Gallbladder In Hindi | पित्ताशय की पथरी के कारण,लक्षण,उपचार


Gallbladder in hindi (पित्ताशय) यह रोग का नाम होता है | जैसे शरीर में बाकी सब रोग होते हैं यह भी शरीर के अंदर एक रोग होता है जिसे  पित्ताशय कहते हैं| आपने कई बार सुना होगा Gallbladder Stone के बारे में| Gallbladder एक ऑर्गेनिक स्ट्रक्चर होता है | जो Attach होता है हमारे Liver से यह हमारे Liver के पीछे होता है|

 Liver  के जो Sells होते हैं वह Angyms Prepare करते  हैं| Angyms जो होते हैं वह  हमारे Digesions और बहुत सारे काम में Help करते है| ऐसा ही कुछ मटेरियल  है जो  हमें Fat Digisions में मदद करता है Fat मतलब Oily Food जो हम खाते हैं

 उसको Digest  करने में Help करता है  ऐसा कुछ Component (Fat) वह Component Release होता है Liver से मगर वह Store होता है Liver के पीछे Gallbladder में | Gallbladder एक Storage जगह है | जब हम कोई Oily चीज खाते हैं तो हो Component  धीरे-धीरे  निकलकर Stomach  के अंदर Release होता है | 

Gallbladder जब Function  करना बंद कर  देता है तो उसके अंदर Folds  होने लगते हैं| जिसको हम  कहते हैं Cailculy इसका मतलब  इसके अंदर थोड़ा-थोड़ा करके  वह जो Sols है वह Deposit होने लगता है | तो वह Stone बन जाता है| जिसे हम कहते हैं Gallblader Stone यह तब बनता है जब Gallblader काम करना बंद कर दे तब  यह जा कर Stone  बनता है|

Gallbladder क्या है: Gallbladder In hindi

लीवर से पित निकल कर जहां जमा होता है उसे Gallbladder कहते हैं| Gallbladder से पित जो निकलता है वह हमारे भोजन को पाचन में मदद करता है | कभी-कभी किन्ही कारणों से पित्त ठीक से नहीं निकलता उसका कार्य धीमा पड़ जाता है|

  जिस कारण से उसी पित में से छोटे-छोटे कण के रूप में जो Colgostol होता है Bile पिगमेंट होता है और जो कैल्शियम सोल्ट होते है वह छोटे-छोटे पाथरो के रूप में पित के अंदर जमा हो जाते हैं कभी-कभी यह Gallbladder के अंदर छोटे छोटे पत्थर के रूप में काफी सारे जमा हो जाते हैं कभी-कभी एक बहुत बड़ी  पथरी जैसा रूप ले लेती है| और कभी कभी 1 चूरे के जैसे पित्त की थैली के अंदर इकट्ठा हो जाता है | 

ऐसे तो जब पित्ताशय में पथरी बन जाती है तो प्रकृति उसे बाहर निकालने की पूरी कोशिश करती है और कई बार उसे बाहर निकाल भी देती है और हमें पता भी नहीं चलता | और कई बर जब उसे बाहर निकालती है तो हमे थोड़ी दिक्कत महसूस होती है और कहीं बार हमें खुद प्रयास करने पड़ते हैं और उसे बाहर निकालना पड़ता है | 

Gallbladder में पथरी बनने के कारण क्या है ?

Gallbladder में पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण है Constipation जो लोग ज्यादा भोजन करते हैं या ज्यादा मिर्ची मसाले वाला अगरइष्ट भोजन करते हैं| पानी कम पीते हैं|  परीक्षम कम करते हैं जिनका वजन ज्यादा होता है और जिनका पेट खराब रहता है|

 अधिकतर यह रोग उन्हें ही होता है वैसे यह रोग 1 दिन का काम नहीं है जब हमारा शरीर विकारों से लद जाता  है तब हमें Gallbladder में  पथरी होती है या शरीर में और भी कोई रोग जब ही आता है जब हमारा शरीर Tocsin से भर जाता है |

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Gallbladder में पथरी के लक्षण क्या है ?

जब Gallbladder से पथरी अपने आप बाहर निकल आती है तो कभी-कभी लीवर के पास दर्द महसूस होता है|  अगर पथरी बड़ी होती है  और अपनी जगह से हिल जाती है तो भी Gallbladder मैं बहुत ज्यादा  दर्द महसूस होता है | 

और कभी-कभी वह दर्द इतना असहनीय होता है कि उसके कारण बुखार भी आ जाता है | जी मिचलाता है उल्टी आती है और व्यक्ति दर्द के कारण पसीने पसीने हो जाता है| ठंडे पसीने आने लग जाते हैं और व्यक्ति बहुत ही थकान और कमजोरी महसूस करता है | 

पथरी  चाहे पित्ताशय में हो, या किडनी में हो या मूत्राशय में हो कहीं पर भी हो पथरी कोई रोग नहीं है पथरी आने का मुख्य कारण  हमारे शरीर के अंदर Tocsins  का  बहुतायत में जमा होना होता है जब शरीर के अंदर बहुत ज्यादा विश पैदा हो जाते है  तो वह पथरी का रूप ले लेते हैं| इसलिए पथरी का ऑपरेशन कराने के बाद भी पथरी बनना बंद नहीं होता पथरी तब होती है जब हम अपने पुरे शरीर को Detox करते है| 

  • पेट के दाएं तरफ दर्द उठकर कमर तक या दाएं कंधे की तरफ जाता है|
  • पित्त की थैली की वजह से पीलिया हो जाता है|
  • तेजाब का ज्यादा बनना एसिडिटी  हो जाना  कभी-कभी पित्त की थैली की वजह से हो जाता है|
  • पित्त की थैली में मवाद बनना जिसे तेज बुखार ठंड लग सकती है|

पथरी के घरेलू नुक्से

मुनक्का 

इसके लिए रात को 10  मुनक्का भिगो दें  और सुबह इसके बीज निकालकर खाली पेट चबा चबाकर खाएं  और जब मुनक्का खाए तो मुनक्का के साथ में 300 ग्राम सेब भी  खाने जरूरी है|  इसी तरह जब शाम को मुनक्का खाना है

 तो सुबह मुनक्का भिगो दें  तो शाम को फुल  कर तैयार हो जाएंगे  और शाम को 4 बजे  या 5 बजे  के आसपास मुनक्का के बीज निकालकर  वह 10 मुनक्का खा ले और साथ में 300 ग्राम  नाशपाती या  बब्बूगोसा  आपको जरूर आना है | जिन व्यक्तियों को डायबिटीज है मुनक्का की जगह अंजीर खा सकते हैं |

 3 अंजीर सुबह खाए  भिगोकर के और 3 अंजीर शाम को  खाए भिगोकर के सुबह आपको अंजीर के साथ सेब  खाना है और  ऐसे ही शाम के समय अंजीर  के साथ नाशपाती या बब्बुगोसा खाना है |

 अंजीर डायबिटीज को कंट्रोल करती है| मुनक्का के जो बीज निकलते हैं उनको आपको फैकना नहीं है| उन बीजों को आप धूप में सुखा ले  और उसका पाउडर बनाकर रख ले | रात को सोने से पहले 1 ग्राम का चौथाई हिस्सा  आपको लेना है  और उसके ऊपर हल्का गर्म दूध घुट घुट करके पीना है  यह काम आपको रोजाना करने हैं| यह आपको नाश्ते में लेना है| 

 और जब आप सुबह उठते है तो  एक गिलास गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़ कर घूट घूट करके पिए और उसके 1 घंटे बाद  सफेद पेठे का जूस निकाल कर के  200 ग्राम जूस आपको निकालना है  और फिर उसे  घुट घुट कर के पीना है|  और फिर उसके घंटे बाद ही आपको नाश्ता करना है मुनक्का वाला|

पेठे में पोटेशियम, आयरन और विटामिन ए बी सी भरपूर मात्रा में होते हैं|  पेठे का सेवन करने से यूरिन बिल्कुल खुलकर के पास होता है | शरीर से टॉक्सिन बाहर जाते हैं|  और बिना ऑपरेशन के पतरी धीरे-धीरे निकल जाती है| लिवर की गर्मी को बाहर निकालता है और बॉडी को डिटॉक्स करता है|

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पथरी की प्राकृतिक चिकित्सा

यह जो चिकित्सा है पथरी निकालने में इसका अहम  रोल है|  हमें अपने  पित्ताशय के ऊपर गरम ठंडी  सिकाई करनी है|  क्योंकि पित्ताशय लिवर के नीचे होता है|  और हमें उसी जगह की सिकाई करनी है|  गर्म पानी की बोतल को उसी जगह रखना है  उसके  बाद 3 मिनट गर्म करना है और 1 मिनट ठंडा | इसी तरह हमें 3 मिनट गरम सिकाई करनी है|  और 1 मिनट  उस पर ठंडा  तोलिया रखना है|  इस  तरह से हमे  4  राउंड करने हैं |  इस चिकित्सा को करने के लिए  एक Hot Water Bag चाहिए |जिसके अंदर गर्म पानी भरना है| गर्म पानी इतना तेज़ भरना है|  के आराम से सिकाई हो सके| 

 जब आप Bag मैं गर्म पानी भरते हैं तो उसका ऊपर से मुंह खोल कर हवा निकाल दे|  ऐसा करने से इसकी हवा निकल जाती है सीधा हो जाता है| उसके बाद बोटल को पेट के ऊपर रखना है | और 3 मिनट बाद  बोतल को हटा देना है | फिर ठंडे पानी में तोलिया  डूबा कर उसे 1 मिनट के लिए पेट के ऊपर रखना है|

 इसी तरह से 4 बार ऐसा करना है| जब सिकाई करें पेट भरा हुआ नहीं होना चाहिए पेट बिल्कुल होना चाहिए|  गरम ठंडी सिकाई कर लो हमारी पित नली Relax हो जाती है  उसमें से पथरी निकलने में  आसानी होती है |गरम ठंडी सिकाई करने से और ताज़ा पानी का एनिमा लेने से जो पित्ताशय में पित का स्त्राव है|

 उसकी वृद्धि आसानी से करती है जो उसका कार्य धीमा पड़ गया था  वह कार्य क्षमता उसकी बढ़ जाती है|  और  पथरी सत्त्राव के साथ बाहर निकल जाती है| छोटी छोटी पथरी पित के साथ बाहर निकल आते हैं|  लेकिन जो बड़ी पथरी होती है | जब हम अपनी डाइट में चेंज कर लेते हैं Alcline Food खाने लग जाते है तो वह बड़ी पथरी धीरे धीरे टूटकर छोटे टुकडो में बदल जाती है |या घुल घुल के खत्म हो जाती है |

इसलिए डाइट में चेंज करना बहुत ज्यादा जरूरी है| जैसे दिन की शुरुआत हम नींबू पानी से करते हैं इसी तरह जब भी हम दिन  में पानी पिए  हल्का गुनगुना होना चाहिए और उसमें हर बार आधा नींबू निचोड़ करके क्योंकि निंबू पथरी को काटता है| 

 इसके अलावा  मौसम के फल , ड्राई फ्रूट , हरी सब्जियां, सलाद , अंकुरित रोजाना खाना चाहिए|  और  अगर गाजर का मौसम हो तो  गाजर और चुकंदर का जूस  पीना चाहिए|  क्योंकि Tocsions  को बाहर निकालता है| जब शरीर में प्रॉब्लम है| या बॉडी को डिटॉक्स करना हो  तो रोजाना 80% Alkaline और 20% Acidic डाइट लेनी चाहिए | सदा भोजन करना चाहिए |

पित्ताशय का क्या काम होता है?

पित्ताशय का काम होता है लीवर द्वारा बनाए गए बाइल जूस से इकट्ठा करना| खाना खाने के बाद बाइल जूस निकलता है और यह खाना हजम करने में मदद करता है|

बाइल जूस क्या काम होता है?

  • हरे रंग का जूस होता है गाड़ी पानी जैसा
  • हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है|
  • हमारे शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान पाचक अग्नि जैसी चीजे नियंत्रित करना|

पित्त में पथरी के कारण

  • अधिक वजन या मोटापा होना|
  • ज्यादा तेल , घी वाला खाना खाना|
  • ऐसा खाना ना खाना जिसमें रेशा (फाइबर) हो|
  • कम समय में तेजी से वजन कम होना|
  • पित्त पथरी का पारिवारिक इतिहास हो ना|
  • महिलाओं में अधिक पाया जाता है|

पित्त में पथरी के 7 लक्षण

  1.  जी मिचलाना
  2.  उल्टी
  3.  खट्टी डकार
  4.  गहरा पेशाब
  5.  मिट्टी के रंग का मल 
  6.  पेट दर्द
  7.  दस्त

पित्त में पथरी की जांच

  • Ultrasound (Abdomen)
  • LFT Test (Bilirubin)
  • Urine Examination (R/M)
  • CT Scan 
  • Gall Bladder Biopsy 

पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए?

फल 

  • खट्टे फल: नींबू ,संतरा, स्ट्रॉबेरी
  • केला
  • नाशपाती
  • अनार
  • नारियल
  • अमरूद

Fiber Foods (रेशेदार खाद्य पदार्थ)

  • मसूर दाल
  • राजमा
  • हरी मटर, सफेद मटर
  • काला चना, सफेद चना
  • लोबिया
  • सोयाबीन
  • जौ 

सब्जियां

  • गहरे हरे रंग का पत्तेदार साग 
  • चुकंदर
  • शलगम
  • अदरक

पित्त की पथरी में क्या खाना नहीं चाहिए?

  • मक्खन, पनीर,घी ,
  • लाल मास
  • चटपटा खाना
  • केक
  • मीठा

Fatty Food ( वसायुक्त खाना)

  • पेस्ट्री
  • आइसक्रीम
  • पूरण वसा वाला दूध,दही 
  • कोल्ड ड्रिंक
  • चाय और कोफ़ी |

 पित्त की पथरी का इलाज

Surgery एक बेस्ट ऑप्शन है पथरी के इलाज के लिए इससे बार-बार पथरी नहीं होगी|  यदि आप अच्छे से हॉस्पिटल से ऑपरेशन कराएं| पथरी आराम से निकल जाएगी|  यदि आप ऑपरेशन नहीं कराना चाहते  तो आप होम्योपैथी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं इसमें थोड़ा समय अधिक लगता है पर यह भी कार्यकर्ता होता है| 

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पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए

फल 

खट्टे फल: नींबू ,संतरा, स्ट्रॉबेरी,केला,नाशपाती,अनार,नारियल,अमरूद |

Fiber Foods (रेशेदार खाद्य पदार्थ)

मसूर दाल,राजमा,हरी मटर, सफेद मटर,काला चना, सफेद चना,लोबिया,सोयाबीन,जौ |

सब्जियां

        गहरे हरे रंग का पत्तेदार साग ,चुकंदर,शलगम,अदरक |

पित्त की पथरी में क्या खाना नहीं चाहिए

मक्खन, पनीर,घी ,लाल मास,चटपटा खाना,केक,मीठा|

Fatty Food ( वसायुक्त खाना)

पेस्ट्री,आइसक्रीम,पूरण वसा वाला दूध,दही,कोल्ड ड्रिंक,चाय और कोफ़ी |

FAQ-

गॉलब्लेडर में स्टोन होने से क्या होता है?

पित्ताशय में पथरी होने से कमर में दर्द, कंधों में दर्द जैसी कई परेशानियां होते हैं| 

गॉल ब्लैडर को हिंदी में क्या कहते हैं?

गॉल ब्लैडर को हिंदी में पित्त की थैली कहते हैं|

गाल ब्लैडर में पथरी होने के क्या लक्षण है?

 जी मिचलाना,
उल्टी,
खट्टी डकार,
गहरा पेशाब,
मिट्टी के रंग का मल, 
पेट दर्द,
दस्त|

गाल ब्लैडर में स्टोन कैसे बनता है?

Gallbladder मैं पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण है Constipation जो लोग ज्यादा भोजन करते हैं या ज्यादा मिर्ची मसाले वाला अगरइष्ट भोजन करते हैं| पानी कम पीते हैं|  परीक्षम करते हैं जिनका वजन ज्यादा होता है और जिनका पेट खराब रहता है अधिकतर यह रोग उन्हें ही को होता है वैसे यह रोग 1 दिन का काम नहीं है जब हमारा शरीर विकारों से लद जाता है तब हमें Gallbladder में  पथरी होती है | या शरीर में और भी कोई रोग जब ही आता है जब हमारा शरीर Tocsin से भर जाता है |

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