन का राज हुआ करता था राजा चंद्रसेन भगवान शिव की परम भक्त शिव पार्षदों में प्रधान मणिभद्र नामक गण उनका हुआ करता था एक बार मणिभद्र राजा चंद्रसेन पर प्रसन्न होकर उन्हें चिंतामणि नामक महा मणि राजा चंद्रसेन को धारण कर लिया| जिसके पास उसका प्रभाव प्रबल हो गया और जैसे-जैसे समय बीता दूसरे देशों में उसकी यश की स्तिति बड़ने लगी |

 बाकि देशो के राजा भी उस मणि को पाने चाहते थे | कुछ राजोओं ने तो खुद जाकर राजा चन्द्र सेन से मणि लेने की विनती की कितु राजा की वह प्रिये वस्तु थी तो राजा ने उसे देने से मना कर दिया और फिर अंत में मणि पाने की लालसा में कुछ राजाओ  ने उज्जैन नगर पर आक्रमण कर दिया |

उज्जैन नगर पर अपनी देख शिव भक्त चंद्रसेन भगवान महाकाल की शरण में जाकर उनकी आराधना करने लगे उसी समय गोपी नाम की महिला अपने बच्चे को साथ लेकर दर्शन हेतु वहां आई उस बालक की उम्र 5 वर्ष थी और गोपी विधवा थी | राजा चन्द्र सेन को ध्यान में देखकर उस बालक के मन में भी शिव की पूजा करने का विचार आया फिर घर आकर वह बालक कही से एक पत्थर ले आया | 

और अपने घर के एकांत स्थल  में बैठकर भक्ति भाव से उसकी पूजा शिवलिंग के रूप में करने लगा कुछ देर पश्चात जब उसकी माता ने उसे भोजन के लिए बुलाया तो वह नहीं गया तब उसकी माता स्वयं उस स्थान पर आई जहां वह बालक बैठा थ। 

वहां पे उसकी मां ने उसे पुकारा किंतु बालक ध्यान से नहीं जगा इससे उसकी माता क्रोधित हो उठी और उसने उस बालक को पीटना शुरू कर दिया और समस्त पूजन सामग्री उठा कर फेंक दी उधर जब बालक चेतना में आया तो उसे अपनी पूजा को नष्ट देख कर बहुत दुख हुआ और वह देव देव महादेव करता है मूर्छित हो गया और जब वह होश में आया  तब उसने देखा कि भगवान कृष्ण की कृपा से वहां एक सुंदर मंदिर निर्मित हो गया मंदिर के मध्य में दिव्य शिवलिंग विराजमान था 

और पूजा की सारी सामग्री भी वही रखी हुई थी उधर जब उस माता को यह पता चला बालक के कारण सब चमत्कार हुआ है तो वह आश्चर्यचकित हो गई और खुद को कोसने लगे जब राजा चंद्रसेन को इस घटना की जानकारी मिली तो वह भी उस शिवभक्त बालक से मिलने पहुंचे उसके बाद देते देते हुए सभी राजा भी उस बालक से मैंने निकले जो राजा चंद्रसेन से मणि हेतु युद्ध करने को उतारू थे और तभी से भगवान महाकाल उज्जैन ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान है|

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Omkareshwar Jyotirlinga)

Omkareshwar Jyotirlinga

नाम – श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान –  मांधाता, मध्य प्रदेश |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक |

दर्शन समय – सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:20 तक , शाम 4 बजे से 8:30 तक |

एक समय की बात है ऋषि नारद मुनि कोकण नामक शिव के समीप जापड़ी भक्ति के साथ उनकी सेवा करने लगे कुछ समय बाद वे गिरिराज विंद पर आये और विंद ने बड़े आदर के साथ उनका पूजन किया और फिर देव्र्श्री से बोला हे देव्र्श्री मेरे पास सब कुछ है यहा किसी चीज  की कोई कमी नही है | 

विंद की अभिमान भरी बाते सुनकर देवश्री वही खड़े हो गये यह देख कोई भी जवाब नही दिया तो विंद ने नारद जी से पूछा आपने मेरे यहा कोण सी कमी देखी आप लम्बी सांसे क्यों खीच रहे है तब नारद जी ने विंद पर्वत से कहा विंद तुम्हारे यहा सब कुछ है फिर भी मेरु पर्वत तुमसे ऊँचा है 

उसके शिखर देवलोक में जा पोहचे है किन्तु तुम्हारे शिखर का भाग अभी भी वहा नही पोहच सका है और फिर देवश्री नारद तत्काल वहा से चले गये इधर  नारद जी की बात सुनकर विंद पर्वत मन ही मन खुद को धिकारने  करने लगा और कुछ समय पश्चात निर्णय  लिया कि वह शिव की आराधना करेगा फिर उसने शिव की पार्थिव मूर्ति बनाई और छह माह तक निरंतर तपस्या में ही लीन रहे विंध्याचल की कठोर तपस्या देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और फिर से वह स्वरूप दिखाया जो योगीजन भी नही देख पाते | 

फिर भगवान ने कहा जब तुम अपना मनवांछित वर मांगो तब भी बोला है देवेश्वर आप सदा ही देवेत्स्व है यदि आप मुझ पर प्रसन्न है तो मुझे ऐसा अभीष्ट वर  दीजिए जो कार्य को सिद्ध करने वाले हो यह सुनकर  भगवान शिव ने यह अभीष्ट  वर दे दिया और कहा कि पर्वतराज जैसा तुम चाहोगे वैसा ही होगा ऋषिगणों और देवताओ को पता चला की भगवन  विंध्याचल पर्वत पर विराजमान है

 तो सब वही तत्काल ही पोहच गये और सभी भगवन शिव से बोले हे देव आदि देव आप यहा स्थिर रूप में विराज करे देवताओ तथा ऋषियों की बात सुनकर भगवन शिव परसन्न हो गये और वहा जो ओंकार लिंग था वो दो रूपों में विभक्त हो गया जिसमे से एक लीन ओम्कशेवर और दूसरा अमलेश्वर के नाम से जाने लगा  

12 Name Of Months In Hindi And English

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga)

Kedarnath Jyotirlinga

नाम – केदारनाथ मंदिर |

स्थान – केदारनाथ, उत्तराखंड |

मंदिर खुलने का समय – अप्रैल से नवम्बर तक सुबह 4 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है 

 दर्शन समय – दर्शन का समय मौसम की परिस्थति पर निर्भर करता है |

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga)

Bhimashankar Jyotirlinga

नाम – श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर | 

स्थान – भीमाशंकर,पुणे , महाराष्ट्र |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 5 बजे से 10 बजे तक |

दर्शन समय – सुबह 5 बजे से रात 9:30 बजे तक दोपहर के मध्यान आरती के दौरान 45 मिनट के लिए दर्शन बंद कर दिए जाते है |

विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग (Vishweshwar Jyotirlinga)

Vishweshwar Jyotirlinga

नाम – श्री काशी विश्वनाथ मंदिर |

स्थान – वाराणसी, उत्तर प्रदेश |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक |

दर्शन का समय- सुबह 4 बजे से 11 बजे तक , दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक और रात्रि 8:30 बजे से 9 बजे तक |

त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग (Trimbakeshwar Jyotirlinga)

Trimbakeshwar Jyotirlinga

नाम – श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – त्रिंबक ,नासिक ,महाराष्ट्र |

मंदिर खुलनें का समय – सुबह 5 बजे से रात 9:30 तक |

दर्शन का समय– सुबह 5:30 से रात्रि 9 बजे तक |

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग  (Baidyanath Jyotirlinga)

Baidyanath Jyotirlinga)

नाम – बाबा बैधनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – देवघर, झारखण्ड |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक |

 दर्शन का समय – सुबह 4 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक और साय 6 बजे से रात प बजे तक | शिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर दर्शन समय बढाया जाता है |

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग  (Nageshwar Jyotirlinga)

Nageshwar Jyotirlinga

नाम – नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – दारुकावनम, गुजरात |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 5 बजे रात  9 बजे तक | 

दर्शन का समय – सुबह 5 बजे से 1 बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात्रि 8 बजे तक |

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग (Rameshwaram Jyotirlinga)

Rameshwaram Jyotirlinga

नाम – रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – तमिलनाडू |

मंदिर खुलने का समय – सुबह 5 बजे रात  9 बजे तक | 

दर्शन का समय-सुबह 5 बजे से 1 बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात्रि 9 बजे तक |

घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग (Ghushmeshwar Jyotirlinga)

Ghushmeshwar Jyotirlinga

नाम – घर्नेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर |

स्थान – एलोरा, महाराष्ट्र |

 मंदिर खुलने का समय – 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक |

 दर्शन का समय – सुबह 5:30 से रात्रि 9:30 बजे तक भक्तो के लिए खुला होता  है |

यदि आपको यह लेख 12 jyotirling ke naam पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Twitter, Facebook और दुसरे Social media sites share कीजिये.

  • admin
  • November 26, 2022

100+ Short stories in hindi with Moral-नैतिक रोचक कहानियां

Short stories in hindi with moral: जब कभी भी कहानियों का जिक्र होता है तब बच्चो का भी जिक्र जरुर से किया जाता है,क्युकी ऐसा इसलिए कहानियाँ मुख्य रूप से बच्चों को ही सबसे ज्यादा पसदं होती है। ये कहानियां ही वो जरिया हैं जिससे यक़ीनन उन्हें नयी प्रेरणा मिलती है और साथ ही जीवन को सही तरीके से जीने की सही सिख मिलती है।

जिससे की बच्चो को उनके भविष्य में एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करती है। सच में ये छोटे बड़े Moral (नैतिक) Stories in Hindi काफी ज्यादा प्रेरणादायक होते हैं सभी बच्चों के लिए। इनमें हमेशा कुछ न कुछ सीख जरुर मिलती है अंत में। इसलिए हिंदी कहानियाँ सभी को हमेशा से पसंद आती है फिर चाहे वो छोटे हो या बड़े।

इन बच्चों की कहानियों में भी आपको काफी भिन्नता देखने को मिलेंगी। मेरे कहने का मतलब है की इन कहानियों के लेखक बहुत से अलग अलग प्रकार के कहानियां बच्चों के लिए लिखते हैं। जैसे की राजा रानी की कहानी, जानवरों की कहानी, भूतों की कहानी, पशुओं  की कहानी, पशियों की कहानी और ऐसे बहुत कुछ।

अक्सर आपने अपने बड़े बुजुर्गों को यह कहते हुए जरुर सुना होगा की उनके समय में उन्हें ये कहानियां उनके दादी, नानी या परिवार के बड़े बुजुर्ग ही सोते समय उन्हें सुनाया करते थे। लेकिन समय के साथ साथ सब कुछ बदलने लगा है।

अब बच्चों को आप गाँव में जाते हुए बहुत कम ही देखते होंगे क्योकि वो ज्यादा समय अपने Mobile या Computer में ही व्यतीत करते हैं, ऐसे में उन्हें कहानी सुनने के मज़ा नहीं मिल पाता है जो की पहले के लोगों ने अनुभव किया होगा। हमें दुःख है की आपको ये ख़ुशी से वंचित होना पड़ रहा है। लेकिन हाँ, हमारी ये कोशिश रहेगी की आपको भी हम वही सभी कहानियाँ सुनाने का मौक़ा मिले।

तो फिर बिना देरी के चलिए वो सभी कहानियों का मज़ा लेते हैं जो पढ़ के आप अपने बच्चो को सुना सकते है और उन्हें नैतिक शिक्षा दे सकते है |

शरारती चूहा: Short stories in hindi with moral

एक दिन रामू के घर में एक शरारती चूहा आ गया। वह बहुत छोटा सा था मगर सारे घर में भागा फिरता था। उसने रामू की किताब भी कुतर डाली थी। कुछ कपड़े भी कुतर दिए थे। रामू  की मम्मी जो खाना बनाती और बिना ढके रख देती , वह चूहा उसे भी चट कर जाता था चूहा खा – पीकर बड़ा हो गया था। एक दिन रामू की मम्मी ने एक बोतल में शरबत बनाकर रखा। शरारती चूहे की नज़र बोतल पर पड़ गयी।

चूहा कई तरकीब लगाकर थक गया था, उसने शरबत पीना था। चूहा बोतल पर चढ़ा किसी तरह से ढक्कन को खोलने में सफल हो जाता है। अब उसमें चूहा मुंह घुसाने की कोशिश करता है। बोतल का मुंह छोटा था मुंह नहीं घुसता। फिर चूहे को सुझाव आया उसने अपनी पूंछ बोतल में डाली। पूंछ  शरबत से गीली हो जाती है  उसे चाट-चाट कर  चूहे का पेट भर गया। अब वह रामू के तकिए के नीचे बने अपने बिस्तर पर जा कर आराम से करने लगा।

नैतिक शिक्षा – मेहनत करने से सभी कार्य सम्भव होते है|

मिटटी का फ्रिज: Small story of hindi

 एक गांव में एक कुम्हार रहता था जो मिटटी के मटके बनाया करता था उस कुम्हार का एक बेटा राकेश भी था जो अपने पिता के साथ मटके बनता था , राकेश  की माँ इस कुम्हार के काम से खुश नहीं थी वह राकेश  को अक्सर शहर में काम करने का दबाव डालती लेकिन राकेश  ये बोलता की उसकी ख़ुशी इसी काम में है। 

राकेश की माँ चिंतित थी क्यूंकि जल्द ही राकेश  की शादी होने वाली थी और कुछ दिन बाद राकेश  की शादी के लिए घर सजा दिया गया गाँव वालो की उपस्थि में शादी हो गई रमा  नाम की लड़की से विवहा संपन्न हुआ। 

एक दिन राकेश  की माँ ने रमा  से भी यही बात कही की उसका बेटा उसकी बात नहीं मानता वह शहर नहीं जाता काम के लिए उसने रमा  को कहने को बोला , अगले दिन आभा राकेश  के पास गयी और उसने शहर जाने की बात कही लेकिन राकेश  मिटटी के मटके बनाने में खुसी जाहिर करते हुए माना करदिया।

इस लगन को देख रमा  समझ चुकी थी की उनके पति को ये काम बहुत पसंद है तभी रमा  ने राकेश  के हाथो से बनाये एक लम्बे सुराई वाले मटके को देख उसने तारीफ की और कहा अगर आप इसे मेले में बेचेंगे तो बहुत ज्यादा पैसे मिलेंगे ये सुनकर राकेश  उत्साहित हुआ उसने और मटके बनाये और उस पर चित्रकारी करके उसको रंग दिया। 

फिर वह मेले ले जाकर मटके बेचने के लिए खड़ा हुआ उसके सारे मटके शाम तक बिकचुके थे उसने घर आकर अपने पिता को बहुत ज्यादा पैसे दिए उसी रात राकेश  ने रमा  से पूछा की अगर हम मिटटी की फ्रिज बनाये यानी मिटटी की अलमारी जिसमे सब्ज़ी राखी जा सके जो बिना बिजली के चलती हो ,रमा  ने बोलै क्या आप ऐसी अलमारी बना सकते फिर हम और जयदा पैसे कमा सकते है। 

अगले दिन राकेश  ने 4 मिटटी की अलमारी बनायीं और मेले में ले जाकर बेचना शुरू किया लोगो ने इस किस्म की अलमारी पहेली बार देखि उसकी सारी अलमारी बिक गयी एक रिपोर्टर ने उस अलमारी का फोटो खींच केर न्यूज़ में छापा अब राकेश  को अलमारी के लिए आर्डर आने लगे लोग उसके घर जाकर उससे अलमारी खरीदना चाहते थे। ये सब माँ को देख अपनी गलती का एहसास हुवा और अपनी बहु रमा को धन्यवाद दिया। 

हमने क्या सीखा 

इस कहानी से हमे ये सबक मिलता है की हमे अपने काम में फोकस करना चाहिए और हमे किसी के काम को और उत्साहित करना चाहिए ,नए नए आईडिया को भी काम में लाना चाहिए।

 मूर्ख गधे की कहानी: Hindi Short Stories with Moral

एक गाँव मे नमक बेचने वाला रोज शहर अपने गधे पर नमक बेचने जाता था। वह  नमक के भारी बोरे  गधे पर लाद देता और गधा उसको शहर ले जाने के लिए नदी पार करता था।

एक बार नमक बेचने वाला गधे पर नमक लाद कर नदी पार कर रहा था तबी गधे का पैर लडख़ड़ा जाता है और गधा नदी में गिर जाता है , अब नमक की सारी बोरी गीली हो चुकी थी जिसमे से काफी नमक पानी मे ही घुल चुका । गधे का वजन अब काफी हल्का हो चुका था ।

अगले दिन गधा नदी पार करते वक़्त फिर गिर जाता है और नमक घुल जाता है वजन हल्का हो जाता है । ऐसा ही गधे ने लगातार 7 दिन तक किया अब गधा रोज इस वजह से खुश था। लेकिन अब गधे के मालिक को उसकी चाल समझ आ चुकी थी तभी उसने गधे को सबक सिखाने की सोच।

इस बार उस गधे पर कॉटन रुई से भरे बोरे लादे गए जोकि बहुत हल्के थे।

गधे को रास्ते मे नदी मिल गयी उसने अपनी वही चाल फिर चली ,लेकिन इस बार जब वह पानी से उठा तो उसका वजन काफी भारी हो चुका था और गधे का सिर चकरा गया कि इस बार हल्का क्यों नही हुआ। गधे ने हल्के वजन को भी हल्का करने के चक्कर मे उसे पानी मे गिला करके सारी रुई भारी करली थी।अब गधे को सबक मिल चुका था उसदिन के बाद गधे ने कोई चाल नही चली।

हमने क्या सीखा

इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है कि हर बार भाग्य साथ नही देता बल्कि हमे भी अपनी बुद्धि लगानी होती है।

 बिल्ली बच गई: Moral Stories in Hindi in Short

ढोलू-मोलू दो भाई थे। दोनों खूब खेलते, पढ़ाई करते और कभी-कभी खूब लड़ाई भी करते थे। एक दिन दोनों अपने घर के पीछे खेल रहे थे। वहां एक कमरे में बिल्ली के दो छोटे-छोटे बच्चे थे। बिल्ली की मां कहीं गई हुई थी , दोनों बच्चे अकेले थे। उन्हें भूख लगी हुई थी इसलिए  खूब रो रहे थे। ढोलू-मोलू ने दोनों बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनी और अपने दादाजी को बुला कर लाए।

दादा जी ने देखा दोनों बिल्ली के बच्चे भूखे थे। दादा जी ने उन दोनों बिल्ली के बच्चों को खाना खिलाया और एक एक कटोरी दूध पिलाई। अब बिल्ली की भूख शांत हो गई। वह दोनों आपस में खेलने लगे। इसे देखकर ढोलू-मोलू बोले बिल्ली बच गई दादाजी ने ढोलू-मोलू को शाबाशी दी।

नैतिक शिक्षा 

 दूसरों की भलाई करने से ख़ुशी मिलती है।

 बलवान कछुए की मूर्खता: Moral stories of hindi

एक सरोवर में विशाल नाम का एक कछुआ रहा करता था। उसके पास एक मजबूत कवच था। यह कवच शत्रुओं से बचाता था। कितनी बार उसकी जान कवच के कारण बची थी।

एक बार भैंस तालाब पर पानी पीने आई थी। भैंस का पैर विशाल पर पड़ गया था। फिर भी विशाल को नहीं हुआ। उसकी जान कवच से बची थी। उसे काफी खुशी हुई क्योंकि बार-बार उसकी जान बच रही थी।

यह कवच विशाल को कुछ दिनों में भारी लगने लगा। उसने सोचा इस कवच से बाहर निकल कर जिंदगी को जीना चाहिए। अब मैं बलवान हो गया हूं , मुझे कवच की जरूरत नहीं है।

विशाल ने अगले ही दिन कवच को तालाब में छोड़कर आसपास घूमने लगा।

अचानक हिरण का झुंड तालाब में पानी पीने आया। ढेर सारी हिरनिया अपने बच्चों के साथ पानी पीने आई थी।

उन हिरणियों के पैरों से विशाल को चोट लगी, वह रोने लगा।

आज उसने अपना कवच नहीं पहना था। जिसके कारण काफी चोट जोर से लग रही थी।

विशाल रोता-रोता वापस तालाब में गया और कवच को पहन लिया।  कम से कम कवच से जान तो बचती है।

नैतिक शिक्षा

 प्रकृति से मिली हुई चीज को सम्मान पूर्वक स्वीकार करना चाहिए वरना जान खतरे में पड़ सकती है।

ये भी पढे:- Self Introduction कैसे दे | अपना परिचय देना सीखे

 लकड़हारा और सोने की कुल्हाड़ी: Short Stories in Hindi for Kids

एक समय की बात है जंगल के पास एक लकड़हारा रहता था वह जंगल की लकड़ी काट कर अपना जीवन गुजार करता था।एक दिन वह पेड़ पर बैठ लकड़ी काट रहा था तभी उसके हाथ से उसकी कुल्हाड़ी छूट कर नदी में गिर गयी।

उस नदी का बाहों इतना तेज था और साथ ही वह गहरी नदी थी उसने आस पास हाथ डालकर कुल्हाड़ी खोजी लेकिन उसे नही मिली उसने बहुत कोसिस की लेकिन कुल्हाड़ी कही नजर नहीं आयी फिर वह वहाँ बेठ कर रोने लगा उसके रोने की आवाज सुनकर पानी से एक जलपरी निकल आयी और उस लकड़हारे से पूछ क्यों रो रहे हो।

लकड़हारा जलपरी को देख आश्चर्य रहे गया लेकिन उसने अपनी सारी बात उस परी को बतायी तब परी ने उसको एक चांदी की कुल्हाड़ी पानी से निकाल कर दी तो लकड़हारे ने कहा ये उसकी कुल्हाड़ी नहीं है। परी ने दुबारा पानी से एक कुल्हाड़ी दी जो अब सोने की थी लकड़हारे ने फिर कहा ये भी उसकी कुल्हाड़ी नहीं है।

अबकी बार परी ने लकड़हारे को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी खोज के दी तब लकड़हारे ने मुस्कुराते हुए कहा ये मेरी है । उसकी इस ईमानदारी को देख कर परी ने उसको चांदी और सोने की कुल्हाड़ी उपहार में भेंट की।

हमे क्या सीख मिली

इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि ईमानदारी दुनिया की सबसे अच्छी नीति है और ईमानदारी से बहुत अनमोल चीज कोई नही। 

सुई देने वाली पेड़ की कहानी: Short story In hindi

एक जंगल के पास दो भाई रहा करते थे. इन दोनों में से जो भाई बड़ा था वो बहुत ही ख़राब बर्ताव करता था छोटे भाई के साथ. जैसे की वो प्रतिदिन छोटे भाई का सब खाना ख लेता था और साथ में छोटे भाई के नए कपड़े भी खुद पहन लेता था.

एक दिन बड़े भाई ने तय किया की वो पास के जंगल में जाकर कुछ लकड़ियाँ लायेगा जिसे की वो बाद में बाज़ार में बेच देगा कुछ पैसों के लिए.

जैसे ही वह जंगल में गया वहीं वो बहुत से पेड़ काटे, फ़िर ऐसे ही एक के बाद एक पेड़ काटते हुए, वह एक जादुई पेड़ पर ठोकर खाई.

ऐसे में पेड़ ने कहा, अरे मेहरबान सर, कृपया मेरी शाखाएं मत काटो. अगर तुम मुझे छोड़ दो तब, मैं तुम्हें एक सुनहरा सेब दूंगा. वह उस समय सहमत हो गया, लेकिन उसके मन में लालच जागृत हुआ. उसने पेड़ को धमकी दी कि अगर उसने उसे ज्यादा सेब नहीं दिया तो वह पूरा धड़ काट देगा।

ऐसे में जादुई पेड़, बजाय बड़े भाई को सेब देने के, उसने उसके ऊपर सैकड़ों सुइयों की बौछार कर दी. इससे बड़े भाई दर्द के मारे जमीन पर लेटे रोने लगा.

अब दिन धीरे धीरे ढलने लगा, वहीँ छोटे भाई को चिंता होने लगी. इसलिए वह अपने बड़े भाई की तलाश में जंगल चला गया. उसने उस पेड़ के पास बड़े भाई को दर्द में पड़ा हुआ पाया, जिसके शरीर पर सैकड़ों सुई चुभी थी. उसके मन में दया आई, वह अपने भाई के पास पहुंचकर, धीरे धीरे हर सुई को प्यार से हटा दिया.

ये सभी चीज़ें बड़ा भाई देख रहा था और उसे अपने पर गुस्सा आ रहा था. अब बड़े भाई ने उसके साथ बुरा बर्ताव करने के लिए छोटे भाई से माफी मांगी और बेहतर होने का वादा किया. पेड़ ने बड़े भाई के दिल में आए बदलाव को देखा और उन्हें वह सब सुनहरा सेब दिया जितना की उन्हें आगे चलकर जरुरत होने वाली थी|

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की हमेशा सभी को दयालु और शालीन बनना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों को हमेशा पुरस्कृत किया जाता है|

 दो मेंढ़कों की कहानी: Short funny story in hindi

एक बार मेंढकों का एक दल पानी की तलाश में जंगल में घूम रहा था। अचानक, समूह में दो मेंढक गलती से एक गहरे गड्ढे में गिर गए।

दल के दूसरे मेंढक गड्ढे में अपने दोस्तों के लिए चिंतित थे। गड्ढा कितना गहरा था, यह देखकर उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि गहरे गड्ढे से बचने का कोई रास्ता नहीं है और कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है।

वे लगातार उन्हें हतोत्साहित करते रहे क्योंकि दो मेंढक गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश कर रहे थे। वो दोनों जितनी भी कोशिश करते लेकिन काफ़ी सफल नहीं हो पाते।

जल्द ही, दो मेंढकों में से एक ने दूसरे मेंढकों पर विश्वास करना शुरू कर दिया – कि वे कभी भी गड्ढे से नहीं बच पाएंगे और अंततः हार मान लेने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।

दूसरा मेंढक अपनी कोशिश जारी रखता है और आखिर में इतनी ऊंची छलांग लगाता है कि वह गड्ढे से बच निकलता है। अन्य मेंढक इस पर चौंक गए और आश्चर्य किया कि उसने यह कैसे किया।

अंतर यह था कि दूसरा मेंढक बहरा था और समूह का हतोत्साह नहीं सुन सकता था। उसने ये सोचा कि वे उसके इस कोशिश पर खुश कर रहे हैं और उसे कूदने के लिए उत्साहित कर रहे हैं !

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की दूसरों की राय आपको तभी प्रभावित करेगी जब आप उसपर विश्वास करेंगे, बेहतर इसी में है की आप खुद पर ज़्यादा विश्वास करें, सफलता आपके कदम चूमेगी।

ये भी पढे:- पढ़ाई में मन कैसे लगाए | पढ़ाई करने का सही तरीका

 कौवे की गिनती: Small Moral Stories in Hindi

एक दिन की बात है, अकबर महाराज जे अपने सभा में एक अजीब सा सवाल पूछा, जिससे पूरी सभा के लोग हैरान रह गए। जैसे ही वे सभी उत्तर 

जानने की कोशिश कर रहे थे, तभी बीरबल अंदर आए और पूछा कि मामला क्या है।

उन्होंने उससे सवाल दोहराया। सवाल था, “शहर में कितने कौवे हैं?

बीरबल तुरंत मुस्कुराए और अकबर के पास गए। उन्होंने उत्तर की घोषणा की; उनका जवाब था की, नगर में इक्कीस हजार पांच सौ तेईस कौवे हैं। यह पूछे जाने पर कि वह उत्तर कैसे जानते हैं, तब बीरबल ने उत्तर दिया, “अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने के लिए कहें।

यदि अधिक मिले,, तो कौवे के रिश्तेदार उनके पास आस-पास के शहरों से आ रहे होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के कौवे शहर से बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास जरूर गए होंगे।” 

यह जवाब सुनकर, राजा को काफ़ी संतोष मिला। इस उत्तर से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को एक माणिक और मोती की जंजीर भेंट की। वहीं उन्होंने बीरबल की बुद्धि की काफ़ी प्रसंशा करी।

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की आपके उत्तर में सही स्पष्टीकरण होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही उत्तर का होना।

कुत्ता और हड्डी की कहानी: Short Animal Stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक बार एक कुत्ता था जो खाने की तलाश में रात-दिन सड़कों पर घूमता रहता था।

एक दिन, उसे एक बड़ी रसीली हड्डी मिली और उसने तुरंत उसे अपने मुंह के बीच में पकड़ लिया और घर की ओर ले गया। घर के रास्ते में, उसने एक नदी पार करनी पड़ी। वहाँ उसने गौर किया की एक और कुत्ता ठीक उसी के तरफ़ ही देख रहा था, वहीं जिसके मुंह में भी एक हड्डी थी।

इससे इस कुत्ते के मन में लालच उत्पन्न हुई और वह उस हड्डी को अपने लिए चाहने लगा। लेकिन जैसे ही उसने अपना मुंह खोला, जिस हड्डी को वह काट रहा था, वह नदी में गिर गई और डूब गई। ऐसा इसलिए हुआ क्यूँकि वो दूसरा कुत्ता और कोई नहीं बल्कि उसकी ही परछायी थी, जो की उसे पानी में दिख रहा था। अब जब की उसके मुँह की हड्डी गिर चुकी थी पानी में इसलिए उस रात वह भूखा ही रहा और अपने घर चला गया।

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की अगर हम हमेशा दूसरों से ईर्ष्या करते हैं, तो हम लालची कुत्ते की तरह सबक़ सीखना पड़ेगा, वहीं जो हमारे पास पहले से है हम उसे भी खो देंगे।

मुर्गे की अकल ठिकाने:  Simple Short Motivation Stories in Hindi

एक समय की बात है, एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको समझ में आएगी, और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला।  सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है।

नैतिक शिक्षा 

 घमंड नहीं करना चाहिए आपकी अहमियत लोगो को बिना बताये पता चलता है।

रेलगाड़ी: Short Moral Story for Adults in Hindi

पिंकी बहुत प्यारी लड़की है। पिंकी कक्षा दूसरी में पढ़ती है। एक दिन उसने अपनी किताब में रेलगाड़ी देखी।  उसे अपनी रेल – यात्रा याद आ गई, जो कुछ दिन पहले पापा-मम्मी के साथ की थी। पिंकी ने चौक उठाई और फिर क्या था, दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बना दिया। उसमें पहला डब्बा जुड़ गया , दूसरा डब्बा जुड़ गया , जुड़ते – जुड़ते कई सारे डिब्बे जुड़ गए। जब चौक खत्म हो गया पिंकी उठी उसने देखा कक्षा के आधी दीवार पर रेलगाड़ी बन चुकी थी। फिर क्या हुआ  – रेलगाड़ी दिल्ली गई  ,  मुंबई गई , अमेरिका गई , नानी के घर गई , और दादाजी के घर भी गई।

नैतिक शिक्षा 

 बच्चों के मनोबल को बढ़ाइए कल के भविष्य का निर्माण आज से होने दे।

 बलवान कछुए की मूर्खता: Very Short Motivation Story in Hindi

एक बार भैंस तालाब पर पानी पीने आई थी। भैंस का पैर विशाल पर पड़ गया था। फिर भी विशाल एक सरोवर में विशाल नाम का एक कछुआ रहा करता था। उसके पास एक मजबूत कवच था। यह कवच शत्रुओं से बचाता था। कितनी बार उसकी जान कवच के कारण बची थी।

को नहीं हुआ। उसकी जान कवच से बची थी। उसे काफी खुशी हुई क्योंकि बार-बार उसकी जान बच रही थी।

यह कवच विशाल को कुछ दिनों में भारी लगने लगा। उसने सोचा इस कवच से बाहर निकल कर जिंदगी को जीना चाहिए। अब मैं बलवान हो गया हूं , मुझे कवच की जरूरत नहीं है।

विशाल ने अगले ही दिन कवच को तालाब में छोड़कर आसपास घूमने लगा।

अचानक हिरण का झुंड तालाब में पानी पीने आया। ढेर सारी हिरनिया अपने बच्चों के साथ पानी पीने आई थी।

उन हिरणियों के पैरों से विशाल को चोट लगी, वह रोने लगा।

आज उसने अपना कवच नहीं पहना था। जिसके कारण काफी चोट जोर से लग रही थी।

विशाल रोता-रोता वापस तालाब में गया और कवच को पहन लिया।  कम से कम कवच से जान तो बचती है।

नैतिक शिक्षा 

प्रकृति से मिली हुई चीज को सम्मान पूर्वक स्वीकार करना चाहिए वरना जान खतरे में पड़ सकती है।

 चींटी और कबूतर की कहानी: Good Short Moral Stories in Hindi

गर्मियों के दिन थे और एक चींटी पानी की तलाश में इधर उधर घूम रही थी ,कुछ देर घूमने के बाद उसने डोर एक नदी देखी ,नदी देख वह बहुत खुश हो गयी फिर वह पानी पीने के लिए एक छोटी सी चट्टान पर चढ़ गई ,लेकिम वह फिसल कर नदी में गिर गयी।

वह जब डूब रही थी तो उसे एक कबूतर ने देख लिया । कबूतर पास के एक पेड़ पर ही बैठा था उसने चींटी की फौरन मदद की ,चींटी को डूबता देख कबूतर ने झट से एक पत्ता पानी मे गिरा दिया। इस तरह से चींटी की जान बच गयी और वह कबूतर की एहसान मंद हो गयी।

इस घटना के बाद चींटी और कबूतर दोनों अच्छे दोस्त बन गए।और उनके दिन खुशी से बीतने लगे लेकिन एकदिन जंगल मे एक शिकारी आया। उसने पेड़ पर बैठे उसी खूबसूरत कबूतर को देखा और फिर अपनी बंदूक से कबूतर पर निशाना साधने लगा।

लेकिन वही पास में वह चींटी भी मजूद थी वह ये सब देख रही थी चींटी फौरन शिकारी के पास गई और जोर से उसके पैर पे काट जिससे वह दर्द से चिल्लाने लगा और बंदूक भी गिरा दी। आवाज सुनकर कबूतर ने शिकारी को देख लिया ।

कबूतर को एहसास हुआ कि उसके साथ क्या हो सकता था और फिर कबूतर फौरन वह से उड़ गया । जब शिकारी चला गया तो कबूतर ने चींटी के पास आकर उसका धन्यवाद दिया। इस तरह दोनों एक दूसरे के काम आए।

सिख 

इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि नेक काम कभी बेकार नही जाता ,अच्छे काम करते रहिए वह पलट कर आपके लिए अच्छे साबित होंगे।

 लालची लोमड़ी की कहानी: Cute Inspirational Short Moral Stories in Hindi

गर्मियों के दिन थे जंगल मे एक लोमड़ी बहुत भूखी थी और भूख के कारण वह खाने की तलाश में इधर उधर घूम रही थी ,कुछ देर खोजने के बाद उसे एक खरगोश मिला लेकिन लोमड़ी ने उसे खाने के बजाय उसे छोड़ दिया क्योंकि वह बहुत छोटा था और लोमड़ी का इससे कुछ अलाभला नही होने वाला।

फिर कुछ देर खोजने के बाद लोमड़ी को रास्ते मे एक हिरण मिली, हिरण देख उसके मुंह मे पानी आ गया और उसने हिरण को पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी अपनी पूरी ताकत और रफ्तार के साथ पीछा किया लेकिन वह हिरण को पकड़ नही सका चूँकि वह पहेले से खाने की तलाश में थक चुकी थी।

जब उसे कुछ खाने को नही मिला तब उसने उसी खरगोश को खाने के लिए सोच जो उसने छोटा समझ कर छोड़ा था। फिर लोमड़ी उसी रास्ते वापस उस खरगोश की तलाश में गयी लेकिन इस बार वहाँ पर ख़रगोश नही था वह जा चुका था। और फिर लोमड़ी को थक हारकर घर वापस लौटना पड़ा कई दिनों तक उसे खान नई मिला।

हमे क्या सीख मिली

इस लालची लोमड़ी से हमे ये सबक मिलता है कि ज्यादा लालच करना कभी भी फलदायक नहीं होता।

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प्यासा कौवा: Motivational Short Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है ! कड़कड़ाती गर्मियों में एक प्यासा कौवा पानी की खोज में तड़प रहा था। वह प्यास के कारण वह अधमरा हो गया था। उसे ऐसा लग रहा था की वह जीवन के अंतिम सांसे गिन रहा हो | उसकी नजर अचानक एक पानी के घड़े पर गिरी! पानी का घड़ा देखकर उसे ऐसा लगा मानो की उसे जीवन दान मिला है। वह जैसे घड़े के पास पहुंचा और उसे देखा की पानी घड़े के बहुत अंदर था। कोवे की चोंच से पानी पीना तो असंभव था। कौवे ने बहुत प्रयास किया पर वह असफल हुआ। कौवा पहले से भी और ज्यादा निराश हो गया था।

क्योंकि उसके आखों के सामने पानी था पर पानी पीने में असक्षम था। कुछ समय बाद घड़े को देखते-देखते कौवे की नजर घड़े के पास पड़े कंकड़ों पर गिरी और और एक तरकीब सूझी। उसने विचार किया कि अगर मेहनत करके  एक-एक करके सारे कंकड़ घड़े में डाले तो पानी ऊपर आ सकता है। पुरे भरसक प्रयास और धेय्य से कंकर पानी में फेंकना शुरू किया । कौवे ने जी जान से मेहनत की और छोटे छोटे पत्थर डालने से पानी का स्तर ऊपर आ गया जिससे वह पानी पीने में सफल हो गया।

नैतिक शिक्षा   

        प्यासा कौवा की कहानी से क्या शिक्षा मिलती है, “मेहनत सफलता कुंजी है।”

बंदर और मगरमच्छ: Inspirational Short Moral Stories in Hindi 

एक नदी के किनारे एक जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था. उस पेड़ पर बहुत ही मीठे-मीठे जामुन लगते थे. एक दिन एक मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया. बन्दर ने उससे पूछा तो उसने अपने आने की वजह बताई. बन्दर ने बताया की यहाँ बहुत ही मीठे जामुन लगते हैं और उसने वो जामुन मगरमछ को दिए. उसकी मित्रता नदी में रहने वाले मगरमच्छ के साथ हो गयी. वह बन्दर उस मगरमच्छ को रोज़ खाने के लिए जामुन देता रहता था|

एकदिन उस मगरमच्छ ने कुछ जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाये. स्वादिष्ट जामुन खाने के बाद उसने यह सोचकर कि रोज़ाना ऐसे मीठे फल खाने वाले का दिल भी खूब मीठा होगा, उसने अपने पति से कहा कि उसे उस बन्दर का दिल चाहिए और वो इसी ज़िद पर अड़ गई. उसने बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि जब तक बन्दर का कलेजा उसे मिलेगा वो पायेगी| पत्नी कि ज़िद से मजबूर हुए मगरमच्छ ने एक चाल चली और बन्दर से कहा कि उसकी भाभी उसे मिलना चाहती है. बन्दर ने कहा कि वो भला नदी में कैसे जायेगा? मगरमच्छ ने उपाय सुझाया कि वह उसकी पीठ पर बैठ जाये, ताकि सुरक्षित उसके घर पहुँच जाए.

बन्दर भी अपने मित्र की बात का भरोसा कर, पेड़ से नदी में कूदा और उसकी पीठ पर सवार हो गया. जब वे नदी के बीचों-बीच पहुंचे, मगरमच्छ ने सोचा कि अब बन्दर को सही बात बताने में कोई हानि नहीं और उसने भेद खोल दिया कि उसकी पत्नी उसका दिल खाना चाहती है. बन्दर का दिल टूट गया, उसको धक्का तो लगा, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया.

बन्दर तपाक से बोला “ओह मेरे मित्र तुमने, यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई क्योंकि मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ में सम्भाल कर रखा है. अब जल्दी से मुझे वापस नदी के किनारे ले चलो ताकि मैं अपना दिल लाकर अपनी भाभी को उपहार में देकर उसे खुश कर सकूं.”

मूर्ख मगरमच्छ बन्दर को जैसे ही नदी-किनारे ले कर आया बन्दर ने ज़ोर से जामुन के पेड़ पर छलांग लगाई और क्रोध में भरकर बोला, “मूर्ख ,दिल के बिना भी क्या कोई ज़िन्दा रह सकता है ? जा, आज से तेरी-मेरी दोस्ती समाप्त.”

सीख       

       इससे पहली यह सीख मिलती है कि मुसीबत के क्षणों में धैर्य नहीं खोना चाहिए और अनजान से दोस्ती सोच समझकर करनी चाहिए.

– दूसरे, मित्रता का सदैव सम्मान करें.

बोलती गुफा: Short horror story in hindi

जंगल में एक बूढ़ा शेर मारा-मारा फिर रहा था. बुढ़ापे के कारण उसका शरीर कमज़ोर हो चूका था और यही वजह थी कि कई दिनों से उसे खाना भी नसीब नहीं हुआ था. बुढ़ापे के कारण वह शिकार नहीं कर पाता था. कोई भी जानवर उसके हाथ नहीं आ रहा था. छोटे-छोटे जानवर भी उसे चकमा देकर भाग जाते थे. एक बार वह भटकते-भटकते बहुत थक गया तो एक जगह पर रुककर सोचने लगा कि ऐसे कैसे काम चलेगा, क्या करूं ? किधर जाऊं? कैसे अपना पेट भरूं ? इस तरह तो मैं मर जाऊंगा.

अचानक उसकी नज़र एक गुफा पर पड़ी. उसने सोचा कि इस गुफा में कोई जंगली जानवर ज़रूर रहता होगा. मैं इस गुफा के अन्दर बैठ जाता हूं, जैसे ही वह जानवर आएगा, मैं उसे खाकर अपना पेट भर लूंगा. शेर उस गुफा के अंदर जाकर बैठ गया और अपने शिकार की प्रतीक्षा करने लगा.

दरअसल, वह गुफा एक गीदड़ की थी. गीदड़ जैसे ही अपनी गुफा की तरफ बढ़ने लगा, उसने ने गुफा के करीब शेर के पंजों के निशान देखे. उसे समझते देर नहीं लगी और वो फौरन खतरा भांप गया. उसके सामने उसकी मौत थी, लेकिन सामने संकट देखकर भी उसने अपना संयम नहीं खोया बल्कि उसकी बुद्धि तेजी से काम करने लगी कि इस शत्रु से कैसे बचा जाए ?

उसके दिमाग में नई बात आ ही गई, वह गुफा के द्वार पर खड़ा होकर बोला–‘‘ओ गुफा !’’ जब अंदर से गुफा ने कोई उत्तर न दिया, तो गीदड़ एक बार फिर बोला, ‘‘सुन गुफा ! तेरी मेरी यह संधि है कि मैं बाहर से आऊंगा, तो तेरा नाम लेकर बुलाऊंगा, जिस दिन तुम मेरी बात का उत्तर नहीं दोगी मैं तुझे छोड़कर किसी दूसरी गुफा में रहने चला जाऊंगा.’’ जवाब न मिलता देख गीदड़-बार-बार अपनी बात दोहराने लगा.अन्दर बैठे शेर ने गीदड़ की यह बात सुनी,

तो वह यह समझ बैठा कि गुफा गीदड़ के आने पर बोलती होगी. शेर अपनी आवाज को मधुर बनाकर बोला, ‘‘अरे आओ गीदड़ भाई… स्वागत है!’’ ‘‘अरे शेर मामा,  तुम हो? बुढ़ापे में तुम्हारी बुद्धि इतना भी नहीं सोच पा रही कि गुफाएं कभी नहीं बोलतीं… कहकर वह तेजी से पलटकर भागा. शेर ने उसे पकड़ने के लिए गुफा से बाहर तो ज़रूर आया, किंतु तब तक वह गीदड़ नौ दो ग्याह हो चुका था. 

सिख 

 मुसीबत के समय में भी संयम नहीं खोना चाहिए और अपनी बुद्धि का दामन नहीं छोड़ना चाहिए| 

साधू और चूहे की कहानी: Short motivational story in hindi

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक साधु मंदिर में रहा करता था। उनकी दिनचर्या रोजाना प्रभु की भक्ति कराना और आने-जाने वाले लोगों को धर्म का उपदेश देना थी। गांव वाले भी जब भी मंदिर आते, तो साधु को कुछ न कुछ दान में दे जाते थे। इसलिए, साधु को भोजन और वस्त्र की कोई कमी नहीं होती थी।

रोज भोजन करने के बाद साधु बचा हुआ खाना छींके में रखकर छत से टांग देता था। समय ऐसे ही आराम से निकल रहा था, लेकिन अब साधु के साथ एक अजीब-सी घटना होने लगी थी। वह जो खाना छींके में रखता था, गायब हो जाता था। साधु ने परेशान होकर इस बारे में पता लगाने का निर्णय किया। उसने रात को दरवाजे के पीछे से छिपकर देखा कि एक छोटा-सा चूहा उसका भोजन निकालकर ले जाता है। दूसरे दिन उन्होंने छींके को और ऊपर कर दिया, ताकि चूहा उस तक न पहुंच सके, लेकिन यह उपाय भी काम नहीं आया।

उन्होंने देखा की चूहा और ऊंची छलांग लगाकर छींके पर चढ़ जाता और भोजन निकाल लेता था। अब साधु चूहे से परेशान रहने लगा था। एक दिन उस मंदिर में एक भिक्षुक आया। उसने साधु को परेशान देखा और उसकी परेशानी का कारण पूछा, तो साधु ने भिक्षुक को पूरा किस्सा सुना दिया। भिक्षुक ने साधु से कहा कि सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि चूहे में इतना ऊंचा उछलने की शक्ति कहां से आती है।

उसी रात भिक्षुक और साधु दोनों ने मिलकर पता लगाना चाहा कि आखिर चूहा भोजन कहां ले जाता है। दोनों ने चुपके से चूहे का पीछा किया और देखा कि मंदिर के पीछे चूहे ने अपना बिल बनाया हुआ है। चूहे के जाने के बाद उन्होंने बिल को खोदा, तो देखा कि चूहे के बिल में खाने-पीने के सामान का बहुत बड़ा भण्डार है।

तब भिक्षुक ने कहा कि इसी वजह से ही चूहे में इतना ऊपर उछलने की शक्ति आती है। उन्होंने उस सामग्री काे निकाल लिया और गरीबों में बांटा दिया। जब चूहा वापस आया, तो उसने वहां पर सब कुछ खाली पाया, तो उसका पूरा आत्मविश्वास समाप्त हो गया। उसने साेचा कि वह फिर से खाने-पीने का सामान इकट्ठा कर लेगा। यह सोचकर उसने रात को छींके के पास जाकर छलांग लगाई, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण वह नहीं पहुंच पाया और साधु ने उसे वहां से भगा दिया।

कहानी से सीख

संसाधनों के अभाव में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इसलिए, जो भी संसाधन आपके पास हों, उसका ध्यान रखना चाहिए।

ब्राह्मण बकरी और तीन ठग: very short hindi story with moral

किसी गांव में शम्भुदयाल नाम का एक प्रसिद्ध ब्राह्मण रहता था। वह बहुत विद्वान था और लोग आए दिन उस अपने घर में भोजन के लिए निमंत्रण देते रहते थे। एक दिन ब्राह्मण एक सेठ जी के यहां से भोजन करके आ रहा था। लौटते समय सेठ ने ब्राह्मण को एक बकरी उपहार में दी, जिससे ब्राह्मण रोजाना उसका दूध पी सकें।

ब्राह्मण बकरी को कंधे पर रखकर घर की ओर जा रहा था। रास्ते में तीन ठगों ने ब्राह्मण और उसकी बकरी को देख लिया और ब्राह्मण को लूटने का षड्यंत्र रचा। वे ठग थोड़ी-थोड़ी दूरी पर जाकर खड़े हो गए।

जैसे ही ब्राह्मण पहले ठग के पास से गुजरा, तो ठग जोर-जोर से हंसने लगा। ब्राह्मण ने इसका कारण पूछा तो ठग ने कहा, ‘महाराज मैं पहली बार देख रहा हूं कि एक ब्राह्मण देवता अपने कंधे के ऊपर गधे को लेकर जा रहे हैं।’ ब्राह्मण को उसकी बात सुनकर गुस्सा आ गया और ठग को भला-बुरा कहते हुए आगे बढ़ गया।

थोड़ी ही दूरी पर ब्राह्मण को दूसरा ठग मिला। ठग ने गंभीर स्वर में पूछा, ‘हे ब्राह्मण महाराज, क्या इस गधे के पैर में चोट लगी है, जो आप इसे अपने कंधे पर रखकर ले जा रहे हैं।’ ब्राह्मण उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गया और ठग से कहा, ‘तुम्हे दिखाई नहीं देता है कि यह बकरी है, गधा नहीं। ठग ने कहा, ‘महाराज शायद आपको किसी ने बेवकूफ बना दिया है, बकरी की जगह गधा देकर।’ ब्राह्मण ने उसकी बात सुनी और सोचता हुआ आगे बढ़ गया।

कुछ दूरी पर ही उसे तीसरा ठग दिखाई दिया। तीसरे ठग ने ब्राह्मण को देखते ही कहा, ‘महाराज आप क्यों इतनी तकलीफ उठा रहे हैं, आप कहें, तो मैं इसे आपके घर तक छोड़ कर आ जाता हूं, मुझे आपका आशीर्वाद और पुण्य दोनों मिल जाएंगे।’ ठग की बात सुनकर ब्राह्मण खुश हो गया और बकरी को उसके कंधे पर रख दिया।

थोड़ी दूर जाने पर तीसरे ठग ने पूछा, ‘महाराज आप इस गधे को कहां से लेकर आ रहें हैं।’ ब्राह्मण ने उसकी बात सुनी और कहा, ‘भले मानस यह गधा नहीं बकरी है।’ ठग ने जोर देकर कहा, ‘हे ब्राह्मण देवता, लगता है किसी ने आपके साथ छल किया है और यह गधा दे दिया।’

ब्राह्मण ने सोचा कि रास्ते में जो भी मिल रहा है बस एक ही बात कह रहा है। तब उसने ठग से कहा, ‘एक काम करो, यह गधा मैं तुम्हें दान करता हूं, तुम ही इसे रख लो।’ ठग ने ब्राह्मण की बात सुनी और बकरी को लेकर अपने साथियों के पास आ गया। फिर तीनों ठगों ने बाजार में उस बकरी को बेचकर अच्छी कमाई की और ब्राह्मण ने उनकी बात मानकर अपना नुकसान कर लिया।

कहानी से सीख

 किसी भी झूठ को अगर कई बार बोला जाए, तो वो सच लगने लगता है, इसलिए हमेशा अपने दिमाग का उपयोग करें और सोच-विचार कर ही किसी पर विश्वास करें।

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हाथी और बंदर: Short love story in hindi

एक घने जंगल में एक बंदर और एक हाथी रहते थे। हाथी बड़ा शक्तिशाली था। वो बड़े-बड़े पेड़ों को एक ही झटके में उखाड़ देता था। बंदर काफी दुबला-पतला, लेकिन वो बड़ा ही फुर्तीला और तेज था। दिनभर बंदर जंगल के पेड़ों पर उछलकूद करता रहता था। बंदर और हाथी दोनों को ही अपने गुणों पर बड़ा ही घमंड था।

दोनों ही एक-दूसरे से खुद को ज्यादा अच्छा मानते थे। इस वजह से दोनों में हमेशा बहस होती रहती थी। उसी जंगल में एक उल्लू भी रहता था, जो अक्सर बंदर और हाथी की हरकतें देखाता था। वह इन दोनों के लड़ाई-झगड़े से परेशान हो गया था। एक दिन उस उल्लू ने उन दोनों से कहा, ‘जिस तरह तुम दोनों लड़ते हो, इससे कोई फैसला नहीं होने वाला है। तुम दोनों एक प्रतियोगिता के जरिए आसानी से यह फैसला कर सकते हो कि तुम दोनों में से सबसे शक्तिशाली कौन है।’

बंदर और हाथी दोनों को उल्लू की बात अच्छी लगी। दोनों ने फिर एक साथ पूछा, ‘इस प्रतियोगिता में क्या करना होगा?’

उल्लू ने कहा, ‘इस जंगल को पार करने पर एक दूसरा जंगल आता है। जहां पर एक काफी पुराना पेड़ है, जिस पर एक सोने का फल लगा हुआ है। तुम दोनों में से उस सोने के फल को जो पहले लाएगा, उसे ही इस प्रतियोगिता का विजेता बनेगा और असल मायनों में सबसे शक्तिशाली कहलाएगा।

बंदर और हाथी दोनों को उल्लू की बात अच्छी लगी। दोनों ने फिर एक साथ पूछा, ‘इस प्रतियोगिता में क्या करना होगा?’

उल्लू ने कहा, ‘इस जंगल को पार करने पर एक दूसरा जंगल आता है। जहां पर एक काफी पुराना पेड़ है, जिस पर एक सोने का फल लगा हुआ है। तुम दोनों में से उस सोने के फल को जो पहले लाएगा, उसे ही इस प्रतियोगिता का विजेता बनेगा और असल मायनों में सबसे शक्तिशाली कहलाएगा। उल्लू की बात सुनते ही बंदर और हाथी बिना कुछ सोचे-समझे दूसरे जंगल की तरफ निकले। बंदर ने अपनी फुर्ती दिखानी शुरू की। वह एक ही छलांग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंच जाता। वहीं, हाथी तेजी से दौड़ने लगा और रास्ते में आने वाली हर चीज को अपने मजबूत सूंड से उखाड़ फेंकता।

थोड़ी ही देर में हाथी और बंदर उस जंगल से बाहर निकल गए। इस जंगल से दूसरे जंगल के बीच के रास्ते में एक नदी बहती थी। उसे पार करने के बाद ही दूसरे जंगल में पहुंचा जा सकता था।

बंदर ने फिर से अपनी फुर्ती दिखाई और झट से वह नदी में कूद गया, लेकिन पानी की लहर काफी तेज थी, तो बंदर नदी में बहने लगा। बंदर को नदी में बहते हुए देखरकर हाथी ने तुंरत अपनी सूंड से उसे पकड़कर पानी के बाहर निकाल दिया।

हाथी के इस व्यवहार को देखकर बंदर काफी हैरान हुआ। उसने विनम्र होकर हाथी को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद कहा और अपनी हार मानते हुए हाथी को ही आगे का सफर तय करने के लिए कहा।

बंदर की इस बात को सुनकर हाथी ने कहा, ‘मैं नदीं पार कर सकता है। तुम भी मेरी पीठ पर बैठकर इसे पार कर लो।’

बंदर हाथी की बात मान गया और वह हाथी के पीठ पर बैठ गया। इस तरह दोनों ने नदी पार कर ली और दूसरे जंगर में पहुंच गए। फिर दोनों ने मिलकर सोने के लगे हुए फल वाले पेड़ को भी खोज निकाला। सबसे पहले हाथी ने अपनी अपनी सूंड से उस पेड़ को गिराना चाहा, लेकिन वह पेड़ काफी मजबूत था। हाथी के प्रहार से वो पेड़ नहीं उखड़ा।

फिर हाथी ने निराश होकर कहा,  ‘मैं अब यह फल नहीं तोड़ सकता हूं।’

बंदर बोला, ‘चलो, मैं भी एक बार कोशिश करके देखता हूं।’

बंदर फुर्ती से उस पेड़ पर चलने लगा और उस डाली पर पहुंच गया जहां पर सोने का फूल लगा हुआ था। उसने वह फल तोड़ लिया और पेड़ के नीचे उतर गया।

इसके बाद दोनों वापस नदी पार करके अपने जंगल लौट आए और उल्लू को वह सोने का फल दे दिया।

फल पाने के बाद उल्लू जैसे ही इस प्रतियोगिता के लिए विजेता का नाम बोला, वैसे ही बंदर और हाथी ने मिलकर उसकी बात को रोक दिया।

दोनों ने एक साथ कहा, ‘उल्लू दादा, अब हमें विजेता का नाम जानने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रतियोगिता को हम दोनों ने मिलकर पूरा किया है। हमें यह समझ में आ गया है कि हर किसी का गुण अपने आप में अलग और खास होता है। हमने यह भी फैसला किया है कि आगे से अब हम कभी भी इस बात पर बहस भी नहीं करेंगे और मित्र की तरह इस जंगल में रहेंगे।’

उल्लू को बंदर और हाथी की बात सुनकर काफी खुशी हुई। उसने दोनों से कहा, ‘मैं तुम्हें यही समझाना चाहता था कि सभी एक-दूसरे से अलग होते हैं। अलग-अलग गुण और शक्तियां ही हमें एक दूसरे की मदद करने के काबिल बनाती हैं। साथ ही हर किसी की अपनी कमजोरियां भी होती हैं, इसलिए एक-दूसरे के साथ मिलकर रहना ही सबसे अच्छा होता है।’

उसी दिन से हाथी और बंदर दोनों मित्र हो गए और वह जंगल में खुशी-खुशी रहने लगे।

कहानी से सीख

हमें एक-दूसरे के गुणों और शक्तियों का सम्मान करना और आपस में मिल-जुलकर रहना चाहिए।

 भूखी चिड़िया: Funny story in hindi short

सालों पहले एक घंटाघर में टींकू चिड़िया अपने माता-पिता और 5 भाइयों के साथ रहती थी। टींकू चिड़िया छोटी सी थी। उसके पंख मुलायम थे। उसकी मां ने उसे घंटाघर की ताल पर चहकना सिखाया था।

घंटाघर के पास ही एक घर था, जिसमें पक्षियों से प्यार करने वाली एक महिला रहती थी। वह टींकू चिड़िया और उसके परिवार के लिए रोज रोटी का टुकड़ा डालती थी।

औरत के खाने पर निर्भर था। अब उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और न ही वो अपने लिए खान जुटाने के लिए कुछ करते हैं।

एक दिन भूख से बेहाल होने पर टींकू चिड़िया के पिता ने कीड़ों का शिकार करने का फैसला किया। काफी मेहनत करने के बाद उन्हें 3 कीड़े मिले, जो परिवार के लिए काफी नहीं थे। वे 8 लोग थे, इसलिए उन्होंने टींकू और उसके 2 छोटे भाइयों को खिलाने के लिए कीड़े साइड में रख दिए।

इधर, खाने की तलाश में भटक रही टींकू, उसके भाई और उसकी मां ने एक घर की खिड़की में चोंच मारी, ताकि कुछ मिल जाए, लेकिन कुछ नहीं मिला। उल्टा घर के मालिदिनों के खाने का इंतजाम हो चुका था। वह जब खुशी-खुशी घर पहुंचा, तो वहां कोई नहीं मिला। वह परेशान हो गया।

तभी टींकू चिड़िया, उसका भाई और मां वापस लौटे, तो पिता उन्हें पहचान नहीं पाए और गुस्से में उन्होंने सबको भगा दिया। टींकू ने पिता को समझाने की काफी कोशिश की। क ने उनपर राख फेंक दी, जिससे तीनों भूरे रंग के हो गए।

उधर, काफी तलाश करने के बाद टींकू के पिता को एक ऐसी जगह मिली, जहां काफी संख्या में कीड़े थे। उनके कई उसने बार-बार बताया कि किसी ने उनके ऊपर रंग फेंका है, लेकिन टींकू के हाथ असफलता ही लगी।

उसकी मां और भाई भी निराश हो गए, लेकिन टींकू ने हार नहीं मानी। वह उन्हें लेकर तालाब के पास गई और नहलाकर सबकी राख हटा दी। तीनों अब अपने पुराने रूप में आ गए। अब टींकू के पिता ने भी उन्हें पहचान लिया और माफी मांगी।

अब सब मिलकर खुशी-खुशी एक साथ रहने लगे। उनके पास खाने की भी कमी नहीं थी।

कहानी से सीख  

कभी भी किसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। इंसान को खुद मेहनत करके अपनी जरूरत की चीजों को जुटाना चाहिए।

गंजा आदमी और मखी: 10 line short story in hindi

एक समय की बात है… गर्मी की दोपहर थी। एक गंजा आदमी सुबह से काम करते-करते थककर आराम करने बैठा था। एक मक्खी कहीं से उड़ती हुई आई और उसके आस-पास मंडराने लगी।

गंजा आदमी उसे उड़ाता पर बार-बार वह उसके माथे पर बैठ जाती और उसे काट लेती। परेशान होकर उसने एक जोर का पंजा उसे मारा।

मक्खी तो उड़ गई पर अपना ही हाथ उसे सिर पर जोर का लगा। कुछ पलों बाद मक्खी फिर से आकर काटने लगी। सिर पर बैठने पर गंजे ने उसे फिर से जोर से मारा।

मक्खी इस बार भी बच गई। कुछ देर शांत रही। शीघ्र ही मक्खी ने फिर से भिनभिनाना शुरु कर दिया। गंजा व्यक्ति समझ गया। उसने कहा, “दुष्ट शत्रुओं पर ध्यान देने से व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है उस पर ध्यान न देने में ही भलाई

है…” थोड़ी देर बाद मक्खी उड़कर किसी और को बताने चली गई।

सिख 

 दुष्ट शत्राओं पर ध्यान देने से व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है।

बिल्ली के गले में घंटी:short funny story in hindi

एक मकान में ढेर सारे चूहे रहते थे। कहीं से एक दिन एक बिल्ली आ गई। बिल्ली से बचने का उपाय ढूँढने के लिए चूहों ने एक सभा बुलाई।

एक चूहे ने कहा, “एक घंटी लानी चाहिए और उसे बिल्ली के गले में बाँध दें, वह जहाँ भी जाएगी हमें पता चल जाएगा।”

तभी एक बूढ़े चूहे ने कहा, “सलाह तो ठीक है पर बिल्ली के गले में घंटी बाँधेगा कौन?” सारे चूहे एक दूसरे की ओर देखने लगे पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा।

सिख    

असंभव कार्य कहना आसान है पर करना कठिन।

लोमड़ी और अंगूर: Short Moral Stories in Hindi For Class 1

एक बार जंगल में लोमड़ी भोजन की खोज में घूम रही थी। गर्मी से परेशान लोमड़ी एक बगीचे में पहुँच गयी। पास ही उसे अंगूर का एक बाग दिखा। ढेर सारे अंगूर गुच्छों में लटके हुए थे। उसे बहुत प्यास लगी थी। तभी उसे अंगूर का एक पका गुच्छा लटका हुआ दिखाई दिया।

पके अंगूर देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया। उसने सोचा, “आहा! कितने अच्छे अंगूर हैं, इनसे मेरी प्यास बुझ जाएगी।”

वह थोड़ा पीछे गई, निशाना साधा और दौड़कर उछली पर अंगूर तक न पहुँच पाई। उछल-उछल कर गुच्छा पकड़ने की कोशिश करी पर सफल न हो सकी।

अंगूर का गुच्छा उसकी पहुँच से बस जरा सा बच जाता था। उछल-उछल कर बेचारी लोमड़ी थक गई। अंत में वह वापस जाने लगी। जाते-जाते उसने यह सोचकर संतोष किया, “ये अंगूर खट्टे हैं! इन्हें पाने के लिए अपना समय बर्बाद करना व्यर्थ है।”

सिख 

इच्छित वस्तु न मिलने पर मूर्ख उसकी बुराई करने लगते हैं।

शेर और सूअर: Short motivational story in hindi for success

किसी जंगल में एक शेर रहता था। गर्मी के कारण जंगल में पानी सूखता जा रहा था। एक पोखर में थोड़ा पानी देखकर शेर वहाँ पहुँचा। तभी एक सूअर भी वहाँ पानी ढूँढता हुआ आ गया।

दोनों में कौन पानी पीयेगा इस बात को लेकर झगड़ा शुरु हो गया। लड़ाई बराबरी पर थी। प्यास से दोनों बेहाल थे।

अचानक उन्होंने आसमान में बहुत सारे गिद्ध उड़ते देखे। गिद्धों ने सोचा, “अच्छा है, लड़ लें दोनों… कोई तो मरेगा ही फिर मजा आएगा… जमकर आज हमारी दावत होगी।”

गिद्धों को ऊपर मंडराते देखकर शेर और सूअर ने अपनी लड़ाई रोक दी। उन्हें माजरा समझ में आ गया था।

शेर ने सूअर से कहा, “यदि हम लोग इसी तरह लड़ेंगे तो अवश्य ही लड़ते-लड़ते मर जाएँगे और गिद्धों को दावत खाने का अवसर मिल जाएगा। उनका भोजन बनने की जगह मित्रता करने में ही हमारी भलाई है…” और फिर दोनों ने साथ में पानी पी लिया।

सिख 

झगड़ा करने से अच्छा है दोस्त बनाना।

काली हिरन: Short hindi stories by premchand

एक हिरणी की एक आँख में किसी शिकारी का तीर लग गया। उसे अब एक ही आँख से दिखाई देता था।

पर वह दुखी नही हुई किसी भी खतरे से बचने के लिए वह ऊँची पहाड़ी पर चरा करती थी।

एक बार नाव पर सवार होकर समुद्र की ओर से शिकारी आए।

हिरणी आवाज से चौकन्नी हो गई। उसने सिर घुमाकर चारों ओर देखा। नाव से निशाना साधते शिकारी को देखकर वह सब समझ गई और पलक झपकते चौकड़ी भरकर नौ दो ग्यारह हो गई।

सिख 

सूझबूझ से अपने को बचाया जा सकता है।

चतुर किसान: Short story of premchand in hindi

एक बार एक किसान एक बकरी, घास का एक गट्ठर और एक शेर को लिए नदी के किनारे खड़ा था। उसे नाव से नदी पार करनी थी लेकिन नाव बहुत छोटी थी कि वह सारे सामान समेत एक बार में पार नहीं जा सकता था।

वह अगर शेर को पहले ले जाकर नदी पार छोड़ आता है तो इधर बकरी घास खा जाएगी और अगर घास को पहले नदी पार ले जाता है तो शेर बकरी को खा जाएगा ।

अंत में उसे एक समाधान सूझ गया। उसने प बकरी को साथ में लिया और नाव में बैठकर नदी के पार छोड़ आया। इसके बाद दूसरे चक्कर में उसने शेर को नदी पार छोड़ दिया लेकिन लौटते समय बकरी को फिर से साथ ले आया।

इस बार वह बकरी को इसी तरफ छोड़कर घास के गट्ठर को दूसरी ओर शेर के पास छोड़ आया। इसके बाद वह फिर से नाव लेकर आया और बकरी को भी ले गया। इस प्रकार, उसने नदी पार कर ली और उसे कोई हानि भी नहीं हुई।

एकता में बल: Short story books in hindi

एक बार की बात है। कबूतरों का एक झुंड था। अपने राजा के साथ वह भोजन की तलाश में इधर-उधर उड़ता रहता था। एक दिन, वे सारे कबूतर एक जाल में फँस गए। उन्होंने जाल से छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

कबूतरों के राजा के मन में एक विचार आया । उसने सारे कबूतरों से कहा कि अगर वे सभी एक साथ उड़ने के लिए बल लगाएँ तो वे जाल को साथ में लेकर उड़ सकते हैं। सारे कबूतरों ने उसकी बात मानी और पूरा बल लगाकर जाल को साथ ले उड़े।

शिकारी ने जब कबूतरों को जाल के साथ ही उड़ते देखा तो वह हैरान रह गया। कबूतर उड़ते-उड़ते एक चूहे के पास पहुँचे। चूहा उनका विश्वसनीय मित्र था। चूहे ने तुरंत ही अपने दाँतों से जाल काट दिया और सारे कबूतर मुक्त हो गए ।

मेंडक और साप: Short story of hindi

एक साँप ने एक झील में रहने वाले सारे मेंढकों को खा जाने की योजना बनाई । साँप ने मेंढकों से कहा, “एक ब्राह्मण के शाप के कारण मैं तुम लोगों की सेवा करने यहाँ आया हूँ।’

मेंढकराज बहुत उत्साहित हुआ और उसने मेंढकों को यह बात बताई। सारे मेंढक उछलकर साँप की पीठ पर चढ़कर सवारी करने निकल पड़े।

अगले दिन, साँप बोला, “मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं तेजी से रेंग तक नहीं पा रहा हूँ। ” मेंढकराज बोला, “तुम अपनी पूँछ पर सबसे पीछे बैठे सबसे छोटे मेंढक को खा सकते हो । ‘

साँप ने वैसा ही किया। कुछ दिनों में साँप एक-एक करके सारे मेंढकों को खा गया । केवल मेंढकराज ही बचा । अगले दिन, मेंढकराज फिर बोला, “तुम अपनी पूँछ पर सबसे पीछे बैठे एक मेंढक को खा सकते हो,” साँप तुरंत उसको ही खा गया।

नाजुक चूजा: Top 10 moral stories in hindi

एक बार की बात है, एक नाजुक चूजा जंगल में सैर के लिए निकला। वह देवदार के पेड़ के नीचे से जा रहा था तभी अचानक एक फल उसके सिर पर आ गिरा।

नाजुक चूजे ने समझा कि हो न हो आसमान गिर रहा है। भयभीत होकर वह दौड़ने लगा। उसने जंगल के राजा शेर को यह बताने का निर्णय किया और तेजी से दौड़ने लगा। उसे बेतहाशा भागते देखकर मुर्गी ने पूछा, “अरे! ओ नाजुक चूजे, कहाँ दौड़े जा रहे हो?”

हाँफता-हाँफता नाजुक चूजा बोला, “आह! आसमान गिर रहा है, भागो… मैं शेर भाई को सूचित करने जा रहा हूँ।” मुर्गी भी नाजुक चूजे के साथ हो ली।

मार्ग में उनकी मुलाकात बत्तख से हुई। सारी बातें जानकर वह भी इनके साथ दौड़ने लगी। चलते-चलते उन्हें लोमड़ी मिली। उसने पूछा, “अरे भाई, तुम सब कहाँ जा रहे हो?” उन तीनों ने कहा, “हम लोग शेर को बताने जा रहे हैं कि आसमान गिर रहा है।”

लोमड़ी उन तीनों को शेर के पास ले गई। शेर सभी के साथ उस पेड़ के नीचे आया तभी फिर से देवदार का एक फल नाजुक चूजे पर गिरा और वह घबराकर चिल्लाया, “आह! वह देखो, आसमान गिर रहा है।” यह सुनकर सभी एक साथ हँसने लगे।

सिख 

बिना समझे अपफवाहें न फैलाएं।

चीटी और टिड्डा: Very short story

गर्मियों के दिन थे। एक मैदान में एक टिड्डा अपनी ही मस्ती में झूम-झूम कर गाना गा रहा था। तभी उधर से एक चींटी गुजरी। वह एक मक्के का दाना उठाकर अपने घर ले जा रही थी।

टिड्डे ने उसे बुलाया और कहा, “चींटी रानी, चींटी रानी, कहाँ जा रही होघ? इतना अच्छा मौसम है… आओ बातें करें… मस्ती करें…”

चींटी ने कहा, “टिड्डे भाई, मैं सर्दियों के लिए भोजन इकट्ठा कर रही हूँ। बहुत काम पड़ा है… मुझे क्षमा कर दोए मैं बैठ नहीं सकती।”

टिड्डे ने फिर कहा, “अरे! सर्दियों की चिंता क्यों करती हो? अभी तो सर्दी आने में बहुत देर है…” पर चींटी मुस्कराकर चलती रही। उसे अपना काम पूरा करना था।

शीघ्र ही सर्दियाँ आ गईं। टिड्डे के पास खाने के लिए कुछ नहीं था जबकि चींटी अपने इकट्ठे किए अनाज को आराम से बैठकर खा रही थी। टिड्डे को अब आभास हुआ कि कठिन दिनों के लिए उसे भी पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए थी।

सिख 

आज किए गए कार्य का फल आने वाले समय में मिलता है।

नीलकंठ और मोर: 10 Lines Short Stories with Moral in Hindi

एक समय की बात है… एक नीलकंठ ने मोरों को नाचते हुए देखा। वह उनके सुंदर पंखों से मोहित हो गया। वह घूमता-घूमता मोरों के रहने की जगह पहुँचा।

वहाँ उसने मोरों के ढेर सारे पंख गिरे हुए देखे। नीलकंठ ने सोचा कि यदि मैं इन पंखों को लगा ले तो मैं भी मोरों की तरह सुंदर बन जाऊँगा।

यह सोचकर उसने सभी पंखों को उठाया और अपनी पूँछ के चारों ओर रखकर बाँध लिया। फिर ठुमकता हुआ वह मोरों के बीच पहुँचा और उन्हें घूम-घूमकर दिखाने लगा।

मोरों ने उसे पहचान लिया और चोंच से मारना शुरु कर दिया। चोंच मारने के साथ वे बँधे हुए पंखों को भी खींचते जाते थे। सारे पंख निकालकर ही वे शांत हुए।

नीलकंठ के भाई-बंधु दूर से यह तमाशा देख रहे थे। नीलकंठ दुखी मन से अपने भाई बंधु के बीच पहुँचा। सभी उससे नाराज थे उन्होंने कहा, “सुंदर पक्षी बनने के लिए मात्र सुंदर पंख आवश्यक नहीं है। ईश्वर ने सबको अलग-अलग सुंदरता दी है।”

नैतिक शिक्षा 

 स्वाभाविक रहें, और दूसरों की नकल न करें।

बलशाली मछली: Short Story in Hindi with Moral

बहुत समय पहले की बात है। एक दयालु और नेक मछली थी। तभी भयानक सूखा पड़ा। संकट समझकर नेक मछली ने अपनी और अपने साथियों की जान बचाने का निश्चिय किया। एक दिन, हर तरह के खतरों का सामना करते हुए नेक मछली कीचड़ में जगह बनाती हुई सतह पर आई । उसने वर्षा के देवता इंद्र से प्रार्थना की, “हे देव! हमारे पाप क्षमा कर दो। कृपया बारिश को भेजकर हमें इस संकट से निकालो।”

उसकी यह गुहार सुनकर स्वर्ग से लेकर नर्क तक, हर किसी के मन में दया पैदा हो गई। इंद्र ने वर्षा को पृथ्वी पर भेज दिया और महान नेक मछली तथा उसके साथी बच गए।

गधा और गाड़ी वाला:Hindi Short Story with Moral

एक गाड़ी वाला अपने गधे को गाड़ी में जोते जा रहा था। अचानक गधा रस्सी तोड़कर गाड़ी से भाग निकला। वह अंधाधुंध भागता गया और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर निकल गया। वह बिना सोचे-समझे भागे जा रहा था। भागते-भागते वह एक ऊँचे टीले पर पहुँच गया, जहाँ से वह आगे कदम बढ़ाने ही वाला था कि उसके मालिक ने उसकी पूँछ पकड़ ली और उसे पीछे खींच लिया।

गधे ने छुड़ाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन मालिक भी पूरी ताकत से उसे पीछे खींच रहा था। मालिक गधे को गिरने से बचाना चाहता था लेकिन गधे को यह बात समझ में नहीं आ रही थी। आखिरकार, मालिक ने उसे छोड़ दिया। “ले, अगर तू जाना ही चाहता है, तो फिर तेरी इच्छा। हठ करने वाले को बाध्य नहीं करना चाहिए।” मालिक से छूटते ही गधा आगे बढ़ा और टीले से नीचे गिरकर मर गया।

बच्चों को कहानी सुनना कैसा लगता है ?

क्या आपको पता है बच्चों को कहानी सुनना क्यों इतना ज्यादा पसंद है इसकी वजह है कि उनको तरह तरह के करैक्टर देखने को मिलते है और तरह तरह की आवाजें भी सुनने को मिलती है जिस वजह से उनको कहानी में बहुग मज़ा आता है ।

  • लेकिन अगर वही कहानी बिना कैरेक्टर और एक ही आवाज में सुनाई जाए तो वह बोर हो जाएंगे। इसलिए आपको अपने बच्चों को कहानियां सुनाने के लिए खुद को क्रेटिविटी में ढालना होगा। जैसे कि आपको तरह तरह के साउंड जो एनिमल के होते है या फिर उनके सामने चित्र रखने होंगे।
  • एक बार जब आप बच्चों को कहानी सुना देते हो तो अंत मे उनसे कुछ सवाल भी करे उनसे पूछिए की कहानी से क्या सीखा ,उन्हें कहानी में छुपी शिक्षा और सीख के बारे में भी बतईए।
  • कभी कभी कुछ कहानियां हमारे जीवन से मेल खाती है जिनसे हम बजी कुछ सीख सकते है।
  • जब एक बार आप कहानी सुनाते है तो दुबारा बच्चों को खुद पढ़ने की आदत भी डालते रहे।जिससे उसका इंटरेस्ट बड़े।

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  • admin
  • November 24, 2022

MPL पर शतरंज कैसे खेले?

शतरंज का खेल विश्व स्तर पर सबसे लोकप्रिय बोर्ड खेलों में से एक गेम है जो लाखों लोगों द्वारा कंप्यूटर या किसी मित्र के साथ ऑनलाइन, क्लबों में, घरों में और टूर्नामेंटों में खेला जाता है। यह न केवल दोस्तों के साथ खेला जाने वाला बल्कि टूर्नामेंटों में भी खेला जाने वाला गेम है। शतरंज दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला सबसे पुराना रणनीति खेल है। ऑनलाइन शतरंज पहेली ने महामारी और पॉप संस्कृति में खेल को प्राप्त ध्यान के कारण बढ़ती लोकप्रियता हासिल की कर ली है। ऑनलाइन शतरंज का खेल पारंपरिक बोर्ड गेम में कुछ बदलाव के साथ आता है जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ा सके । 

इसके साथ ही ऐसे काफी सारी साइट हैं जो शतरंज खेल की पेशकश करती हैं जहाँ रियल मनी गेम की तरह आप इस खेल को खेलने के लिए जा सकते हैं। काफी सारी साइटें में से एक जगह MPL भी हैं जहाँ आप शतरंज का खेल खेल सकते हैं। तो चलिए जानते हैं MPL पर शतरंज खेलें। शतरंज खेलने के लिए शतरंज के नियम और गोटियों के बारे में जानना ज़रूरी हैं पहले जाने शतरंज के नियम क्या है । 

शतरंज के नियम क्या है । 

 राजा

राजा सबसे महत्वपूर्ण शतरंज में गोटी  है, लेकिन अगर बात करें इसकी चाल की तो यह भी सबसे कमजोर में से एक है। राजा केवल एक वर्ग को किसी भी दिशा में ऊपर, नीचे, बाएँ, दाएँ और तिरछे घुमा सकता है। जब कोई गोटी राजा पर हमला करता है, तो इसे ‘चेक’ के रूप में जाना जाता है।

वजीर या रानी 

रानी शतरंज के शक्तिशाली गोटियों  में से एक है, क्योंकि वह किसी भी दिशा में चल सकती है। लंबवत, क्षैतिज और तिरछे – किसी भी संख्या में वर्गों को स्थानांतरित कर सकती है। यह शतरंज खेल में एक अहम गोटी होती है। 

हाथी 

हाथी की  गोटी एक सीधी रेखा में लंबवत और क्षैतिज दोनों तरह से चल सकते हैं। एक साथ उपयोग किए जाने पर वे बेहद शक्तिशाली हो सकते हैं।

ऊँट

एक शतरंज के खेल में ऊँट की गोटी जितने चाहें उतने खाली वर्गों को स्थानांतरित कर सकते हैं, लेकिन केवल तिरछे रास्ते में ही चलता है। प्रत्येक ऊँट एक निश्चित रंग (सफेद या काला) से शुरू होता है। वे पूरे खेल में इसी रंग में बने रहते हैं और यात्रा करते हैं। आगे भी बढ़ सकते हैं और ऊँट पीछे भी जा सकता है। 

घोड़ा

शतरंज खेल मे सबकी अपनी चाल निर्धारित होती है इसी तरह घोड़े की भी चाल निर्धारित है। बता दें कि घोड़ा एल’ आकार में दो कदम आगे और एक कदम बाएं या दाएं चलता है। यह शतरंज के गेम मे अद्वितीय है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा है जो अन्य शतरंज की गोटियों पर ‘कूद’ कर उन्हें पीछे छोड़ सकता है। यह किसी गोटी को कूद भी सकता है बाकी को ऐसा अधिकार नहीं होता है। 

प्यादे 

प्यादे आमतौर पर शतरंज का खेल शुरू करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पहली गोटी के रुप में  होते हैं। वे एक समय में केवल एक वर्ग आगे बढ़ सकते हैं लेकिन सामने वाले की गोटी को तिरछे ढंग से मारता है। इसपर ध्यान दें कि प्यादे पीछे की ओर नहीं बढ़ सकते हैं और न ही पिछले गोटी को सीधे अपने सामने ले जा सकते हैं और न ही मार सकते हैं। 

एमपीएल पर शतरंज खेलें 

ऐसी काफी सारी साईटें हैं जहाँ घर बैठे आप खेल सकते हैं लेकिन हर सही दिखने वाली साइट ऐप लीगल और सही नहीं होती हैं। वहीं शतरंज खेलने के लिए आपके पास एक जगह एमपीएल है जो देश में लीगल बस आपको ध्यान से खेलना है और लत नहीं लगानी है। आप MPL पर ऑनलाइन शतरंज खिलाड़ियों के साथ इसका मुकाबला करें और असली पैसे जीत सकते हैं और अपनी जीत को तुरंत अपने बैंक खाते में वापस ले लें।  आपको यहाँ पर परेशानी मुक्त और सुरक्षित लेनदेन का अनुभव मिलता है। इसके साथ ही बड़े नकद पुरस्कार जीतने के अवसर के लिए बड़े टूर्नामेंट में भाग ले सकते हैं। आपको यहाँ पर 60+ से अधिक अन्य खेलों के साथ एक सहज यूजर इंटरफेस का अनुभव मिल सकता है। आप इसपर अपने दोस्तों के सारे चैट के माध्यम से चैट भी कर सकते है। तो इसके लिए आप  एमपीएल  ऐप  डाउनलोड करने के बारे मे जाने फिर शतरंज खेलें। 

एमपीएल शतरंज ऐप कैसे डाउनलोड करें?

एमपीएल शतरंज गेम ऐप एंड्रॉइड और आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त मे डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। इसके लिए आपको कुछ खर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। आईओएस यूजर्स के लिए ऐप स्टोर से शतरंज गेम डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए सभी उपयोगकर्ता इन स्टेंप को फॉलो करना होगा ऐसा करके ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।

  • सबसे पहले एमपीएल साइट पर जाएं । 
  • इसके बाद डाउनलोड लिंक के साथ एसएमएस प्राप्त करने के लिए अपना मोबाइल नंबर लिखने की आवश्यकता होगी। जिससे आपका नंबर का रेजिस्ट्रेशन हो जाएगा। 
  • इसके बाद एमपीएल ऐप डाउनलोड करने के लिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें। 
  • ऐप पर रजिस्टर करें और शतरंज का खेल खोजें।
  • गेम इंस्टॉल करने के बाद  खेलना शुरू करें।
  • अब शतरंज का खेल डाउनलोड करें और एमपीएल के साथ खेलने का एक अलग तरीका का अनुभव कर सकते हैं। 

ऑनलाइन शतरंज कैसे खेलें?

यदि आप शतरंज के नियमों को जानते हैं, तो आप नीचे दिए गए स्टेंप को फॉलो करके एमपीएल ऐप पर शतरंज खेलना शुरू कर सकते हैं। तो सबसे पहले सुनिश्चित करें कि आपके पास एक अच्छे गेमिंग अनुभव के लिए एक स्थिर इंटरनेट कनेक्शन है। जिससे आपके सामने की रुकावट न आए। 

  • एमपीएल ऐप पर गेम पर क्लिक करें और अपनी पसंदीदा  टूर्नामेंट  को चुनें।
  • खेल तब शुरू होता है जब आपका   मिलान उससे होता है जिसके साथ आप खेलगे। 
  • जब आपकी बारी हो एक गोटी पर टैप करें, और उपलब्ध म एक चाल चलने के लिए टैप करें।
  • खेल को जीतने के लिए अपने सभी संभावित कदमों को रोककर सामने वाले के राजा की जाँच करें।
  • यदि आप समय से बाहर हो जाते हैं तो आप खेल में हार सकते हैं। 
  • आपको और आपके साथ खेल रहे व्यक्ति को गेम खेलने के लिए 3 मिनट का समय मिलेगा।
  • हालाँकि, प्रत्येक चाल आपको 2 सेकंड का बोनस समय भी आपको देती है।
  • admin
  • November 23, 2022
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